जीर्ण एवं कष्टसाध्य रोगों में आयुर्वेदिक पंचकर्म से नई उम्मीद

Updated on 13-02-2026 11:50 AM

कोरबा। आयुष विभाग अंतर्गत स्पेशलाइज्ड थेरेपी सेंटर, सह संस्था सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कटघोरा में राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत राष्ट्रीय संधिवात कार्यक्रम के अंतर्गत संधिवात, अस्थिगतवात, वातरक्त, अवबाहुक जैसे जीर्ण एवं कष्टसाध्य रोगों का आयुर्वेदिक पंचकर्म चिकित्सा पद्धति द्वारा प्रभावी उपचार किया जा रहा है। आधुनिक जीवनशैली, खान-पान की अनियमितता और शारीरिक गतिविधियों में कमी के कारण कम आयु में भी अस्थि-संधिगतवात रोगों की संख्या बढ़ती जा रही है, जो अत्यंत चिंताजनक है। इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए केंद्र में पंचकर्म चिकित्सा के माध्यम से जनकल्याणकारी पहल संचालित की जा रही है।

इस प्रयास का मूल उद्देश्य आमजन को आयुर्वेदिक पंचकर्म चिकित्सा पद्धति की सुरक्षित और प्रभावी भूमिका से अवगत कराना है। अस्थि-संधिगतवात रोगों की प्रारंभिक जांच के माध्यम से इनकी समय पर पहचान सुनिश्चित की जा रही है तथा पंचकर्म चिकित्सा के क्षेत्र में आयुष प्रणाली की क्षमता को जनसामान्य के समक्ष दृढ़ता से स्थापित किया जा रहा है।

कार्यक्रम का स्वरूप

स्पेशलाइज्ड थेरेपी सेंटर कटघोरा में रोगियों की विस्तृत जांच, परामर्श और मार्गदर्शन प्रदान किया गया। पंचकर्म चिकित्सा के अंतर्गत स्नेहन, स्वेदन, कटिबस्ती, जानूबस्ती, मात्रावस्ति, नस्य, विरेचन और शिरोधारा जैसी पारंपरिक प्रक्रियाओं के माध्यम से अनेक जीर्ण एवं कष्टसाध्य रोगों का सफल उपचार किया गया। उपचार प्रक्रियाओं में रोगियों को राहत, सहजता और दीर्घकालिक लाभ प्राप्त हुए।

पंचकर्म चिकित्सा अंतर्गत विगत वर्ष कुल 5399 पंचकर्म प्रक्रियाओं का सफलतापूर्वक निष्पादन किया गया। उपचार प्राप्त करने वाले रोगियों में पंचकर्म उपरांत शीघ्र स्वास्थ्य लाभ, पुनरावृत्ति में कमी और उच्च संतुष्टि देखने को मिली। क्षेत्र में आयुर्वेदिक पंचकर्म चिकित्सा के प्रति जनविश्वास में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और लोग इसका लाभ लेने के लिए अधिक संख्या में केंद्र पहुंच रहे हैं। उपचार से लाभ हासिल करने वाली

शुकवारा बाई, उम्र 52 वर्ष ने बताया कि वह दोनों घुटनों में अत्यधिक दर्द से पीड़ित थीं और चिकित्सकों द्वारा उन्हें ऑपरेशन की सलाह तक दे दी गई थी। स्पेशलाइज्ड थेरेपी सेंटर कटघोरा में उन्होंने पंचकर्म चिकित्सा के अंतर्गत अभ्यंग, नाड़ी स्वेदन और जानूबस्ती की प्रक्रियाएं लीं। लगभग एक माह के उपचार के बाद उन्हें आशातीत राहत मिली। घुटनों के दर्द में भारी कमी आई, चलने-फिरने में सहजता बढ़ी और उन्हें ऑपरेशन की आवश्यकता नहीं रह गई। आज वे सामान्य जीवनशैली के साथ अपनी दैनिक गतिविधियों को आरामपूर्वक पूरा कर पा रही हैं और पंचकर्म चिकित्सा को अपने लिए जीवनदायी मानती हैं।

स्पेशलाइज्ड थेरेपी सेंटर कटघोरा में आयुर्वेदिक पंचकर्म चिकित्सा जीर्ण और कष्टसाध्य रोगों में अत्यंत प्रभावी सिद्ध हो रही है। इस चिकित्सा पद्धति ने अनेक रोगियों को राहत प्रदान की है और कई मामलों में शल्य क्रिया की आवश्यकता भी समाप्त कर दी है। इस पहल से न केवल स्वास्थ्य लाभ बढ़ा है, बल्कि आयुर्वेदिक चिकित्सा प्रणाली के प्रति लोगों का विश्वास भी उल्लेखनीय रूप से मजबूत हुआ है।


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