चीन का शक्ति प्रदर्शन नहीं आया काम, अफ्रीका में पैर पसारने की चाल फेल, ड्रैगन को बड़ा झटका

Updated on 07-04-2023 06:36 PM
बीजिंग: दक्षिण चीन सागर से लेकर लद्दाख तक आंखें दिखा रहा चीन अफ्रीका में भी अपनी पकड़ को मजबूत करने में जुट गया है। चीन ने अफ्रीकी देश जिबूती में अपना विशाल नेवल बेस बना लिया है। इस बेस पर चीन ने अपने 900 से लेकर 1200 सैनिकों को तैनात कर रखा है। इस नौसैनिक अड्डे पर हाल ही में चीन का एक 7000 टन का डेस्‍ट्रायर नानिंग पहुंचा था। चीन ने पिछले दिनों अपने दो जासूसी जहाजों को लेकर दक्षिण अफ्रीका और रूस के साथ संयुक्‍त अभ्‍यास किया था। यह अभ्‍यास दक्षिण अफ्रीका के समुद्री तट पर मार्च के अंतिम दिनों में किया गया था लेकिन यह अफ्रीकी देशों पर छाप छोड़ने में नाकाम रहा।

हमारे सहयोगी टीवी चैनल टाइम्‍स नाउ की रिपोर्ट के मुताबिक इस नौसैनिक अभ्‍यास में चीन के दो जासूसी जहाज डा यांग हाओ और शियान यांग होंग ने हिस्‍सा लिया था। चीन की कोशिश थी कि इसके जरिए अफ्रीकी देशों को अपने प्रभाव में लाया जाए लेकिन उसकी यह नापाक चाल नहीं चली। चीन का पहला निशाना बाटा था जो इक्वेटोरियल गिनी में है। बाटा में चीन को अटलांटिक महासागर के अंदर नौसैनिक अड्डा बनाना था लेकिन यह योजना धरातल पर नहीं उतर सकी।

चीन को तंजानिया ने भी दिया झटका


रिपोर्ट में कहा गया है कि पश्चिमी देशों की दबाव की वजह से बाटा ने चीनी अड्डे को ना कर दिया। इस दौरान इक्वेटोरियल गिनी में पश्चिमी देशों के कई वरिष्‍ठ अधिकारियों ने दौरा किया था। इसके बाद चीन की नजर बागमोयो पर थी जो एक समय में तंजानिया का हिंद महासागर में महत्‍वपूर्ण बंदरगाह था। शुरुआती प्रयासों के बाद चीन को कोई भी सकारात्‍मक संकेत तंजानिया से नहीं मिला। इसके बाद चीन के लिए एक अन्‍य विकल्‍प मोजांबिक था लेकिन वहां पर पुर्तगाल और अन्‍य पश्चिमी देश पहले से मौजूद हैं।


ऐसे में वहां भी चीन की दाल नहीं गली। हिंद महासागर क्षेत्र में केवल जिबूती ही एक ऐसा देश है जहां पर उसे सफलता मिली है। जिबूती का चीनी नौसेना का बेस काफी बड़ा है। हालांकि यहां भी पश्चिमी देश बड़े पैमाने पर मौजूद हैं जिससे वहां चीन को उस तरह की सफलता नहीं मिली जिसकी उसे उम्‍मीद है। चीन लगातार हिंद महासागर में अपने जासूसी जहाज और युद्धपोत भेज रहा है। यही नहीं म्‍यांमार के कोको द्वीप और कंबोडिया में चीन के जासूसी बेस बनाने की भी खबरें आई हैं। चीन श्रीलंका में हंबनटोटा को अपना नौसैनिक अड्डा बनाने की फिराक में और रेडॉर स्‍टेशन स्‍थापित करना चाहता है। इससे भारत को बड़ा खतरा हो सकता है।


अन्य महत्वपुर्ण खबरें

 23 September 2026
न्यूयॉर्क: संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र के इतर 'ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन' (OIC) के जम्मू-कश्मीर कांटेक्ट ग्रुप की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। न्यूयॉर्क में हुई इस…
 23 September 2026
न्यूयॉर्क: तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन ने मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) की बैठक को संबोधित करते हुए कश्मीर का राग अलापा। उन्होंने कश्मीर पर बातचीत करने और…
 23 September 2026
न्यूयॉर्क: संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के मंच से भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग टोबगे ने भारत के साथ अपनी अटूट दोस्ती को एक बार फिर दुनिया के सामने रखा है। पीएम…
 23 September 2026
न्यूयॉर्क: यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने कहा है कि अमेरिका, भारत और चीन, रूस पर दबाव डालें तो वह यूक्रेन में युद्ध जारी नहीं रख पाएगा। जेलेंस्की ने कहा…
 23 September 2026
इस्लामाबाद: भारत, आतंकवाद का हवाला देकर सिंधु जल संधि को एकतरफा सस्पेंड नहीं कर सकता है। ये कहना है विलेम वैन ड्यूरसेन का जो एक सीनियर डच इंडिपेंडेंट वॉटर मैनेजमेंट…
 23 September 2026
वॉशिंगटन: 23 सितम्बर को धरती पर एक दुर्लभ खगोलीय घटना होने जा रही है, जिसके चलते दिन और रात बराबर होंगे। इसे उत्तरी गोलार्ध में सर्दियों की शुरुआत का संकेत…
 23 September 2026
संयुक्‍त राष्‍ट्र: संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुतारेस ने विश्व भर के नेताओं से सुरक्षा परिषद में सुधार करने की जोरदार अपील की है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि…
 23 September 2026
मॉस्को: रूसी तेल खरीदने को लेकर डोनाल्ड ट्रंप के 100 फीसदी टैरिफ को लेकर रूसी मीडिया ने चेतावनी दी है कि अमेरिका और पश्चिमी देश 'भारत-रूस की दोस्ती तोड़ने की…
 22 September 2026
नई दिल्ली/तेल अवीव: पाकिस्तान के खिलाफ 1965 की लड़ाई के दौरान भारत के खुफिया तंत्र पर गंभीर सवाल उठे थे। इसके बाद 21 सितंबर 1968 को रिसर्च एंड एनालिसिस विंग…
Advt.