Date: 24 June 2018

राहुल गांधी की सहनशीलता

By Sachivalaya :13-03-2018 07:53


राहुल गांधी की मलेशिया और सिंगापुर यात्रा के दौरान दिए गए भाषण चर्चा का विषय बने हुए हैं। मलेशिया में एक कार्यक्रम में राहुल से एक व्यक्ति ने पूछा कि वह किस प्रकार नोटबंदी को लागू करते। इस पर राहुल गांधी का जवाब था कि अगर मैं प्रधानमंत्री होता और कोई मुझे नोटबंदी लिखी हुई फाइल देता तो मैं उसे डस्टबिन में फेंक देता। क्योंकि मुझे लगता है कि नोटबंदी के साथ ऐसा ही किए जाने की जरूरत है।

उनके इस जवाब से भाजपा काफी चिढ़ गई है। उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राहुल गांधी कई चीजें फाड़ देते हैं। और इसलिए जनता उनकी अपील को फाड़कर फेंक देती है। भाजपा नेता शहनवाज हुसैन ने कहा कि इस तरह की भाषा बोलने वाला कभी प्रधानमंत्री नहीं बन सकता। राहुल खुद अपना मजाक बनवा रहे हैं। भाजपा के नेता और समर्थक हमेशा से राहुल गांधी का मखौल उड़ाने में आगे रहे हैं और राहुल गांधी मोदीजी या सरकार के लिए कुछ कहें यह उन्हें बर्दाश्त नहीं होता। इसलिए राहुल के बयान पर उनका तिलमिलाना स्वाभाविक है। रहा सवाल भाषा और प्रधानमंत्री पद का, तो इसमें मोदीजी से बड़ी मिसाल क्या हो सकती है?

चुनावी रैलियों से लेकर संसद के सदनों के भीतर उन्होंने कई बार भाषा की मर्यादा को तोड़ा है। केवल राहुल और सोनिया गांधी ही नहीं, वे दिवंगत प.जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी तक पर अपने कटाक्ष पेश कर चुके हैं। राज्यसभा में पिछले साल डा.मनमोहन सिंह और इस साल रेणुका चौधरी पर जिस तरह के बयान प्रधानमंत्री पद पर रहते हुए नरेन्द्र मोदी ने दिए, उसके बाद कभी शहनवाज हुसैन ने क्यों नहीं कहा कि इस तरह की भाषा प्रधानमंत्री को नहीं बोलनी चाहिए।

 

 

 नोटबंदी मोदी सरकार का एक ऐसा फैसला था, जिसमें तानाशाही की गंध भरी हुई है। इससे पूरा देश प्रभावित हुआ। जाहिर है ऐसे विवादास्पद फैसले पर लोग अपनी प्रतिक्रिया देंगे और राहुल गांधी ने भी वही किया है। क्या सत्ता पर बैठी भाजपा में इतनी सहनशक्ति नहीं है कि वह अपनी आलोचना सुन सके? वैसे बात अगर राहुल गांधी की सहनशक्ति की करें तो इसकी मिसाल उन्होंने सिंगापुर में एक वार्ता के दौरान जब उनसे राजीव गांधी के कातिलों के बारे में पूछा गया, तो जवाब मिला कि उन्होंने और उनकी बहन प्रियंका ने पिता के कातिलों को माफ कर दिया है। राहुल गांधी ने कहा कि मैं ये समझने के लिए काफी दर्द से होकर गुजरा हूं। मुझे सच में किसी से नफरत करना बेहद मुश्किल लगता है। यही बात उन्होंने गुजरात चुनावों के दौरान भी कही थी। सिंगापुर के प्रतिष्ठित ली कुआन यिऊ स्कूल ऑफ पब्लिक पॉलिसी में एक चर्चा के दौरान उनसे जो सवाल किए गए, उनके जवाब भी राहुल गांधी की सहनशीलता को दिखाते हैं।

एशिया के रिबार्न के लेखक पी के बासु ने उनसे साफ-साफ लफ्जों में कहा कि जब तक देश में नेहरू-गांधी परिवार का राज रहा, तब तक देश का विकास नहीं हुआ। जबकि अनीश मिश्रा नाम के एक व्यक्ति ने कहा कि आज भारत जो कुछ है, वह जवाहरलाल नेहरू की वजह से है। इन दोनों बातों पर राहुल गांधी ने कहा कि ये जो आप देख रहे हैं, वही ध्रुवीकरण है। एक को लगता है कि कांग्रेस ने कुछ नहीं किया, दूसरे को लगता है कि कांग्रेस ने ही सब कुछ किया है। मैं बताता हूं कि सच क्या है। भारत की सफलता के पीछे भारत के लोगों का हाथ है। इसके बाद राहुल गांधी ने देश को आगे बढ़ाने में कांग्रेस के योगदान का जिक्र किया और परस्पर विरोधी विचारों को सम्मान करने की अपनी आदत का जिक्र किया। जिस तरह बर्कले में बेबाकी के साथ राहुल गांधी ने अपनी बातें रखीं थीं, वही अंदाज सिंगापुर-मलेशिया में भी दिखा। लेकिन देश में चुनाव केवल इन बातों के सहारे नहीं लड़ा जा सकता। उसके लिए कांग्रेस को अभी काफी मेहनत करनी होगी। अपनी खूबियों और खामियों का ईमानदारी से आकलन करना होगा। सबसे बड़ी बात राहुल गांधी जो राजनैतिक परिपच्ता विदेश दौरों में दिखा रहे हैं, उसे देश की आम जनता के बीच भी साबित करना होगा। तभी कांग्रेस को खोई जमीन हासिल होगी। 

Source:Agency

 

मिली जुली खबर











Visitor List

Today Visitor 392
Total Visitor 5824070

Advt

Video

Rashifal