अरुणाचल प्रदेश पर चीन को बड़ा झटका देने जा रहा अमेरिका, सीनेटे दे सकती है भारत को खुशखबरी

Updated on 22-06-2023 07:33 PM
वॉशिंगटन: अमेरिका अरुणाचल प्रदेश पर चीन को बड़ा झटका देने जा रहा है। अमेरिकी सीनेट की एक शक्तिशाली समिति बुधवार को एक द्विदलीय प्रस्ताव पर विचार करेगी, जिसमें अरुणाचल प्रदेश को भारत के अभिन्न हिस्से के रूप में मान्यता देने का प्रावधान किया गया है। यह विधेयक सैन्य आक्रामकता के जरिये वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर यथास्थिति बदलने की चीन की कोशिशों के बीच लाया गया है। विदेशी संबंध मामलों की सीनेट समिति इस प्रस्ताव पर उस दिन चर्चा करेगी, जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तीन दिन की आधिकारिक राजकीय यात्रा पर वॉशिंगटन पहुंचेंगे।

प्रस्ताव में एलएसी पर यथास्थिति बदलने के लिए सैन्य बल का इस्तेमाल करने समेत चीन की विभिन्न उकसावे भरी कार्रवाइयों की निंदा की गई है। इसमें विवादित क्षेत्रों में गांव बसाने, भारतीय राज्य अरुणाचल प्रदेश के शहरों और संरचनाओं के मंदारिन-भाषी नाम वाले मानचित्र प्रकाशित करने तथा भूटान के क्षेत्रों पर दावा जताने के लिए चीन की आलोचना की गई है। डेमोक्रेट सीनेटर जेफ मर्कले और रिपब्लिकन नेता बिल हैगर्टी ने इस साल फरवरी में यह प्रस्ताव पेश किया था।

भारत की संप्रभुता और अखंडता का समर्थन किया

‘इंडिया कॉकस’ के सह-अध्यक्ष सीनेटर जॉन कॉर्निन ने इस प्रस्ताव को सह-प्रायोजित किया है। प्रस्ताव में इस बात का उल्लेख किया गया है कि भारत ने खुद को चीन की आक्रामकता और सुरक्षा खतरों से बचाने के लिए अपने दूरसंचार बुनियादी ढांचे को सुरक्षित करने और निवेश की गहन निगरानी करने सहित विभिन्न कदम उठाए हैं। इसमें अरुणाचल प्रदेश को सर्वसम्मति से भारतीय गणराज्य के अभिन्न हिस्से के रूप में मान्यता दी गई है। साथ ही भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का समर्थन किया गया है।

चीन अरुणाचल प्रदेश को जंगनान कहता है। वह इस भारतीय राज्य के दक्षिण तिब्बत होने का दावा करता है। हालांकि, भारत का विदेश मंत्रालय चीन के इस दावे को दृढ़ता से खारिज करते हुए स्पष्ट करता आया है कि अरुणाचल प्रदेश ‘भारत का अभिन्न हिस्सा’ है। अरुणाचल प्रदेश पर अपने दावे के समर्थन में चीन शीर्ष भारतीय नेताओं और अधिकारियों के राज्य के दौरे का नियमित विरोध करता है।

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