ऐसे नहीं बढ़ने वाली ग्रोथ... दिग्‍गज अर्थशास्‍त्री ने RBI के रेट कट का जिक्र कर कह दी यह बड़ी बात

Updated on 19-02-2025 02:41 PM
नई दिल्‍ली: एक्सिस बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री नीलकंठ मिश्रा ने मंगलवार को भारतीय रिजर्व बैंक के रेट कट का जिक्र कर बड़ी बात कह दी। उन्‍होंने मुंबई में कहा कि RBI को इकनॉमिक ग्रोथ के लिए दरों में कटौती की जगह कैश पर ध्यान देना चाहिए। मिश्रा के मुताबिक, अगर आगे भी रेपो रेट में कटौती की जाती तो कर्ज लेने की रफ्तार में ज्‍यादा फर्क नहीं पड़ेगा। नीलकंठ मिश्रा प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के अंशकालिक सदस्य भी हैं। उन्‍होंने यह बात ऐसे समय कही जब हाल में केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने रेपो रेट में चौथाई फीसदी की कटौती की है। इसकी ओर से आगे भी रेट कट की उम्‍मीद लगाई जा रही है।
नीलकंठ मिश्रा ने मुंबई में एक कार्यक्रम के दौरान अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि अगर आरबीआई वाकई इकनॉमिक ग्रोथ को बढ़ावा देना चाहता है तो उसे नीतिगत दरों में कटौती करने के बजाय बाजार में नकदी बढ़ाने पर फोकस करना चाहिए। मिश्रा का मानना है कि हाल ही में हुई ब्याज दरों में कटौती और आगे भी अगर कटौती होती है तो भी उससे कर्ज लेने में कोई खास बढ़ोतरी नहीं होगी। इसकी सबसे बड़ी वजह है बाजार में नकदी की कमी, जो कर्ज देने में रुकावट पैदा करती है

पूरा फंडा समझाया

मिश्रा ने बैंक के मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा, 'जैसा मौद्रिक नीति समिति ने कहा है कि अगर उद्देश्य वित्तीय स्थितियों को आसान बनाना और आर्थिक वृद्धि को समर्थन देना है तो मेरा सुझाव होगा कि सबसे पहले नकदी पर ध्यान दिया जाए क्योंकि इस स्तर पर दरों में कटौती से मदद नहीं मिल रही है।' उन्होंने आगे जोर देते हुए कहा, 'यदि उद्देश्य वृद्धि को समर्थन देने के लिए मौद्रिक साधनों का उपयोग करना है तो नकदी पहला उपाय होना चाहिए।'मिश्रा ने समझाया कि अगर दरों में कटौती का मकसद कर्ज को बढ़ावा देना है तो नए कर्ज कम ब्याज दरों पर नहीं मिलेंगे। ऐसा इसलिए क्योंकि पिछले 18 महीनों से बाजार में नकदी की तंगी है, जिससे पैसा उधार देने की लागत बढ़ी हुई है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि RBI की ओर से रेपो रेट में 0.25% की कटौती के बावजूद एक साल के डिपॉजिट सर्टिफिकेट पर ब्याज दर अभी भी 7.8% के ऊंचे स्तर पर बनी हुई है।

RBI ने अपनी नीतिगत दर में कटौती की घोषणा करते हुए कहा था कि लगभग 40% कर्ज का पुनर्मूल्यांकन तुरंत हो जाएगा क्योंकि वे बाहरी मानकों (रेपो रेट आदि) से जुड़े हैं, जबकि बाकी कर्ज में दो तिमाही का समय लगेगा। मिश्रा ने स्वीकार किया कि विश्लेषकों ने तीन चरणों में कुल 0.75% की दर कटौती की उम्मीद जताई थी। लेकिन, उन्होंने दोहराया कि नकदी पर ध्यान देना ज्यादा कारगर होगा।

कब ग्रोथ 7% तक पहुंचेगी?

मिश्रा ने यह भी बताया कि आरबीआई के नए गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बाजार को जरूरी नकदी उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है। एक सवाल के जवाब में मिश्रा ने बाजार में लगातार नकदी बनाए रखने के लिए RBI की ओर से नियमित रूप से खुले बाजार में प्रतिभूतियों की खरीद-फरोख्त का समर्थन किया। उन्होंने सुझाव दिया कि CRR में और कटौती करने के बजाय वृद्धिशील CRR यानी कैश रिजर्व रेशियो की जरूरत को कम करना ज्यादा असरदार होगा।

मिश्रा का अनुमान है कि अगर नकदी की स्थिति में तेजी से सुधार होता है और सरकार अपने वित्तीय वादों को पूरा करती है तो वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही में GDP विकास दर 7% तक पहुंच सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले कुछ सालों में वैश्विक बाजार भारत के विकास के नजरिए से कम महत्वपूर्ण हो गए हैं। हालांकि, वैश्विक घटनाक्रम प्रतिकूल हैं, फिर भी भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत बनी रह सकती है।

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