ईरान-इजरायल युद्ध का फायदा उठाने की तैयारी में चीन, कर रहा है तेल में बड़ा खेल?

Updated on 28-02-2026 05:10 PM
नई दिल्ली: ईरान और इजरायल के बीच एक बार फिर जंग शुरू हो गई है। इससे कच्चे तेल की कीमत में काफी तेजी आने की आशंका है। माना जा रहा है कि अगर यह लड़ाई लंबी खिंचती है तो क्रूड की कीमत 110 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती है। ईरान रोज करीब 33 लाख बैरल कच्चे तेल का उत्पादन करता है जो ग्लोबल सप्लाई का करीब 3% है। इस युद्ध से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ट्रैफिक बाधित हो सकता है। दुनिया का तेल कारोबार का करीब 20 फीसदी हिस्सा यहीं से गुजरता है। अमेरिका ने जबसे मिडिल ईस्ट में अपनी सैन्य गतिविधि बढ़ाई है तबसे कच्चे तेल की कीमत 10% बढ़ चुकी है।

इस युद्ध के शुरू होने से पहले ही मिडिल ईस्ट से तेल की शिपिंग की लागत काफी बढ़ गई है। जनवरी के पहले हफ्ते की तुलना में इसमें 584% तेजी आई है। मिडिल ईस्ट से चीन जाने वाले 2 मिलियन बैरल क्षमता के जहाज का किराया रोजाना 200000 डॉलर से ऊपर पहुंच गया। चीन ने हाल में सऊदी अरब, ईरान और रूस से काफी तेल खरीदा है। सऊदी अरब की सबसे ऑयल शिपिंग कंपनी Bahri ने चीन को पांच सुपरटैंकर भेजे हैं जो छह महीने में सबसे ज्यादा हैं।

चीन को एक्सपोर्ट

इतना ही नहीं सऊदी अरब ने चीन को अगले महीने 8 मिलियन बैरल अतिरिक्त तेल भेजने की योजना बनाई है। अमेरिका के साथ बढ़ते तनाव को देखते हुए ईरान ने भी चीन को तेल की सप्लाई तेज कर दी थी। 15 से 20 फरवरी के दौरान ईरान का क्रूड एक्सपोर्ट पिछले महीने की तुलना में 200 फीसदी बढ़कर 20 मिलियन बैरल पहुंच गया। यह रोजाना के हिसाब से करीब 3 मिलियन बैरल बैठता है जो ईरान के डेली एक्सपोर्ट की तुलना में काफी ज्यादा है।सैटेलाइट तस्वीरों से इस बात की पुष्टि हुई है कि इस दौरान ईरान के बंदरगाहों पर टैंकर की संख्या 8 से बढ़कर 18 देखी गई। पिछले साल भी इसी तरह का पैटर्न देखा गया था जब ईरान ने अमेरिका के हमले से पहले काफी तेल एक्सपोर्ट किया था। उससे पहले 2024 में भी यही स्थिति रही थी। ईरान की इकॉनमी काफी हद तक तेल के एक्सपोर्ट पर निर्भर है। ईरान से एक्सपोर्ट होने वाला ज्यादातर तेल चीन को जाता है। इस दौरान चीन ने रूस से भी भर-भरकर तेल मंगाया है।

चीन का प्लान

चीन दुनिया में कच्चे तेल का सबसे बड़ा आयातक है। पिछले साल उसे रोजाना 11.6 मिलियन बैरल कच्चे तेल का आयात किया जो 2024 की तुलना में 4.4 फीसदी अधिक है। जानकारों का कहना है कि चीन ने अपने यहां तेल का बड़ा भंडार जमा कर रखा है। उसने सस्ते में तेल खरीदा और अब कीमत बढ़ने पर वह इस तेल को अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेचकर मोटा पैसा कमा सकता है।

पिछले सत्र में ब्रेंट क्रूड 2.03 डॉलर यानी 2.87 फीसदी तेजी के साथ 72.87 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ। जानकारों का कहना है कि अगर होर्मुज की खाड़ी से कच्चे तेल का आवाजाही प्रभावित हुई तो कच्चे तेल की कीमत 95 से 110 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती है। यह भारत के लिए भी अच्छी खबर नहीं है क्योंकि भारत का आधा से ज्यादा तेल इसी रास्ते आता है। अगर ईरान होर्मुज को बंद कर देता है तो इससे भारत और चीन का तेल आयात काफी प्रभावित हो सकता है। इससे कच्चे तेल की कीमतें काफी बढ़ सकती हैं। भारत अपनी जरूरत का 85% कच्चा तेल आयात करता है

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