कच्चे तेल की कीमत 100 के पार, भारत में फिर भी पेट्रोल-डीजल की कीमतें नहीं बढ़ीं, वजह

Updated on 28-03-2026 11:56 AM
नई दिल्‍ली: कच्चे तेल (क्रूड) की कीमतें दुनिया भर में दोबारा 100 डॉलर के पार चली गई हैं। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष इसकी वजह है। क्रूड की कीमतें बढ़ने से महंगाई और ईंधन की कमी को लेकर टेंशन बढ़ गई है। कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण दुनिया के कई हिस्सों में ईंधन की कीमतें बढ़ानी पड़ी हैं। लेकिन, भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें अभी स्थिर बनी हुई हैं। सरकार और विश्लेषकों ने कीमतों में इस स्थिरता के कई कारण बताए हैं। इनमें पर्याप्त स्टॉक, सस्ता आयात और तेल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) का प्रभावी प्रबंधन शामिल है। इसी बीच सरकार ने शुक्रवार को पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में 10-10 रुपये प्रति लीटर की कटौती की है। हालांकि, इससे ईंधन के खुदरा दाम में बदलाव नहीं होगा। कंपनियां इसका इस्‍तेमाल कच्चे माल की बढ़ी हुई लागत की भरपाई के लिए करेंगी।

कीमतों पर कंट्रोल कैसे रख पाई सरकार?

  • इसका एक बड़ा कारण यह है कि केंद्र सरकार ने दावा किया है कि उसके पास 60 दिनों का बफर स्टॉक मौजूद है।
  • इसमें उसके रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार और तेल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) के पास मौजूद स्टॉक शामिल हैं।
  • पिछले कुछ सालों में भारत सरकार रूस से रियायती दरों पर क्रूड की खरीद लगातार बढ़ा रही है।
  • इससे कंपनियों को अपनी लागत कम रखने और अतिरिक्त मार्जिन बनाने में मदद मिली है।
  • भारत ने 'ऑपरेशन ऊर्जा सुरक्षा' शुरू किया है, जो एक रणनीतिक नौसैनिक मिशन है।
  • इस मिशन का उद्देश्य मिडिल ईस्‍ट के संघर्ष-ग्रस्त जलक्षेत्रों से होकर गुजरने वाली देश की महत्वपूर्ण ऊर्जा सप्‍लाई की सुरक्षा करना है।

तेल कंपनियों की स्‍ट्रैटेजी कैसे आई है काम?

  • तेल मार्केटिंग कंपनियां भी बढ़ती कीमतों से निपटने के लिए रणनीतिक रूप से काम कर रही हैं।
  • उन्होंने कीमतों में हुई बढ़ोतरी का बोझ तुरंत उपभोक्ताओं पर नहीं डाला है।
  • कंपनियों ने क्रूड कीमतें कम होने के दौरान बनाए गए मार्जिन का इस्तेमाल अचानक उछाल आने पर बढ़ी हुई लागत की भरपाई करने के लिए किया है।

दुनियाभर में बढ़ी हैं पेट्रोल-डीजल की कीमतें

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि पिछले एक महीने में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है। ये 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर लगभग 122 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं। इसके चलते दुनिया भर में पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ गई हैं।

सरकार को कितना उठाना पड़ा नुकसान?

पुरी ने आगे कहा कि अंतरराष्ट्रीय कीमतों में भारी उछाल के बीच तेल कंपनियों को हो रहे नुकसान की भरपाई करने के लिए सरकार ने अपने टैक्स रेवेन्यू में भारी कटौती की है। यह नुकसान पेट्रोल के लिए लगभग 24 रुपये प्रति लीटर और डीजल के लिए लगभग 30 रुपये प्रति लीटर होने का अनुमान है।

उन्होंने यह भी बताया कि ग्‍लोबल स्तर पर ईंधन की कीमतों में उछाल को देखते हुए एक्सपोर्ट टैक्स भी लगाए गए हैं। अब पेट्रोल या डीजल का निर्यात करने वाली किसी भी रिफाइनरी को एक्‍सपोर्ट टैक्‍स का भुगतान करना जरूरी होगा।

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