
उनका कहना है कि जब तक जीवन रहेगा वे मेडिकल गाइडलाइन के अनुसार तब तक रक्तदान करते रहेंगे। उनका कहना है कि रक्दान से उन्हें कभी भी कमजोरी नही आई और न ही कभी मानसिक तनाव रहा।
वे दिन में 16 ग्लास पानी पीते है एवं खाने में सुबह और शाम 4 रोटी खाते है साथ ही ग्रामीण परिवेश में रहने के बावजूद भी किसी प्रकार के नशे का सेवन भी नहीं करते है।
इसके अलावा वे ठंड के दिनों में समाजिक सहयोग से निराश्रितों को गर्म कपड़े भी बाटते हैं। साथ ही मानसून आने में वृक्षारोपण भी करवाते है। उन्होंने अपने जन्मदिवस के अवसर पर रक्तदान के साथ अन्य सामाजिकजनों से भी अपने जीवन मे रक्तदान की अपील की है। वे अनेक जनों को इसके लिए प्रेरित भी कर रहे हैं।