Date: 24 June 2018

चुनौतियों के बीच एक बेहतर बजट

By Sachivalaya :03-03-2018 08:00


मध्य प्रदेश की शिवराज सरकार का यह अंतिम बजट एक लोकलुभावन बजट है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर बीते कुछ महीनों में विभिन्न् वर्गों को लुभाने के लिए जो प्रमुख घोषणाएं की हैं, उन्हें साधने के साथ-साथ हर वर्ग एवं क्षेत्र को लाभ देने के प्रावधान इस बजट में किए गए हैं। प्रदेश सरकार की सभी फ्लैगशिप योजनाओं हेतु सराहनीय बजट आवंटन किया गया है।

निस्संदेह प्रदेश के वर्ष 2018-19 के बजट में वित्त मंत्री जयंत मलैया कृषि व ग्रामीण विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता देते नजर आए। केंद्र सरकार की तरह वर्ष 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य घोषित करते हुए वित्त मंत्री ने किसानों व खेती के लिए बजट में घोषणाओं की झड़ी लगा दी। इस तरह प्रदेश सरकार ने बजट के माध्यम से किसानों को साधने की हरसंभव कोशिश की है। बजट में किसानों और कृषि के लिए 37,498 करोड़ रुपए का प्रावधान सराहनीय कहा जा सकता है। अल्पकालिक कर्ज चुकाने हेतु डिफॉल्टर किसानों के लिए समझौता योजना के तहत 350 करोड़ रुपए का प्रावधान भी अच्छा है। बजट में फसल बीमा योजना के लिए 2 हजार करोड़ का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही सरकार कृषक समृद्धि योजना लागू करने जा रही है। नए बजट में करीब दो लाख हेक्टेयर सिंचाई क्षेत्र बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। सिंचाई क्षेत्र के लिए 10,928 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। कई नवीन माइक्रो सिंचाई सुविधाएं भ्ाी शुरू की जाएंगी। भावांतर भुगतान योजना के दायरे को भी बढ़ाया गया है। इसके लिए तीन हजार करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। फसल बीमा योजना के लिए दो हजार करोड़ रुपए और नई कृषक समृद्धि योजना के लिए 3650 करोड़ रखे गए हैं। कृषि प्रोत्साहन योजना के तहत गेहूं और धान पर समर्थन मूल्य के अतिरिक्त प्रति क्विंटल प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। बजट में प्रदेश की करीब 50 मंडियों को ई-सेवा से जोड़ने के प्रावधान किए गए हैं। फसल बीमा को कारगर बनाने, किसानों को बिजली, खाद व राहत वितरण के लिए बजट में पर्याप्त धनराशि रखी गई है।
इस बजट में गरीबों के कल्याण पर भी जोर है। नए वित्त वर्ष में दीनदयाल रसोई योजना के तहत प्रारंभ में प्रदेश के चार बड़े शहरों के गरीब लोगों को 5 रुपए में भोजन उपलब्ध कराने की योजना है। इस योजना को कॉर्पोरेट सामाजिक जवाबदेही (सीएसआर) कोष से संचालित किया जाएगा। बाद में योजना का विस्तार पूरे प्रदेश में किया जाएगा। प्रदेश सरकार ने सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के तहत पेंशन की राशि 150 रुपए से बढ़ाकर 300 रुपए की है, जो आज के समय के हिसाब से नाकाफी लगती है। समाज में विधवाओं की कमजोर स्थिति को देखते हुए शासन ने सेवारत और पेंशनभोगियों को छोड़कर सभी विधवाओं को पेंशन देने का निर्णय लिया है। इसके लिए बजट में 1,501 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। इस बजट में गरीबों एवं पिछड़े वर्ग की छोटी योजनाओं पर ज्यादा ध्यान दिया गया है। इसमें आदिवासी, अनुसूचित जाति और पिछड़ा वर्ग के लोगों के लिए खासतौर पर नई योजनाओं को शामिल किया गया है। इन वर्गों के लिए स्वरोजगार की ऐसी नई योजनाएं बजट में प्रस्तुत की गई हैं, जिसमें सरकार थोड़ा पैसा देकर हितग्राही की आमदनी बढ़ा सके। स्वरोजगार के लिए बजट आवंटन दोगुना किया गया है। मुख्यमंत्री ऋ णी सेवाधार योजना भी शुरू की गई है। यद्यपि प्रदेश के खजाने की खस्ता हालत है, फिर भी सरकार चुनावी साल में कर्मचारियों को साधने के लिए खजाने का मुंह खोलने से पीछे नहीं हटी है। प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों को खुशियां देने के प्रावधान भी नए बजट में किए गए हैं।


 
इस बजट में प्रदेश के भीतर बुनियादी ढांचे के विकास के साथ-साथ औद्योगिक विकास प्रोत्साहन को प्राथमिकता दी गई है। स्मार्ट सिटी के लिए 750 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। बजट में भोपाल व इंदौर में मेट्रो ट्रेन, जबलपुर और ग्वालियर में नए बायपास के निर्माण की शुरुआत की बात कही गई है। सड़क निर्माण और पुल निर्माण के लिए बजट में अच्छे प्रावधान किए गए हैं। बजट के माध्यम से वित्त मंत्री ने प्रदेश के विनिर्माण क्षेत्र को गति देने के लिए 855 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है। जीएसटी के बाद उद्योगों की मुश्किल कम करने के लिए 150 करोड़ रुपए रखे गए हैं।

शिक्षित-अशिक्षित व अल्पशिक्षित युवाओं की रोजगार जरूरतों के लिए कौशल-प्रशिक्षण के प्रयासों को अमलीजामा पहनाने के लिए विशेष बजट आवंटन किया गया है। वित्त मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री मेधावी विद्यार्थी योजना आगामी वित्त वर्ष से शुरू की जाएगी व इसके लिए 1,000 करोड़ रुपए की राशि का पृथक कोष स्थापित किया जाएगा। इस कोष हेतु 500 करोड़ रुपए का प्रावधान इस बजट में रखा गया है। इस योजना के तहत 12वीं की परीक्षा में न्यूनतम 85 प्रतिशत अंक लाने वाले विद्यार्थी पात्र होंगे।


यद्यपि यह बजट हमारे प्रदेश के गांव, किसान, गरीब समेत विभिन्न् वर्गों को राहत पहुंचाता लगता है, लेकिन इसमें कुछ कमियां भी दिखाई दे रही हैं। इस बजट में उद्योग-कारोबार और निर्यात वृद्धि के लिए पर्याप्त आवंटन और योजनाएं नहीं हैं, जो कि अखरने वाली बात है। रोजगार और स्वरोजगार के मद्देनजर भी वित्त मंत्री से और अधिक कदमों की उम्मीद की जा रही थी। प्रदेश सरकार के कई स्वप्निल लक्ष्यों के लिए इस बजट में आवंटन बहुत छोटी-छोटी राशियां लिए हुए हैं।

निश्चित रूप से प्रदेश के वित्त मंत्री जयंत मलैया के समक्ष जहां एक ओर इस बजट में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा समय-समय पर की गई विभिन्न् घोषणाओं को अमलीजामा पहनाने व विभिन्न् वर्गों की कई अपेक्षाओं को पूरा करने की बड़ी चुनौती थी, वहीं उन्हें राजकोषीय संतुलन भी साधना था। प्रदेश सरकार पर डेढ़ लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का कर्ज है। ऐसे में कहना होगा कि वित्त मंत्री ने सीमित वित्तीय संसाधनों का चतुराईपूर्वक संतुलित उपयोग करते हुए किसान, गरीब कल्याण और बुनियादी ढांचा विकास को प्राथमिकता देने वाला बेहतर बजट प्रस्तुत किया है।

वित्त मंत्री ने इस बजट को पेश करते हुए राजकोषीय बजट प्रबंधन अधिनियम के निर्देशों का भी ध्यान रखा है। राजकोषीय घाटा प्रदेश के सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) के 3.5 फीसदी की सीमा के अंदर ही रखा गया है। लेकिन इसके बावजूद प्रदेश सरकार के इस बजट की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि सरकार बजट योजनाओं का क्रियान्वयन किस तरह करेगी और अतिरिक्त संसाधन किस तरह जुटाएगी।
 

Source:Agency

 

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