प्रोस्टेट बीमारी में इमामत नहीं कर सकते शहर काजी:मुस्लिम त्योहार कमेटी ने कहा- मुफ्ती खुद 420, वह कैसे दे सकते हैं फतवा

Updated on 16-03-2026 03:04 PM
भोपाल, ईद की नमाज से कुछ दिन पहले सोशल मीडिया पर सामने आए एक फतवे को लेकर भोपाल में विवाद गहरा गया है। दारुल इफ्ता जामे एहतमाम मसाजिद कमेटी की ओर से जारी इस फतवे को लेकर अब ऑल इंडिया मुस्लिम त्योहार कमेटी खुलकर सामने आ गई है। कमेटी के संरक्षक शमशुल हसन ने आरोप लगाया कि यह फतवा भोपाल के शहर काजी मुश्ताक अली नदवी को निशाना बनाकर जारी किया गया है और इससे बेवजह विवाद पैदा किया गया है।

शमशुल हसन ने कहा कि ईद की नमाज में अब कुछ ही दिन बचे हैं और ऐसे समय में इस तरह का फतवा जारी कर उसे सोशल मीडिया पर वायरल कर देना कई सवाल खड़े करता है। उन्होंने दावा किया कि शहर काजी पूरी तरह स्वस्थ हैं और उनसे बातचीत में भी उन्होंने खुद को तंदुरुस्त बताया है। हसन के मुताबिक, “काज़ी साहब से हमारी बात हुई है। उन्होंने बताया कि वह पूरी तरह ठीक हैं, नमाज पढ़ रहे हैं और उन्हें कोई दिक्कत नहीं है। इसके बावजूद जिस तरह से एक फतवा जारी कर सोशल मीडिया पर डाला गया, उससे एक अनावश्यक विवाद खड़ा हो गया है।

दरअसल दारुल इफ्ता जाम-ए-एहतमाम मसाजिद कमेटी भोपाल के नाम से जारी इस दस्तावेज में पूछे गए सवाल में लिखा है कि “किसी शहर के काजी साहब” जो प्रोस्टेट की बीमारी से पीड़ित हैं और जिन्हें पेशाब की बूंदें आने की समस्या है, क्या उनके पीछे नमाज पढ़ना सही होगा या नहीं। इसी सवाल के जवाब में फतवा जारी किया गया है।

जवाब में कहा गया है कि जिस व्यक्ति को लगातार पेशाब टपकने जैसी बीमारी हो, उसे शरियत में ‘माजूर’ माना जाता है। ऐसी स्थिति में वह व्यक्ति खुद नमाज पढ़ सकता है, लेकिन इमाम बनकर लोगों को नमाज नहीं पढ़ा सकता। अगर किसी ने ऐसे व्यक्ति के पीछे फर्ज नमाज पढ़ ली हो तो उसे दोबारा पढ़ने की जरूरत होगी।

पुलिस से शिकायत की तैयारी

ऑल इंडिया मुस्लिम त्योहार कमेटी ने इस मामले को लेकर पुलिस से शिकायत दर्ज कराने की चेतावनी दी है। शमशुल हसन ने कहा कि कमेटी के पदाधिकारी मंगलवार सुबह 11 बजे शाहजहांनाबाद थाने पहुंचकर इस मामले में एफआईआर दर्ज कराने की मांग करेंगे। उनका कहना है कि इस फतवे को वायरल करने और इससे विवाद खड़ा करने वालों की जांच होना चाहिए।

मुफ्ती पर लगाए गंभीर आरोप

ऑल इंडिया मुस्लिम त्योहार कमेटी के संरक्षक शमशुल हसन ने फतवा जारी करने वाले मुफ्ती अब्दुल कलाम पर भी तीखे आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति पर पहले से कई आपराधिक मामले न्यायालय में चल रहे हों, उसे इस तरह का फतवा जारी करने से पहले अपने आचरण पर भी नजर डालनी चाहिए।

शमशुल हसन ने कहा, “अब्दुल कलाम साहब खुद कई मामलों का सामना कर रहे हैं। उनके खिलाफ धोखाधड़ी (420), दहेज प्रताड़ना (498) सहित अन्य प्रकरण न्यायालय में चल रहे हैं। ऐसे लोग किसी दूसरे पर उंगली उठाने से पहले अपने गिरेबान में झांकें। जिस तरह से एक हट्टे-कट्टे शहर काजी के खिलाफ बीमारी का हवाला देकर फतवा जारी किया गया है, वह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। अगर इस मामले में कार्रवाई नहीं हुई तो हम पुलिस में शिकायत दर्ज कराएंगे।

शहर काजी ने कहा- हमसे कोई संबंध नहीं

विवाद के बीच भोपाल के शहर काजी मुश्ताक अली नदवी ने इस पूरे मामले से खुद को अलग बताया है। उन्होंने कहा कि इस फतवे का उनसे कोई संबंध नहीं है और वह इस मुद्दे पर आगे कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते।

इन्होंने दिया फतवा 

यह फतवा 9 मार्च 2026 को नायब मुफ़्ती सैयद अहमद खान कासमी की ओर से जारी बताया गया है, जिस पर मुफ़्ती-ए-शहर भोपाल की मुहर भी लगी है। दस्तावेज के अनुसार सवाल भोपाल के पीरगेट निवासी सहेल अली की ओर से पूछा गया था। हालांकि पूरे दस्तावेज में कहीं भी भोपाल के मौजूदा शहर काजी का नाम नहीं है।

इसके बावजूद सोशल मीडिया पर कुछ लोग इसे सीधे शहर काजी से जोड़कर टिप्पणियां कर रहे हैं, जिससे भ्रम की स्थिति बन गई है। धार्मिक जानकारों का कहना है कि इस तरह के फतवे आमतौर पर शरई नियम स्पष्ट करने के लिए दिए जाते हैं और यह जरूरी नहीं होता कि वह किसी खास व्यक्ति के बारे में हो।

ईदगाह में नमाज पढ़ाने की लालसा में जारी हुआ फतवा

शमशुल हसन ने इस पूरे विवाद के पीछे मंशा पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि फतवा जारी करने के पीछे ईदगाह में नमाज पढ़ाने की इच्छा भी एक कारण हो सकती है। उन्होंने कहा, “एक ऑडियो भी सामने आया है, जिससे साफ होता है कि उनके मन में यह लालसा है कि ईदगाह पर नमाज वही पढ़ाएं। इसी वजह से इस तरह का माहौल बनाया जा रहा है।

अगर किसी को ईदगाह में नमाज पढ़ाने की इच्छा है तो उसके लिए इस तरह का विवाद खड़ा करना ठीक नहीं है। इस पूरे मामले की जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों से समाज में अनावश्यक विवाद की स्थिति बनती है, इसलिए जिम्मेदार लोगों को इस तरह के कदम उठाने से बचना चाहिए। बता दें कि ईदगाह पर ईद की नमाज शहर काजी पढ़ाते हैं



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