3 साल में 562 वन्यजीव मरे, इनमें 9 बाघ:बलरामपुर, सूरजपुर, धमतरी, रायगढ़ और कोरबा में हाथियों की अधिक मौतें

Updated on 02-04-2026 12:36 PM
रायपुरछत्तीसगढ़ के जंगलों में वन्यजीवों की सुरक्षा पर गंभीर तस्वीर सवाल खड़े हो गए हैं। पिछले तीन वर्षों में राज्य में 9 बाघ समेत 562 वन्यजीवों की मौत हुई है। इसकी सबसे बड़ी वजह करंट और अवैध शिकार है। सड़क हादसे, पानी में डूबना और आपसी संघर्ष में भी बड़ी तादाद में वन्य पशुओं ने जान गंवाई। तीन बरसों 102 मामले अवैध शिकार के हैं। वहीं 30 मामलों में वन्यप्राणियों की मौत विद्युत करंट की वजह से हुई।

इसी अवधि में बलरामपुर, धरमजयगढ़, सूरजपुर, धमतरी, रायगढ़, बिलासपुर और कोरबा क्षेत्रों में 38 हाथियों की मौत दर्ज की गई। इनमें 13 की मौत करंट से और 10 की पानी में डूबने से हुई। जबकि अन्य मामलों में बीमारी और आपसी द्वंद जिम्मेदार रहे। लगातार बढ़ती मौतों ने वन्यजीव संरक्षण को लेकर प्रशासन की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार बढ़ती मौतों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वन्यजीव संरक्षण की वर्तमान रणनीतियों में सुधार की जरूरत है। अवैध शिकार पर कड़ी कार्रवाई, खुले बिजली तारों पर नियंत्रण, संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ाना और स्थानीय समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित करना अब बेहद जरूरी हो गया है।

2025 में अवैध शिकार के 58 मामले दर्ज

तीन साल में प्रदेश में वन्यप्राणियों की मौत के मामलों में अवैध शिकार और विद्युत करंट बड़ी वजह बनकर सामने आए हैं। दिसंबर 2023 से जनवरी 2026 के बीच कुल 102 अवैध शिकार के मामले दर्ज किए गए। इनमें दिसंबर 2023 में 3, वर्ष 2024 में 31, 2025 में 58 और जनवरी 2026 में 10 मामले शामिल हैं। दिसंबर 2023 में 1, वर्ष 2024 में 13 और 2025 में 16 वन्यजीव करंट की चपेट में आए। आंकड़े बताते हैं कि हर साल ऐसे मामलों में वृद्धि हो रही है, जो वन्यजीव संरक्षण के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही है।

सारंगढ़, कोरिया, अचानकमार और जंगल सफारी में बाघों की मौत

1 जनवरी 2024 से 31 जनवरी 2026 के बीच सारंगढ़-बिलाईगढ़, कोरिया, अचानकमार टाइगर रिजर्व, नंदनवन जू एवं सफारी नवा रायपुर समेत विभिन्न क्षेत्रों में 9 बाघों की मौत हुई। इनमें से 2 बाघों की मौत करंट से हुई। वहीं 7 बाघ कार्डियक अरेस्ट, मल्टीपल ऑर्गन फेल्योर और आपसी संघर्ष में मारे गए।

राज्य में क्यों बढ़ रहा वन्यजीवों पर खतरा?

विशेषज्ञों का कहना है कि जंगलों में निगरानी की कमी के कारण अवैध गतिविधियों पर नियंत्रण नहीं हो पा रहा है। संगठित शिकारियों के नेटवर्क आधुनिक तरीकों से वन्यजीवों को निशाना बना रहे हैं। ग्रामीण इलाकों में फसलों की सुरक्षा के लिए लगाए गए अवैध बिजली तार वन्यजीवों के लिए घातक साबित हो रहे हैं। वहीं जंगलों के आसपास सड़कों और बस्तियों का तेजी से विस्तार उनके प्राकृतिक मार्गों को बाधित कर रहा है। इसके साथ ही वनों की कटाई और मानवीय हस्तक्षेप से वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास लगातार सिमट रहा है।

हर साल बढ़ता गया आंकड़ा 

वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025 में सबसे ज्यादा 314 वन्यजीवों की मौत हुई। जनवरी 2026 में ही 27 मौतें दर्ज हो चुकी हैं। यह ट्रेंड साफ संकेत देता है कि हाल के वर्षों में वन्यजीवों पर खतरा तेजी से बढ़ा है। इसी तरह 1 से 31 दिसंबर 2023 के बीच 16 वन्यजीवों की मौत हुई, जिनमें लकड़बग्घा, जंगली सूअर, चीतल, तेंदुआ, नीलगाय, काला हिरण और चौसिंगा शामिल हैं। इनमें 8 की मौत अज्ञात वाहनों की टक्कर से, 1 की आवारा कुत्तों के हमले से और अन्य की बीमारी से हुई। अवैध शिकार और करंट मौत के कारण रहे।



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