ईरान की अर्थव्यवस्था पर सर्जिकल स्ट्राइक! अमेरिकी नाकेबंदी से हर दिन होगा नुकसान

Updated on 14-04-2026 01:52 PM
नई दिल्ली: अमेरिका ने ईरान के साथ शांति वार्ता विफल होने पर बड़ा कदम उठाया है। अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी कर दी है। इस रास्ते से गुजरने वाले ईरानी जहाजों को रोका जा रहा है। इस नाकेबंदी के कारण ईरान को रोजाना 435 मिलियन डॉलर (करीब 4058 करोड़ रुपये) का नुकसान होने का अनुमान है। इससे ईरान की अर्थव्यवस्था की कमर टूट सकती है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार से इस नाकेबंदी की शुरुआत कर दी है। वॉल स्ट्रीट जरनल की एक रिपोर्ट के मुताबिक इसका उद्देश्य ईरान के कैश फ्लो (नकदी प्रवाह) को पूरी तरह रोककर उसे बातचीत की मेज पर लाना है। वहीं इस नाकेबंदी के चलते ईरान का ना केवल एक्सपोर्ट रुकेगा, बल्कि ईरान दूसरे देशों से आने वाले सामान पर भी असर पड़ेगा।

ईरान को कहां लगेगी बड़ी चोट?

अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के पूर्व अधिकारी मियाद मलेकी (Miad Maleki) के अनुसार, ईरान को होने वाले नुकसान का विवरण इस प्रकार है:
  • ईरान को रोजाना 435 मिलियन डॉलर (करीब 4058 करोड़ रुपये) का नुकसान होगा।
  • करीब 276 मिलियन डॉलर का नुकसान केवल कच्चे तेल और पेट्रोकेमिकल्स के निर्यात रुकने से होगा। यानी ईरान के निर्यात में गिरावट आएगी।
  • यह अनुमान इस आधार पर है कि ईरान प्रतिदिन 15 लाख बैरल तेल 87 डॉलर प्रति बैरल की कीमत पर बेचता है।
  • तेल के अलावा उर्वरक और खाद्य पदार्थों की सप्लाई रुकने से ईरान में महंगाई आसमान छू सकती है।

कमाई पर पड़ेगा असर

इस नाकेबंदी का मुख्य उद्देश्य ईरान की ऊर्जा व्यापार से होने वाली आय को पूरी तरह खत्म करना है। ईरान का लगभग 90% तेल निर्यात खर्ग द्वीप (Kharg Island) से होता है। नाकेबंदी से इस द्वीप का संपर्क कट जाएगा, जिससे बिना जमीनी सेना उतारे ईरान की कमाई रोकी जा सकती है।चीन अपनी जरूरत का लगभग 50% कच्चा तेल इसी रास्ते से मंगवाता है। ईरान की सप्लाई रुकने से चीन पर भी दबाव बढ़ेगा कि वह अमेरिका के इस अभियान में साथ दे।

ईरान ने बना रखा है प्लान-बी!

अमेरिका ने इस नाकेबंदी की घोषणा बेशक कर दी हो, लेकिन इसे बनाए रखना बेहद मुश्किल हो सकता है। वॉल स्ट्रीट के मुताबिक मिडिल ईस्ट में अमेरिका के 16 युद्धपोत हैं, लेकिन फारस की खाड़ी (Persian Gulf) के भीतर फिलहाल एक भी युद्धपोत नहीं है।
  • होर्मुज से दुनिया का 20% तेल गुजरता है। इतने बड़े समुद्री ट्रैफिक में केवल ईरानी जहाजों को चुनकर रोकना अमेरिकी नौसेना के लिए एक बड़ी लॉजिस्टिक चुनौती होगी।
  • ईरान अपने तेल निर्यात को जास्क टर्मिनल (Jask terminal) की ओर मोड़ने की कोशिश कर सकता है, जो होर्मुज के नाकेबंदी वाले दायरे से बाहर है।
  • इसके अलावा, केप्लर के डेटा के मुताबिक ईरान के पास समुद्र में पहले से ही 15.4 करोड़ बैरल तेल तैरते हुए भंडार के रूप में मौजूद है, जो उसे शुरुआती झटकों से बचा सकता है।

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