क्रिकेट से एक कदम आगे, 'जीरो' फिर भी हीरो, धोनी की स्टोरी लीडरशिप की मिसाल है

Updated on 31-05-2023 09:03 PM
नई दिल्ली, आनंद वासू: एमएस धोनी... वह सिर्फ चैंपियन क्रिकेटर नहीं है। वह एक इमोशन हैं। उनकी पॉपुलैरिटी इतनी है कि वह देश में कहीं भी जाएं उन्हें उतना ही प्यार मिलता है। कोई भेदभाव नहीं किया जाता, न किया जाएगा। रांची में जन्मे, भारतीय क्रिकेट की भट्टियों में ढले और चेन्नई सुपर किंग्स के रंग में रंगे महेंद्र सिंह धोनी एक बार फिर सुनहरे रंग में उभरे हैं। वह गुजरात टाइटंस के खिलाफ पहली ही गेंद पर डक पर आउट हो गए, लेकिन उन्होंने वह दिया जो उनकी टीम चाहती थी- खिताब।

यह क्या अंत हो सकता था। खेल क्रूर है, इसमें यह जरूरी नहीं है कि आपको वह मिले जिसके आप हकदार हैं। जीवन कभी-कभी अधिक क्षमाशील होता है। ऐसा लग सकता है कि 5वें खिताब के साथ ही धोनी जा सकते हैं। रविंद्र जडेजा ने आखिरी दो गेंदों पर विनिंग 10 रन बनाए। जब से आईपीएल अस्तित्व में आया, तब से सीएसके धोनी था और धोनी सीएसके थे, जिसकी उन्हें जरूरत थी।
इस सीजन में धोनी को एक नई रोशनी में दिखाई। घुटने की चोट से जूझते हुए लगातार मैदान पर स्प्रिंट लगाते हुए उन्हें देखा गया। इम्पैक्ट सब्स्टीट्यूट नियम को देखते हुए उन्हें वास्तव में बल्लेबाजी करने की आवश्यकता नहीं थी। स्टंप्स के पीछे वह उस सोने की तरह हैं, जिसकी चमक कभी फीकी नहीं पड़ती। उनकी जीत इसलिए भी शानदार है और तारीफ के काबिल है, क्योंकि उनकी खिताबी जीत ने साबित की कि जरूरी नहीं है कि बेस्ट टीम के साथ ही सफलता पाया जा सकता है।

CSK के लिए रुतुराज गायकवाड़ और डेवॉन कॉन्वे ने टोन सेट किया था। गायकवाड़ हमेशा टीम की ताकत रहे और कॉन्वे ने अपनी विध्वंसक बैटिंग से कमाल कर दिया। अजिंक्य रहाणे का करियर सभी प्रारूपों में लगभग समाप्त हो गया था, लेकिन सीएसके ने उन्हें लाया। मौका दिया। जवाब में रहाणे ने लगभग 173 की स्ट्राइक रेट से 326 रन बनाते हुए टीम इंडिया की टेस्ट फॉर्मेट में वापसी की।

अंबाती रायुडू शानदार तरीके से विदा हुए। यह सीजन उनके लिए अच्छा नहीं रहा, लेकिन इसके बावजूद उन्हें मौके मिले। 16 मैचों में सिर्फ 158 रन बनाए, लेकिन जब समय आया तो उन्होंने अपनी टीम के लिए एक चौका और 2 छक्के एक ही ओवर में जड़ते हुए मैच का रुख ही मोड़ दिया।

एक और बात, उम्मीद है कि शिवम दुबे स्मार्टवॉच नहीं पहनेंगे, क्योंकि वह पूरे दिन बल्लेबाजी करने के बाद भी 10,000 कदमों की गिनती तक नहीं पहुंच पाएंगे। कम से कम इस तरह तो कतई नहीं, जिस तरह से वह बैटिंग कर रहे हैं। रन भागने से अधिक वह चौके-छक्के पर विश्वास करते हैं। उन्हें देखकर युवराज सिंह को गर्व होता होगा। मथीशा पथिराना या बेबी मलिंगा को अभी तक उनकी इंटरनेशनल टीम में वह दर्जा नहीं मिला था, जो धोनी ने दिया।

ये है सीएसके की जीत की कहानी। यह धोनी की कहानी है, चाहे आप इसे पसंद करें या न करें। एक ऐसे युग में जहां डेटा विश्लेषकों, टैलेंट स्काउट्स और अन्य विशेषज्ञों का बोलबाला है तो धोनी की सीएसके ने अभी भी टैलेंट को टटोलने में विश्वास रखा है। धोनी का सीजन सबसे आसान नहीं रहा है, क्योंकि वह जहां भी खेले हैं वह 'होम' ग्राउंड रहा है। एक सेकंड के लिए एक कदम पीछे लें और कल्पना करें कि झारखंड का लड़का जो गलती से क्रिकेटर बन गया, खड़गपुर में टिकट चेकर जो कभी रेलवे स्टेशनों पर सोता था, अब करोड़ों लोगों का हीरो है।

उम्मीदों के बोझ तले धोनी पलकें झपका सकते थे, लड़खड़ा सकते थे, टूट सकते थे, लेकिन इसके बजाय उन्होंने कुछ गहरी सांसें लीं और विश्वास बनाए रखा। धोनी के बारे में यूं ही नहीं कहा जाता है कि वह जिसे छूते हैं वह सोना बन जाता है। शायद इस समय दुनिया के सर्वश्रेष्ठ ऑलराउंडर बेन स्टोक्स हैं, जिसे सीएसके का अगला कप्तान माना जा रहा था। उन्होंने दो बार बल्लेबाजी करते हुए 15 रन बनाए। स्टोक्स की 16.5 करोड़ की नीलामी बिक्री के आधार पर प्रत्येक रन की कीमत सीएसके 180 लाख रुपये के पड़े।


मैच के बाद धोनी ने कहा कि रिटायरमेंट के लिए इससे बेहतरीन वक्त हो ही नहीं सकता, लेकिन वह ऐसा नहीं करेंगे। फैंस के प्यार को आगे बढ़ाएंगे। उनके पास फैंस को रिटर्न गिफ्ट का मौका है। कुल मिलाकर धोनी ने एक बार फिर याद दिलाया है कि नेतृत्व क्या होता है। उन्होंने नए टैलेंट को मौके दिए, टूटकर बिखर चुके खिलाड़ियों को साहस दिया और जो सम्मान के हकदार थे उन्हें शानदार विदाई। इसे ही तो कहते हैं माही वे...।

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