MP में दवाओं पर बारकोड और QR कोड जरूरी:सरकारी अस्पतालों में नई व्यवस्था; नकली दवाओं की सप्लाई पर लगेगी रोक

Updated on 28-10-2025 03:31 PM

मध्यप्रदेश के सरकारी अस्पतालों में अब नकली दवाओं पर रोक लगाने की तैयारी है। सरकार ने दवा आपूर्ति में पारदर्शिता लाने के लिए नई व्यवस्था लागू की है। इसके तहत अब राज्य के सरकारी अस्पतालों में सप्लाई होने वाली एसेंशियल ड्रग लिस्ट (EDL) में शामिल दवा की पैकिंग पर बारकोड या क्यूआर कोड अनिवार्य होगा।

इससे मरीज, डॉक्टर और अस्पताल यह जांच सकेंगे कि दवा असली है या नकली। यह कदम इसलिए अहम है क्योंकि प्रदेश में हर साल लगभग 10 हजार करोड़ रुपए का दवा कारोबार होता है और इसमें एक प्रतिशत से भी कम नकली दवाएं मिलने के बावजूद मरीजों की सुरक्षा पर बड़ा खतरा बना हुआ है।

अब कोई भी दवा बिना बारकोड के सरकारी अस्पतालों में सप्लाई नहीं की जा सकेगी।

MPPHC ने लागू की नई व्यवस्था मध्यप्रदेश पब्लिक हेल्थ सर्विस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (MPPHC) ने राज्य के सरकारी अस्पतालों में सप्लाई होने वाली दवाओं के लिए नई शर्तें जारी की हैं। अब जो भी कंपनी दवाएं सप्लाई करेगी, उसे पैकिंग पर QR कोड और बारकोड अनिवार्य रूप से देना होगा।

इस कोड को स्कैन करते ही दवा का नाम, निर्माण कंपनी, निर्माण तिथि, बैच नंबर, लाइसेंस डिटेल और एक्सपायरी डेट की पूरी जानकारी तुरंत मोबाइल पर दिखाई देगी। यह व्यवस्था फिलहाल करीब 500 से ज्यादा जरूरी (Essential) दवाओं पर लागू की जा रही है।

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, यह सिस्टम आने वाले समय में प्रदेश के सभी अस्पतालों और दवा आपूर्ति केंद्रों में लागू किया जाएगा।

नकली दवा पर लगाम लगाने की कोशिश प्रदेश में नकली दवाओं का कारोबार कम होने के बावजूद इसका असर बड़ा है। कुछ फार्मा गिरोह असली ब्रांड की तरह पैकिंग बनाकर ई-फार्मेसी और ऑनलाइन माध्यम से दवाएं बेच रहे हैं। बारकोडिंग से यह खेल खत्म होगा, क्योंकि अब अस्पताल स्तर पर भी दवा की पैकेजिंग स्कैन कर जांची जा सकेगी।

एक्सपर्ट के अनुसार, अब तक राज्य में मिलने वाली करीब 1% दवाएं नकली या गलत पैकिंग में पाई गई हैं। ऐसे में बारकोडिंग व्यवस्था मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ मेडिकल स्टोर्स और अस्पतालों की जवाबदेही भी तय करेगी।

पुरानी दवाएं रहेंगी वैध सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन दवाओं की पैकिंग पहले से बिना बारकोड के मौजूद हैं, उन्हें निर्धारित अवधि तक उपयोग किया जा सकेगा। इसके बाद सभी पुरानी दवाओं को चरणबद्ध तरीके से बाजार से हटाया जाएगा।

सरकारी अस्पतालों के लिए नई व्यवस्था राज्य सरकार का लक्ष्य है कि अगले वित्तीय वर्ष से पहले सभी जिलों के जिला अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों और स्वास्थ्य केंद्रों में यह सिस्टम लागू कर दिया जाए। इसके लिए फार्मा कंपनियों और सप्लायरों को पहले ही नोटिस भेज दिया गया है।



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