भारत-पाकिस्तान तनाव के बीच वर्ल्ड बैंक ने दी गुड न्यूज, 10 साल में कितनी घटी देश की गरीबी

Updated on 26-04-2025 01:50 PM
नई दिल्ली: भारत ने पिछले दस साल में गरीबी को कम करने में बड़ी सफलता हासिल की है। वर्ल्ड बैंक की एक रिपोर्ट में यह बात सामने आई है। शुक्रवार को जारी इस रिपोर्ट के अनुसार 2011-12 में देश में अत्यधिक गरीबी 16.2% थी। अत्यधिक गरीब का मतलब ऐसे लोगों से है जिनका रोजाना खर्च 2.15 डॉलर (करीब 180 रुपये) से भी कम है। विश्व बैंक के मुताबिक 2022-23 में देश में ऐसे लोगों की आबादी घटकर 2.3% पर आ गई। इस दौरान 17.1 करोड़ लोग गरीबी रेखा से ऊपर उठे हैं। गांवों में अत्यधिक गरीबी 18.4% से घटकर 2.8% रह गई। इसी तरह शहरों में यह आंकड़ा 10.7% से घटकर 1.1% रह गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक गांवों और शहरों के बीच गरीबी का अंतर भी कम हुआ है। यह अंतर 7.7% से घटकर 1.7% रह गया है। यानी गरीबी में हर साल 16% की गिरावट आई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत अब निम्न-मध्यम आय वाले देशों की श्रेणी में आ गया है। इसका मतलब है कि भारत की अर्थव्यवस्था पहले से बेहतर हुई है। रिपोर्ट के अनुसार अगर हम प्रतिदिन $3.65 (लगभग 300 रुपये) की आय को गरीबी रेखा मानें तो भारत में गरीबी 61.8% से घटकर 28.1% हो गई है। इस तरह 37.8 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आ गए हैं।

किन राज्यों में है सबसे ज्यादा गरीबी

गांवों में गरीबी 69% से घटकर 32.5% हो गई है। शहरों में यह 43.5% से घटकर 17.2% हो गई है। गांवों और शहरों के बीच गरीबी का अंतर 25% से घटकर 15% रह गया है। यानी, गरीबी में हर साल 7% की कमी आई है। सबसे ज्यादा आबादी वाले पांच राज्य उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार, पश्चिम बंगाल और मध्य प्रदेश में 2011-12 में देश के 65% गरीब लोग रहते थे। इन राज्यों ने 2022-23 तक गरीबी को कम करने में दो-तिहाई योगदान दिया है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि इन राज्यों में भारत के 54% गरीब (2022-23) और 51% बहुआयामी रूप से गरीब (2019-21) लोग रहते हैं। बहुआयामी गरीबी सूचकांक (MPI) के अनुसार गैर-मौद्रिक गरीबी 2005-06 में 53.8% थी, जो 2019-21 तक घटकर 16.4% हो गई। MPI का मतलब है कि गरीबी को सिर्फ आय से नहीं बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य और जीवन स्तर जैसे अन्य पहलुओं से भी मापा जाता है।

शहरों को पलायन

2022-23 में वर्ल्ड बैंक का बहुआयामी गरीबी माप 15.5% है। भारत का उपभोग-आधारित गिनी इंडेक्स 2011-12 में 28.8 था, जो 2022-23 में सुधरकर 25.5 हो गया। गिनी इंडेक्स बताता है कि देश में आय का वितरण कितना समान है। अगर यह कम है तो इसका मतलब है कि आय का वितरण अधिक समान है। हालांकि रिपोर्ट में कहा गया है कि डेटा की कमी के कारण असमानता को कम करके आंका जा सकता है। इसके विपरीत, वर्ल्ड इनइक्वलिटी डेटाबेस दिखाता है कि आय असमानता 2004 में 52 के गिनी से बढ़कर 2023 में 62 हो गई है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 2021-22 से रोजगार में वृद्धि कामकाजी उम्र की आबादी से अधिक रही है। रोजगार दर खासकर महिलाओं में बढ़ रही है। शहरी बेरोजगारी Q1 FY24/25 में 6.6% पर आ गई, जो 2017-18 के बाद सबसे कम है। हाल के आंकड़ों से पता चलता है कि 2018-19 के बाद पहली बार पुरुष श्रमिक गांवों से शहरों की ओर जा रहे हैं, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि में महिला रोजगार बढ़ा है। रिपोर्ट में कहा गया है। इसका मतलब है कि शहरों में रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं और महिलाओं को गांवों में कृषि में अधिक काम मिल रहा है।

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