149 करोड़ रुपए के घोटाले का मामला:मंत्री के जांच आदेश पर अफसरों का ब्रेक

Updated on 17-03-2026 12:15 PM
भोपाल, मप्र के स्कूल शिक्षा विभाग में मेंटनेंस के नाम पर बड़ा घोटाला हुआ है, जिसकी जांच अब आईएएस अफसर व वित्त अधिकारी करेंगे। लेकिन विभाग इस जांच में रोड़ा अटका रहा है। दरअसल, यह घोटाला भारत सरकार द्वारा मप्र के स्कूलों में मेंटनेंस के लिए दी गई 149 करोड़ रुपए की राशि में हुआ है। इसको लेकर 26 फरवरी को विधानसभा में कांग्रेस ने मुद्दा उठाया था।

इसके बाद बीते मंगलवार विभागीय मंत्री उदय प्रताप सिंह ने सचिव स्कूल शिक्षा डॉ. संजय गोयल को चार बिंदुओं पर नोटशीट लिखकर भेजी। इसमें लिखा कि लोक शिक्षण संचालनालय के दो अफसर डायरेक्टर डीएस कुशवाह को माध्यमिक शिक्षा मंडल और उप संचालक पीके सिंह को राज्य शिक्षा केंद्र में भेजा जाए। सभी 55 जिलों के कलेक्टर को चिट्ठी लिखकर बीते तीन साल में हुए कामों की जांच कराई जाए।

यह भी लिखा कि बीते तीन साल में जिला और ब्लॉक शिक्षा अधिकारी द्वारा कितने कामों की डिमांड भेजी गई और कितने काम हुए हैं। वहीं इसके लिए एक जांच कमेटी बनाए, जो माशिमं के सचिव बुद्धेश वैध की अध्यक्षता में काम करेगी। इसमें वित्त का एक अफसर शामिल होगा। लेकिन अब तक माशिमं को इस बारे में कोई सूचना नहीं है। न कमेटी बन सकी और न ही जांच शुरू हुई। इस बात से मंत्री नाराज हैं। उनका कहना है कि हम इस मामले की सख्ती से जांच करवाकर कार्रवाई करेंगे।

किस अफसर के पास क्या काम

  • डीएस कुशवाह – यह भवन के डायरेक्टर हैं और इनकी स्वीकृति से ही पूरा काम हुआ है।
  • पीके सिंह – लोक शिक्षण में उपसंचालक हैं और इनके पास भवन का जिम्मा है। लोक शिक्षण की आयुक्त शिल्पा गुप्ता ने कुछ दिन के लिए सिंह से भवन का प्रभार लेकर फिर से उन्हें दे दिया।
  • राजेश मौर्य – यह वित्त अधिकारी हैं और इनकी निगरानी में ही टेंडर व भुगतान का काम होता है।

केंद्र सरकार ने दी थी 149 करोड़ रुपए की राशि

सरकारी स्कूलों की सूरत बदलने के लिए केंद्र सरकार द्वारा दी गई 149 करोड़ रुपए की राशि दी गई थी। लोक शिक्षण संचालनालय के वित्त अधिकारी राजेश मौर्य की निगरानी में टेंडर किए गए और राशि जारी की गई। मैहर और रीवा जैसे दूरस्थ जिलों में काम करने के लिए भोपाल की कंपनी को ठेका दिया गया।

मैहर के जिला शिक्षा अधिकारी ने पत्र से विभाग को बताया कि स्कूलों में जो काम स्वीकृत हुए, वे धरातल पर हुए ही नहीं और बिल जारी कर दिए गए। शिकायत के बाद जब 8 जनवरी 2026 को इस मामले की जांच रिपोर्ट आई, तो अधिकारियों के होश उड़ गए। रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि वाणी इंफ्रास्ट्रक्चर फर्म (विदिशा रोड, भोपाल) को बिना काम किए ही 23.81 लाख का भुगतान कर दिया गया।



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