बांग्लादेश डूबने की कगार पर! बैंक कर्ज नहीं चुका पा रहे, शेयर मार्केट धड़ाम, खतरे में देश की अर्थव्यवस्था

Updated on 24-09-2025 03:23 PM
नई दिल्ली: पड़ोसी देश बांग्लादेश इस समय बहुत बड़ी आर्थिक परेशानी से जूझ रहा है। ढाका ट्रिब्यून में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार, देश के बैंकों ने जो लोन दिए थे, वो बड़ी मात्रा में वापस नहीं आ रहे हैं। इससे बैंकों को भारी नुकसान हो रहा है। जो गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थान हैं, वो भी लगभग डूबने की कगार पर हैं। शेयर बाजार में लिस्टेड बहुत सी कंपनियों के शेयर की कीमत भी बहुत कम हो गई है, वो भी फेस वैल्यू से नीचे ट्रेड कर रहे हैं।

रिपोर्ट में बताया गया है कि लोन वापस न आने, नियमों का कमजोर होना, राजनीतिक दबाव, भ्रष्टाचार और बेकार कंपनियों के हावी होने की वजह से देश की अर्थव्यवस्था खतरे में है। एशियाई विकास बैंक (ADB) ने हाल ही में कहा है कि बांग्लादेश में सबसे ज्यादा लोन डिफॉल्ट हो रहे हैं, यानी लोग लोन लेकर वापस नहीं कर रहे हैं

4 लाख करोड़ से ज्यादा के लोन वापस नहीं

बांग्लादेश बैंक के अनुसार, जून के अंत तक बैंकों के लगभग 6 लाख करोड़ टका (बांग्लादेशी मुद्रा) (करीब 4.37 लाख करोड़ रुपये) के लोन वापस नहीं आए हैं। इसके अलावा, 3.18 लाख करोड़ टका के और भी लोन हैं जिनके बारे में अभी तक पता नहीं चला है, लेकिन जल्द ही उनका भी खुलासा हो जाएगा।

इस मुश्किल स्थिति में, सरकार ने बैंकिंग कंपनी अधिनियम में 'जानबूझकर लोन न चुकाने वाले' की परिभाषा को हटाने का प्रस्ताव रखा है। सरकार का कहना है कि ऐसे लोगों की पहचान करना मुश्किल है और यह सही नहीं है। लेकिन साल 2023 के कानून के अनुसार, हर बैंक को ऐसे लोगों की लिस्ट बनानी थी और उसे सेंट्रल बैंक को देनी थी। साल 2024 में, देश में दिए गए कुल लोन का 20.2 प्रतिशत वापस नहीं आया। यह पिछले साल से 28 प्रतिशत ज्यादा है। ADB ने बांग्लादेश के बैंकिंग सिस्टम को एशिया में 'सबसे कमजोर' बताया है।

क्या खत्म होगी यह समस्या?

साउथ एशियन नेटवर्क ऑन इकोनॉमिक मॉडलिंग (SANEM) के कार्यकारी निदेशक सेलिम रिहान ने कहा कि यह समस्या तब तक हल नहीं होगी जब तक राजनीतिक हस्तक्षेप बंद नहीं हो जाता और न्यायपालिका को मजबूत नहीं किया जाता। यानी जब तक नेता लोग बैंकों के काम में दखल देना बंद नहीं करते और अदालतें सही फैसले नहीं देतीं, तब तक यह समस्या बनी रहेगी

सरकारी बैंकों की भी हालत खराब

सरकारी बैंकों की हालत भी खराब है। उनसे लोन की वसूली लगभग बंद हो गई है। इस साल के पहले छह महीनों में, टॉप 20 लोन न चुकाने वालों पर 31,908 करोड़ टका बकाया था, जिसमें से केवल 219 करोड़ टका ही वापस मिल पाए। बैंकिंग सेक्टर में परेशानी की वजह से गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थानों पर भी असर पड़ रहा है। यहां तो स्थिति और भी खराब है।
बांग्लादेश बैंक के अनुसार, 20 गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थानों के 21,462 करोड़ टका के लोन वापस नहीं आए हैं। यह उनकी लोन पोर्टफोलियो का 83 प्रतिशत है। सेंट्रल बैंक ने इनमें से नौ संस्थानों को बंद करने की सिफारिश की है। जानकारों का कहना है कि यह सेक्टर लगभग दिवालिया हो चुका है। बहुत से संस्थान जमाकर्ताओं को पैसे वापस नहीं कर पा रहे हैं, जिससे लोगों का भरोसा टूट रहा है। सेंट्रल बैंक के अधिकारियों का कहना है कि अगर जमाकर्ताओं को बचाने के लिए तुरंत कदम नहीं उठाए गए तो यह सेक्टर पूरी तरह से डूब सकता है।

शेयर बाजार भी धड़ाम

शेयर बाजार भी लंबे समय से दबाव में है। पिछले 16 सालों में, बाजार लगभग 38 प्रतिशत तक गिर गया है। महंगाई को ध्यान में रखें तो निवेशकों को हर साल औसतन 3 प्रतिशत का नुकसान हुआ है। ढाका स्टॉक एक्सचेंज (DSE) के अनुसार, लिस्टेड 397 कंपनियों में से 98 के शेयर अब 10 टका के फेस वैल्यू से भी कम पर बिक रहे हैं। इनमें से आधे से ज्यादा की कीमत 5 टका से भी कम है।

बुधवार को ढाका स्टॉक एक्सचेंज (DSEX) में मामूली बढ़त आई। पिछले एक साल में इसमें 6 फीसदी की गिरावट आई है। DSE ब्रोकर्स एसोसिएशन ऑफ बांग्लादेश के अध्यक्ष सैफुल इस्लाम ने कहा कि शेयर बाजार में बहुत सारे बेकार शेयर होने से विदेशी और संस्थागत निवेशक निराश हो रहे हैं। उनका कहना है कि जो कंपनियां ठीक से काम नहीं कर रही हैं, उन्हें बंद कर देना चाहिए या दूसरी कंपनियों में मिला देना चाहिए, और अच्छी कंपनियों को शेयर बाजार में लाना चाहिए ताकि लोग उनमें पैसा लगा सकें।

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