दुर्गम पहाड़ियों में आस्था का केंद्र ‘निरई माता मंदिर’ में उमड़ा जनसैलाब

Updated on 24-03-2026 12:25 PM

धमतरी।   छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के मगरलोड विकासखंड के अंतिम छोर पर स्थित ग्राम मोहेरा में विराजित निरई माता मंदिर एक अद्वितीय आस्था स्थल के रूप में प्रसिद्ध है। घने जंगलों और दुर्गम पहाड़ियों के बीच स्थित यह मंदिर वर्ष में केवल एक बार चैत्र नवरात्रि के प्रथम रविवार को कुछ घंटों के लिए श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोला जाता है। इस अवसर पर आयोजित “माता जात्रा” में हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।

मंदिर की विशेषता यह है कि यहां माता की कोई प्रतिमा स्थापित नहीं है, बल्कि श्रद्धालु प्राकृतिक रूप से निर्मित पत्थर की गुफा में निराकार रूप में माता की पूजा करते हैं। मान्यता है कि यहां सच्चे मन से की गई प्रार्थना अवश्य पूर्ण होती है। मन्नत पूरी होने पर श्रद्धालु अपनी श्रद्धा अनुसार भेंट-प्रसाद अर्पित करते हैं। इस वर्ष धमतरी, गरियाबंद, रायपुर, बालोद सहित आसपास के जिलों तथा पड़ोसी राज्य उड़ीसा से भी लगभग 30 से 40 हजार श्रद्धालु यहां पहुंचे।

कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने  इसी माह 13 मार्च को ग्राम मोहेरा पहुंचे थे ।  उन्होंने  स्थानीय लोगों से चर्चा भी की थी । समस्याएं भी सुनी थी ।    उसी समय कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देशित किया था  कि श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मार्ग, पेयजल, स्वच्छता, अस्थायी शेड, चिकित्सा व्यवस्था एवं सुरक्षा प्रबंध सुदृढ़ किए जाएं। उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने के लिए वन विभाग के माध्यम से विशेष प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। साथ ही मंदिर तक पहुंच मार्ग के निर्माण, अतिरिक्त शेड निर्माण  का निर्माण कराया जाएगा । जिससे श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।

  उन्होंने कहा कि निरई माता क्षेत्र को आस्था के साथ-साथ इको-टूरिज्म के रूप में विकसित करने की दिशा में सतत कार्य किया जाएगा, जिससे स्थानीय ग्रामीणों को रोजगार के अवसर भी प्राप्त हों।

कलेक्टर ने  इस चैत्र नवरात्रि के इस पावन अवसर पर निरई माता मंदिर पहुंचकर दर्शन किए तथा व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने मौके पर उपस्थित श्रद्धालुओं एवं ग्रामीणों से संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं और आवश्यक व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के निर्देश दिए।

यहां प्रचलित परंपरा के अनुसार मंदिर में पूजा-अर्चना का कार्य केवल पुरुषों द्वारा किया जाता है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार महिलाओं का मंदिर में प्रवेश एवं प्रसाद ग्रहण करना निषिद्ध है, जिसका श्रद्धालु पूर्ण आस्था के साथ पालन करते हैं।

   प्रशासन द्वारा इस वर्ष के सफल आयोजन हेतु व्यापक तैयारियां की गई थीं, जिसके परिणामस्वरूप श्रद्धालुओं को सुगम एवं सुरक्षित दर्शन की सुविधा प्राप्त हुई। भविष्य में भी इस पवित्र स्थल के समुचित विकास एवं व्यवस्थाओं के सुदृढ़ीकरण हेतु निरंतर प्रयास किए जाएंगे।



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