बाजार में बिक रहे विदेशी FMCG प्रॉडक्ट भी सुरक्षित नहीं? शातिर ऐसे दे रहे हैं आपको धोखा

Updated on 25-12-2025 01:11 PM
नई दिल्ली: रुबीना का बचपन दिल्ली के पॉश साउथ एक्सटेंशन में बीता है। इन दिनों वह एक मल्टीनेशनल कंपनी में अच्छे ओहदे पर काम कर रही हैं और गुड़गांव के डीएलएफ सबसिटी में रहती हैं। बचपन से ही वह आईएनए मार्केट में खरीदारी करती रही हैं इसलिए जब भी मौका मिलता है वह वहां पहुंच जाती है। आईएनए मार्केट आती हैं वह क्वालिटी प्रोडक्ट के लिए जो कि सामान्य बाजार से महंगी लेकिन बेहद उम्दा होती है। वहीं से वह अमेरिका, यूके या अन्य यूरोपीय देशों में बने चॉकलेट, बिस्कुट, वेफर्स और अन्य एफएमसीजी गुड्स भी खरीदती हैं। इस सप्ताह उसके नजर से दिल्ली पुलिस के एक छापे की खबर पढ़ी तो अवाक रह गईं। उन्होंने तुरंत अपने घर से तमाम विदेशी प्रोडक्ट को निकाल बाहर किया। आइए जानते हैं ऐसा क्यों हुआ।

दिल्ली में पकड़ाया रैकेट

हमारे सहयोगी टाइम्स ऑफ इंडिया ने दिल्ली पुलिस के हवाले से पिछले दिनों एक खबर छापी है। यह खबर है अमेरिका, यूके या यूरोपीय देशों में बने लेकिन एक्सपायर्ड (समाप्त हो चुकी तारीख वाले) फूड प्रॉडक्ट की बिक्री करने वाले रैकेट के बारे में। यह रैकेट विदेशों से एक्सपायर्ड या नियर टू एक्सपायर्ड फूड प्रोडक्ट मंगवाता था। उस पर प्रिंटेड एक्सपायरी डेट को थिनर से साफ कर नए सिरे से डेट प्रिंट किया जाता था। उसके बाद उसे बिल्कुल ताज़ा बताकर अमीर-उमरा के बाज़ारों में बेचा जाता था। पुलिस की इस कार्रवाई में भारी मात्रा में सामान जब्त किया गया और कई लोगों को गिरफ्तार भी किया गया है।

यह था तरीका

दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने पिछले दिनों दिल्ली के सबसे पुराने होलसेल मार्केट सदर बाज़ार के पहाड़ी धीरज और फैज़ गंज जैसे इलाकों में छापेमारी की थी। ये इलाके बड़े-बड़े गोदामों के लिए जाने जाते हैं। वहां भारी मात्रा में खाने-पीने का सामान रखा जाता है। इस छापेमारी के दौरान पुलिस को भारी मात्रा में एक्सपायर्ड खाने-पीने का सामान मिला। इन सामानों के पैकेट पर प्रिंटेड एक्सपायरी डेट को साफ कर नए सिरे से डेट डाला जा रहा था। ये इतने शातिर हैं कि पैकेटों पर नकली बारकोड भी डाले जा रहे थे।

करोड़ों का माल पकड़ाया

इस छापेमारी में पुलिस ने करीब 4.3 करोड़ रुपये के एक्सपायर्ड खाने-पीने के सामान जब्त किया। इस जब्त किए गए सामान में 43,762 किलोग्राम फूड मैटेरियल और 14,665 लीटर बीवरेज शामिल थे। जब्त किए गए सामानों में चॉकलेट, बिस्कुट, वेफर्स, कैंडी और चिप्स जैसी चीजें थीं, जिनका वज़न 6,047 किलोग्राम था। इसके अलावा, सॉस, केचप, सिरका और मेयोनीज़ जैसी चीजें भी बड़ी मात्रा में मिलीं, जिनका वज़न 23,050 किलोग्राम था। साथ ही, करीब 14,000 लीटर एक्सपायर्ड कोल्ड ड्रिंक्स भी जब्त की गईं। जांचकर्ताओं के अनुसार, ये सभी उत्पाद अपनी एक्सपायरी डेट पार कर चुके थे, लेकिन इन्हें फिर से बेचने की तैयारी की जा रही थी

कहां से आते हैं ऐसे सामान

जांच में पता चला कि ये शातिर मुंबई के एजेंटों के ज़रिए कम कीमत पर नियर टू एक्सपायरी डेट के या एक्सपायर्ड हो चुके खाने-पीने के सामान खरीदता था। मुंबई में यह सामान यूनाइटेड किंगडम (UK), यूनाइटेड स्टेट्स (US) और दुबई जैसे देशों से मंगवाया जाता है। जहाज से सामान भारत लाने के बाद मुंबई या दिल्ली जैसे बड़े शहरों में इन प्रोडक्ट्स पर एक्सपायरी डेट बदला जाता था और फिर इन्हें देश भर के बाजारों में भेजा जाता था।

क्यों मंगवाते हैं विदेशों से एक्सपायर्ड सामान

एफएमसीजी सेक्टर के जानकार बताते हैं कि अमेरिका, यूके या अन्य यूरोपीय देशों में बने फूड मैटेरियल क्वालिटी के मामले में भारत में बने सामानों से बेहतर माने जाते हैं। हालांकि विदेशों में बने सामानों की कीमत मेड इन इंडिया समानों के मुकाबले काफी ज्यादा होते हैं। तब भी कुछ ग्राहक इन प्रोडक्ट को भारत में बन सामनों के मुकाबले तवज्जो देते हैं। यही वजह है कि शातिर कारोबारी विदेशों से नियर टू एक्सपायरी या एक्सपायर्ड प्रोडक्ट बेहद सस्ते में खरीद लेते हैं। भारत में आयात करते समय कस्टम के समक्ष इन्हें एक्सपायर्ड सामान बता कर कस्टम ड्यूटी में भी रियायत ले ली जाती है। जबकि भारतीय बाजार में यह काफी ऊंची कीमत पर बेची जाती है। मतलब कि छप्पड़ फाड़ मुनाफा।

स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़

ये शातिर चॉकलेट, कैंडी, चिप्स, कोल्ड ड्रिंक जैसे सामान बेचते थे जो कि बड़ों से ज्यादा बच्चे खाते हैं। लोग इन सामानों को यह सोच कर खरीद रहे थे कि ये तो विदेशों में बने हैं तो भारत में बने प्रोडक्ट के मुकाबले बेहतर होंगे। लेकिन उन्हें क्या पता कि ये तो एक्सपायर्ड हैं। मतलब कि इन वस्तुओं का उपभोग करना मतलब स्वास्थ्य के साथ गंभीर खिलवाड़ है।

एफएमसीजी क्या है

एफएमसीजी (FMCG) का फुल फॉर्म होता है फास्ट-मूविंग कंज्यूमर गुड्स (Fast-Moving Consumer Goods)। यानी ऐसी रोज़मर्रा की ज़रूरत की चीज़ें जो कम कीमत पर और बहुत जल्दी बिकती हैं। इनमें पैकेज्ड फूड, बीवरेज, साबुन, शैम्पू, डिटर्जेंट और अन्य घरेलू सामान आते हैं। इनकी शेल्फ लाइफ कम होती है और जिनकी मांग लगातार बनी रहती है। ये सामान किसी भी अर्थव्यवस्था का एक बड़ा और महत्वपूर्ण क्षेत्र है। यह बड़े पैमाने पर बिक्री और वितरण नेटवर्क पर चलता है।

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