50 फीट गहराई में 140 खंभे...फिर 60 मीटर लंबी दीवार:भोपाल बायपास से 2 महीने में ट्रैफिक शुरू करने का टारगेट

Updated on 28-11-2025 02:11 PM

फेल सिस्टम, गलत डिजाइन और जिम्मेदारों की लापरवाही से धंसे भोपाल बायपास से अगले 2 महीने में ट्रैफिक शुरू करने का टारगेट है। 50 फीट गहराई में 140 खंभे बनाए जा रहे हैं। जिस पर सीमेंट क्रांक्रीट की 60 मीटर लंबी दीवार बनेगी। पूरा काम बायपास के प्रस्तावित सिक्सलेन प्रोजेक्ट को देखते हुए हो रहा है। ताकि भविष्य में फिर से सड़क नहीं धंसे।

इधर, इस मामले के बाद मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम (MPRDC) की जीएम सोनल सिन्हा को मुख्यालय अटैच कर दिया गया है। उनकी जगह ईश्वर चंदेली को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। सड़क धंसे करीब डेढ़ महीने बीत चुके हैं।

डिजाइन के अनुसार बना रहे, 35 पीलर बन चुके इस मामले में जीएम चंदेली ने बताया कि मैनिट समेत विभागीय स्तर की जांच कमेटी ने जो डिजाइन और रिपोर्ट दी थी, उसी हिसाब से धंसे हिस्से की मरम्मत कराई जा रही है। कॉन्ट्रेक्टर को काम पूरा करने के लिए 3 महीने का वक्त दिया गया है। कुल 140 पाइल (पिलर) बनने हैं। इनमें से अब तक 35 बन चुके हैं। फिर सीमेंट क्रांक्रीट की दीवार तैयार होगी। पूरे काम को अगले 2 महीने में पूरा कर देंगे। इसके बाद यहां से ट्रैफिक शुरू कर देंगे।

तीन पोकलेन, 4 जेसीबी मशीनें काम में जुटीं सड़क की रिपेयरिंग के लिए तीन पोकलेन से 50 फीट गहरे पीलर तैयार किए जा रहे हैं। इसके लिए तीन पोकलेन, 4 जेसीबी, आधा दर्जन से ज्यादा डम्पर और 50 से ज्यादा मजदूर जुटे हुए हैं। जैसे ही सभी पीलर बनकर तैयार हो जाएंगे, सीमेंट क्रांक्रीट की मोटी वॉल तैयार होगी। इसके बाद स्लैब बनेगा और फिर ऊपरी हिस्सा ठीक किया जाएगा।

अचानक धंस गई थी सड़क, जांच में कई गड़बड़ी मिली भोपाल बायपास के कल्याणपुर के पास रेलवे ओवरब्रिज (ROB) से यह रेनफोर्स्ड अर्थ वॉल की सड़क जुड़ी है। 13 अक्टूबर 2025 को रेनफोर्स्ड अर्थ वॉल की सड़क का करीब 100 मीटर का हिस्सा 20 फीट तक गहरा धंस गया था। हालांकि, बाद में 60 फीट हिस्सा मरम्मत के दायरे में आया। इसके बाद बायपास के एक ओर से ट्रैफिक बंद हो गया। डेढ़ महीने से दूसरी तरफ से ही वाहन गुजर रहे हैं। इससे कई बार हादसे की आशंका भी बनी रहती है, क्योंकि यहां स्ट्रीट लाइट नहीं है। जिससे वाहन चालक भटक जाते हैं। इसलिए काम में तेजी लाई गई है।

बता दें कि भोपाल बायपास बीओटी यानी बिल्ट ऑपरेट और ट्रांसफर मॉडल पर बना था। आंध्र प्रदेश की कंपनी ट्रॉन्सट्राय प्राइवेट लिमिटेड ने इसे साल 2013 में बनाया था। इसकी कुल लंबाई करीब 55 किलोमीटर है। इसके एवज में कंपनी को 305 करोड़ रुपए मिले। 12 साल में कुल 650 करोड़ रुपए की टोल वसूली भी हो गई।

एक्सपर्ट के अनुसार कंपनी ने रेनफोर्स्ड अर्थ वॉल (आरई वॉल) को तकनीकी मानकों के अनुसार नहीं बनाया। इस वजह से नीचे पानी भर रहा था। वहीं, 5 से 6 साल बीत जाने के बावजूद मेंटेनेंस भी नहीं हुआ। अनुबंध की शर्तों के अनुसार कंपनी ने समय पर प्रोजेक्ट पूरा नहीं किया। इस वजह से 2020 में कॉन्ट्रेक्ट रद्द कर दिया गया था। इससे पहले भी 2017 में कंपनी ब्लैकलिस्ट की गई थी। इसके बावजूद अफसरों ने ध्यान नहीं दिया।

जीएम और एजीएम को नोटिस दिए गए थे सड़क के धंसने के बाद पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह ने जांच कमेटी बैठाई थी। जिसने 27 अक्टूबर को ही रिपोर्ट दे दी थी। रिपोर्ट मिलने के बाद MPRDC की जीएम सोनल सिन्हा और एजीएम संजीव जैन को नोटिस थमाए गए थे। सड़क धंसने के बाद दैनिक भास्कर ने अपनी इन्वेस्टिगेशन में जो गड़बड़ी बताई थीं और जिम्मेदारों के नामों का खुलासा किया था, वही जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट में शामिल किया है। जनरल मैनेजर सिन्हा और एजीएम जैन ने 4 महीने में सिर्फ एक बार ही निरीक्षण किया था। उन्हें ब्रिज के पास भरा पानी नहीं दिखा था। न ही ढाल यानी स्लोप की दरारें, उगे झाड़ियां और पेड़-पौधे हटाए गए।

कंसेशनायर मेसर्स ट्रान्सट्रॉय भोपाल बायपास प्रावि हैदराबाद और स्वतंत्र सलाहकार मेसर्स लॉयन इंजीनियरिंग सर्विसेज भोपाल को भी दोषी माना गया था। ड्रेनेज सिस्टम नहीं बनाने और अन्य लापरवाही पर दोनों ही कंपनी पर कार्रवाई की गई है। हालांकि, ट्रान्सट्रॉय कंपनी को पहले ही ब्लैक लिस्टेड किया जा चुका है। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद जीएम सिन्हा पर गाज गिरी और उन्हें मुख्यालय में अटैच कर दिया गया है। एजीएम जैन पर भी विभागीय कार्रवाई की गई।

इन्होंने की थी जांच मामले की जांच और जिम्मेदारी तय करने के लिए एमपीआरडीसी ने एक टीम बनाई थी। टीम में चीफ इंजीनियर बीएस मीणा, जनरल मैनेजर मनोज गुप्ता और आरएस चंदेल शामिल थे। उन्होंने ही जांच रिपोर्ट एमपीआरडीसी एमडी भरत यादव को गई थी। मंत्री के निर्देश के बाद अफसरों पर कार्रवाई हुई।

एनएचएआई रद्द कर चुका इसी कंपनी का ठेका आंध्र प्रदेश की कंपनी ट्रॉन्सट्राय प्राइवेट लिमिटेड का ही ठेका नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) निरस्त कर चुका है। भोपाल-ब्यावरा फोरलेन पर सिंगारचोली रेलवे ओवरब्रिज का प्रोजेक्ट 776 करोड़ रुपए का था।

इसके लिए 2012 में एग्रीमेंट हुआ था। तय समय पर काम पूरा नहीं हुआ, तो राज्य सरकार ने केंद्र को पत्र लिखकर कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने की सिफारिश की थी। औबेदुल्लागंज-बैतूल प्रोजेक्ट 2011 में 912 करोड़ रुपए की लागत से शुरू हुआ था। कंपनी ने अगस्त 2016 तक सिर्फ 1.34% काम किया। इसके बाद एनएचएआई ने 13 अक्टूबर 2016 को अनुबंध रद्द करने की प्रक्रिया शुरू की थी।



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