भारत संग दोस्‍ती से पहले तालिबान ने बाजवा से ली थी मंजूरी, पाकिस्‍तान ने 'लालच' में दिया साथ, दावा

Updated on 26-04-2023 06:40 PM
काबुल: अफगानिस्‍तान में तालिबान के सत्‍ता में आने के बाद भारत के साथ रिश्‍ते अब एक बार फिर से सुधरते दिख रहे हैं। भारत ने अपने दूतावास के एक दल को फिर से काबुल भेज दिया है। यही नहीं भारत ने अफगानिस्‍तान को कई टन गेहूं भेजा है। इसके अलावा भारत फिर से अफगानिस्‍तान को मानवीय मदद दे रहा है। इस बीच अफगानिस्‍तान पर आई एक ताजा किताब में दावा किया गया है कि तालिबान ने भारत के साथ रिश्‍ते सुधारने को लेकर बड़ा दावा किया गया है। इसमें कहा गया है कि भारतीय राजनयिकों को फिर से बुलाने से पहले तालिबान ने पाकिस्‍तान के तत्‍कालीन आर्मी चीफ जनरल कमर जावेद बाजवा के साथ बैठक की थी।

किताब 'द रिटर्न ऑफ द तालिबान' के लेखक हसन अब्‍बास हैं जो वॉशिंगटन में पढ़ाते हैं। पाकिस्‍तानी अखबार डॉन ने वॉशिंगटन में स्थित वरिष्‍ठ शोधकर्ता मार्विन जी वेइनबौम के हवाले से कहा कि तालिबान के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्‍ताकी ने बाजवा के साथ एक लंबी बैठक की थी। इसके बाद ही तालिबान ने भारत से राजनयिकों और तकनीकी स्‍टाफ को फिर से भेजने के लिए अनुरोध किया था। इस किताब में यह बताया गया है कि किस तरह से सत्‍ता में आने के बाद तालिबान को अपनी दकियानूसी सोच को बदलने के लिए संघर्ष करना पड़ा।

पाकिस्‍तान ने इस लालच में दी तालिबान को मंजूरी


किताब में हसन अब्‍बास लिखते हैं कि काबुल में भारत की वापसी संभव नहीं होती अगर पाकिस्‍तान ने मदद नहीं किया होता। उन्‍होंने कहा कि पाकिस्‍तान ने इसको मंजूरी इसलिए दी ताकि इसके जरिए तालिबान की नई नवेली सरकार को कुछ आर्थिक मदद दी जा सके। उन्‍होंने कहा कि तालिबान की तरह से ही पाकिस्‍तान किसी भी तरह से तालिबानी आतंकियों को आर्थिक मदद दिलाना चाहता था ताकि अफगानिस्‍तान में उनकी सरकार चल सके। किताब में यह भी दावा किया गया है कि तालिबानी इसलिए भारत के साथ रिश्‍ते सुधारना चाहते थे कि ताकि उन्‍हें अंतरराष्‍ट्रीय वैधानिकता और मान्‍यता मिल सके।

इस किताब में यह भी कहा गया है कि रूस और चीन के विपरीत भारत ने तालिबान राज आने के बाद अफगानिस्‍तान से अपने राजनयिक रिश्‍ते खत्‍म कर लिए थे। अब्‍बास लिखते हैं कि भारत अब गंभीरतापूर्वक अपनी स्थिति की समीक्षा कर रहा है और तालिबान के साथ संतुल‍ित रिश्‍ते बना रहा है और अफगानिस्‍तान को स्थिर बनाने में मदद कर रहा है। अब्‍बास ने कहा कि काबुल के नए शासकों को बड़े पैमाने पर विदेशी निवेश की जरूरत है ताकि देश का पुर्ननिर्माण किया जा सके और उसे उबारा जा सके। भारत ने इसका आश्‍वासन तालिबान को दिया है।

अन्य महत्वपुर्ण खबरें

 24 September 2026
न्यूयॉर्क: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) सुधारों का भारत समेत G4 के सभी सदस्यों ने समर्थन किया है। न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र के दौरान G4…
 24 September 2026
वॉशिंगटन: भारत 'मिडिल पावर्स' (मध्यम दर्जे की ताकतों) के एक नए मल्टीलेटरल (बहुपक्षीय) ग्रुप में शामिल हुआ है। यह ग्रुप पार्टनर्स फॉर मल्टीलेटरलिज्म (P4M) है। विदेश मंत्री सुब्रह्मण्यम जयशंकर ने…
 24 September 2026
इस्लामाबाद: पाकिस्तान ने मक्का समझौते के जरिए सऊदी अरब और तुर्की के साथ रक्षा संबंध मजबूत किए हैं। साथ ही खाड़ी देशों की सुरक्षा में बड़ी भूमिका निभाने की उसकी…
 24 September 2026
न्यूयॉर्क: संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के मंच से भारत के दोस्त ने साइप्रस ने तुर्की को करारा जवाब दिया है। तुर्की के राष्ट्रपति ने निकोस क्रिस्टोलाइट्स ने महासभा को संबोधित…
 24 September 2026
तेहरान: ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची की न्यूयॉर्क में ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ के साथ सीधी बातचीत पर तेहरान में कट्टरपंथी भड़क गए हैं। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड…
 24 September 2026
इस्लामाबाद: पाकिस्तान की ओर से एक बार फिर दुनिया के सामने सिंधु जल संधि (IWT) का मामला उठाया गया है। पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने OIC (ऑर्गनाइजेशन ऑफ…
 23 September 2026
न्यूयॉर्क: संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र के इतर 'ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन' (OIC) के जम्मू-कश्मीर कांटेक्ट ग्रुप की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। न्यूयॉर्क में हुई इस…
 23 September 2026
न्यूयॉर्क: तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन ने मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) की बैठक को संबोधित करते हुए कश्मीर का राग अलापा। उन्होंने कश्मीर पर बातचीत करने और…
 23 September 2026
न्यूयॉर्क: संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के मंच से भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग टोबगे ने भारत के साथ अपनी अटूट दोस्ती को एक बार फिर दुनिया के सामने रखा है। पीएम…
Advt.