बैंकों के 'डार्क पैटर्न' खेल से ग्राहक परेशान, RBI ने लिया एक्शन, जुलाई तक हटाने का निर्देश

Updated on 26-02-2026 11:54 AM
नई दिल्ली: देश में जिस तरह से डिजिटल बैंकिंग की सर्विस बढ़ रही है, ग्राहकों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर सबसे ज्यादा परेशानी ग्राहकों को गुमराह करने वाले तरीकों यानी ‘ डार्क पैटर्न ’ से हो रही है। लोकलसर्कल्स (LocalCircles) के सर्वे के मुताबिक ग्राहकों ने ऑनलाइन बैंकिंग प्लेटफॉर्म पर 8 अलग-अलग तरह के डार्क पैटर्न्स की शिकायत की है। रिजर्व बैंक ( RBI ) इन शिकायतों को लेकर गंभीर हुआ है। आरबीआई ने बैंकों को जुलाई 2026 तक अपने सभी डिजिटल प्लेटफॉर्म ‘डार्क पैटर्न मुक्त’ बनाने का निर्देश दिया है।लोकलसर्कल्स के सर्वे के अनुसार, तीन तरीके सबसे ज्यादा इस्तेमाल हो रहे हैं। इनमें पहला तरीका ड्रिप प्राइसिंग यानी छिपे हुए चार्ज को लेकर है। इसमें शुरुआत में कम शुल्क दिखाकर अंत में अतिरिक्त फीस जोड़ दी जाती है। दूसरा तरीका बास्केट स्नीकिंग यानी बिना बताए कुछ जोड़ देना है। इस तरीके में बैंक ग्राहक की जानकारी के बिना अतिरिक्त प्रोडक्ट या सर्विस जोड़ देते हैं। तीसरा तरीका फोर्स्ड एक्शन है। यह सबसे आम है। इसमें किसी जरूरी सर्विस के लिए दूसरी सर्विस को अनिवार्य बताया जाता है। जैसे एफडी कराने पर क्रेडिट कार्ड अनिवार्य करना। हर दो में से एक ग्राहक ने स्वीकार किया कि उसे इन तरीकों का सामना करना पड़ा है।

चार्जेस पर कितना धोखा?

  • 22% ग्राहकों ने कहा कि उन्हें बहुत-बार छिपे हुए चार्ज का सामना करना पड़ा।
  • 42% ने कहा कभी-कभी ऐसा होता है।
  • 30% ने कहा कि उन्हें कभी ऐसा अनुभव नहीं हुआ।

गुमराह करने वाली भाषा का खेल

  • 13% ग्राहकों ने कहा कि वे बहुत बार गुमराह हुए।
  • 32% ने कहा कभी-कभी ऐसा हुआ।
  • 18% ग्राहकों ने माना कि शायद ही कभी।
  • 31% ने कहा कि उन्हें कभी समस्या नहीं हुई।

ग्राहकों की सबसे बड़ी परेशानियां

  • 64% ग्राहकों ने कहा कि वे छिपे हुए चार्ज से परेशान हुए।
  • 57% ग्राहकों ने बताया कि वे बिना सहमति के एक्स्ट्रा चार्ज के शिकार हुए।
  • 51% ग्राहकों ने कहा कि वे जबरन दूसरी सर्विस लेने पर मजबूर हुए।
  • 46% ग्राहकों ने बताया कि वे बार-बार आने वाले नोटिफिकेशन (Nagging) से परेशान हैं।

RBI का ग्राहकों के हित में बड़ा कदम

रिजर्व बैंक का मानना है कि डिजिटल बैंकिंग में पारदर्शिता और निष्पक्षता अनिवार्य है। जुलाई 2026 तक बैंकों को अपने ऐप, वेबसाइट और डिजिटल इंटरफेस से ऐसे सभी भ्रामक डिजाइन और प्रक्रियाएं हटानी होंगी, जो ग्राहक को गुमराह करें या उसकी स्पष्ट सहमति के बिना शुल्क लगाएं। रिजर्व बैंक का यह फैसला पूरी तरह ग्राहकों के हक में है। हालांकि, कई बैंक अब भी पुराने और धीमे सिस्टम पर काम कर रहे हैं, जहां यूजर एक्सपीरियंस और पारदर्शिता पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता।

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