भारत बंद 9 जुलाई: देशभर में कल क्यों रहेगी हड़ताल? जानें क्या खुला रहेगा और क्या नहीं, पूरी डिटेल पढ़ें

Updated on 08-07-2025 01:55 PM
नई दिल्ली: देशभर में कल 9 जुलाई को भारत बंद का ऐलान किया गया है। यह बंद 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने मिलकर बुलाया है। इनमें बैंक, बीमा, डाक, कोयला खदान, हाईवे और कंस्ट्रक्शन जैसे सेक्टरों के 25 करोड़ से ज्यादा कर्मचारियों के शामिल होने की उम्मीद है। इस विरोध प्रदर्शन को ' भारत बंद ' नाम दिया गया है। यूनियनों का कहना है कि सरकार की नीतियां कंपनियों को फायदा पहुंचाने वाली और मजदूरों के खिलाफ हैं। ग्रामीण भारत से किसान और खेतिहर मजदूर भी इस बंद में शामिल होंगे।

बंद में इन ट्रेड यूनियनों का समर्थन

इस हड़ताल में कई प्रमुख राष्ट्रीय संगठन शामिल हैं। इनमें ये शामिल हैं:
  • इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस (INTUC)
  • ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (AITUC)
  • हिंद मजदूर सभा (HMS)
  • सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस (CITU)
  • ऑल इंडिया यूनाइटेड ट्रेड यूनियन सेंटर (AIUTUC)
  • ट्रेड यूनियन कोऑर्डिनेशन सेंटर (TUCC)
  • सेल्फ एम्प्लॉयड वीमेंस एसोसिएशन (SEWA)
  • ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियंस (AICCTU)
  • लेबर प्रोग्रेसिव फेडरेशन (LPF)
  • यूनाइटेड ट्रेड यूनियन कांग्रेस (UTUC)

क्या खुला है, क्या बंद रहेगा?

इस हड़ताल से कई क्षेत्रों पर असर पड़ने की उम्मीद है। इनमें बैंकिंग और वित्तीय सेवाएं, डाक विभाग, कोयला खनन और कारखाने, राज्य परिवहन सेवाएं, सरकारी कार्यालय शामिल हैं।

एनएमडीसी और स्टील व खनिज क्षेत्रों की कई सरकारी कंपनियों के कर्मचारियों ने भी हड़ताल में शामिल होने की पुष्टि की है। हिंद मजदूर सभा के हरभजन सिंह सिद्धू ने कहा कि इस विरोध प्रदर्शन में सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों के उद्योगों और सेवाओं में मजबूत भागीदारी देखने को मिलेगी।

क्या बैंक बंद रहेंगे?

बैंकिंग यूनियनों ने अलग से बंद के कारण सेवाओं में व्यवधान की पुष्टि नहीं की है। लेकिन, बंद आयोजकों के अनुसार वित्तीय सेवाएं प्रभावित होंगी। बंद आयोजकों ने कहा कि हड़ताल में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और सहकारी बैंकिंग क्षेत्रों के कर्मचारी शामिल हैं। इससे कई क्षेत्रों में शाखा सेवाएं, चेक क्लीयरेंस और ग्राहक सहायता जैसी बैंकिंग सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं।

स्कूल, कॉलेज, ऑफिस का क्या होगा?

9 जुलाई को स्कूल, कॉलेज और प्राइवेट ऑफिस खुले रहने की उम्मीद है। हालांकि, परिवहन संबंधी समस्याओं के कारण कुछ क्षेत्रों में कामकाज प्रभावित हो सकता है। ट्रेड यूनियनों और सहयोगी ग्रुप की ओर से कई शहरों में विरोध मार्च और सड़क प्रदर्शन किए जाने से सार्वजनिक बसें, टैक्सियां और ऐप-आधारित कैब सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। इससे स्थानीय यात्रा और लॉजिस्टिक्स संचालन में देरी या रद्द होने की संभावना है।

क्या रेल सेवाएं प्रभावित होंगी?

9 जुलाई को देशव्यापी रेलवे हड़ताल की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। हालांकि, देश के कई हिस्सों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन और सड़क जाम की आशंका है, जिससे कुछ क्षेत्रों में ट्रेन सेवाएं बाधित हो सकती हैं या उनमें देरी हो सकती है।
रेलवे यूनियनों ने औपचारिक रूप से भारत बंद में भाग नहीं लिया है। लेकिन, पहले हुईं इस तरह की हड़तालों में देखा गया है कि प्रदर्शनकारी रेलवे स्टेशनों के पास या पटरियों पर प्रदर्शन करते हैं, खासकर उन राज्यों में जहां यूनियन की मजबूत उपस्थिति है। इससे स्थानीय स्तर पर ट्रेनों में देरी हो सकती है या अधिकारियों द्वारा सुरक्षा उपाय बढ़ाए जा सकते हैं।

हड़ताल का कारण क्या है?

ट्रेड यूनियनों का दावा है कि उनकी चिंताओं को लगातार नजरअंदाज किया गया है। उन्होंने पिछले साल श्रम मंत्री मनसुख मंडाविया को 17 सूत्रीय मांगों का एक चार्टर सौंपा था, लेकिन उनका कहना है कि इस पर कोई गंभीर प्रतिक्रिया नहीं हुई है।

यूनियन फोरम ने कहा कि सरकार ने देश की कल्याणकारी राज्य की स्थिति को त्याग दिया है। यह विदेशी और भारतीय कंपनियों के हित में काम कर रही है। यह उन नीतियों से स्पष्ट है जिनका सख्ती से पालन किया जा रहा है। यूनियन ने ये लगाए सरकार पर आरोप
  • पिछले दस वर्षों में भारतीय श्रम सम्मेलन आयोजित नहीं किया है।
  • चार नए श्रम कानूनों को आगे बढ़ा रही है जो यूनियनों को कमजोर करते हैं और काम के घंटे बढ़ाते हैं।
  • संविदात्मक नौकरियों और निजीकरण को बढ़ावा दे रही है।
  • अधिक सार्वजनिक क्षेत्र की भर्ती और वेतन वृद्धि की मांगों को नजरअंदाज कर रही है।
  • युवा बेरोजगारी से निपटने के बिना नियोक्ताओं को प्रोत्साहन दे रही है।

किसान और ग्रामीण मजदूर क्यों शामिल?

किसानों के ग्रुप और ग्रामीण श्रमिक संगठनों ने भी अपना समर्थन दिया है। संयुक्त किसान मोर्चा और कृषि श्रमिक संघ ग्रामीणों को जुटाने और उन आर्थिक फैसलों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने की योजना बना रहे हैं, जिनके बारे में उनका दावा है कि वे ग्रामीण संकट को बढ़ा रहे हैं। उनका आरोप है कि सरकारी कामों के कारण बेरोजगारी बढ़ रही है। वहीं आवश्यक वस्तुओं की कीमतें बढ़ रही हैं। स्वास्थ्य, शिक्षा और कल्याणकारी खर्चों में कटौती की जा रही है।


अन्य महत्वपुर्ण खबरें

 08 September 2026
नई दिल्ली: मध्य पूर्व में जारी तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमत, बिकवाली समेत अन्य वजहों से घरेलू शेयर बाजार में भारी गिरावट देखी जा रही है। आज मंगलवार को…
 08 September 2026
नई दिल्ली: भारत में घरेलू कोयले से गैस और औद्योगिक ईंधन बनाने की योजना को लेकर कंपनियों की दिलचस्पी सामने आई है। केंद्र सरकार की कोयला गैसीकरण योजना के पहले…
 08 September 2026
नई दिल्ली: भारत की पहली स्वदेशी बुलेट ट्रेन का ट्रायल कब होगा, इसकी जानकारी केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंगलवार को दी। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि…
 08 September 2026
नई दिल्ली: भारत और बांग्लादेश के बीच बंद पड़ी यात्री ट्रेन सेवाओं को फिर से शुरू करने की दिशा में बातचीत शुरू हो गई है। दोनों देशों के रेलवे अधिकारियों…
 05 September 2026
नई दिल्ली: ईरान युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमत में काफी तेजी आई थी और यह 120 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया था। शुक्रवार को इंटरनेशनल बेंचमार्क…
 05 September 2026
नई दिल्ली: एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन और जी के फाउंडर सुभाष चंद्रा की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। सीबीआई ने चंद्रा और अन्य लोगों के खिलाफ…
 05 September 2026
नई दिल्ली: आपने कई बार देखा होगा कि जरूरत पड़ने पर जब किसी बीमा कंपनी से इंश्योरेंस क्लेम (बीमा दावा) किया जाता है तो वह कई बार रिजेक्ट भी हो…
 05 September 2026
नई दिल्‍ली: एग्रीकल्चर एनालिस्ट देविंदर शर्मा ने भारत की कृषि नीति पर नए सिरे से विचार करने की मांग की है। उनका तर्क है कि इथेनॉल, फर्टिलाइजर प्रोडक्शन और ट्रेड…
 31 August 2026
नई दिल्ली: देश में करोड़ों की संख्या में लोग क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल कर रहे हैं। अब फेस्टिव सीजन की शुरुआत भी हो रही है। इसको देखते हुए क्रेडिट कार्ड…
Advt.