पेपर कप में चाय पीने से फैल रहा कैंसर:IIT खड़गपुर के रिसर्च में खुलासा

Updated on 04-11-2025 12:41 PM

यदि आप रोजाना पेपर कप में चाय या कॉफी पीते हैं, तो यह आपको कैंसर का रोगी बना सकता है। इतनी ही नहीं, इससे हार्मोन से जुड़ी समस्या होने का खतरा भी रहता है। आईआईटी खड़गपुर के शोधकर्ताओं ने खुलासा किया है कि डिस्पोजेबल पेपर कप में डाली गई गर्म चाय या कॉफी मात्र 15 मिनट में कप की अंदरूनी परत से 25,000 माइक्रो प्लास्टिक कण छोड़ देती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, एक व्यक्ति जो दिन में तीन कप चाय पीता है, वह हर दिन लगभग 75,000 सूक्ष्म प्लास्टिक कण निगल रहा है। जो न केवल शरीर के लिए हानिकारक हैं, बल्कि कैंसर, हार्मोनल और नर्वस सिस्टम से जुड़ी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं।

इस रिसर्च के सामने आने के बाद भोपाल के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने भी नागरिकों से अपील की है कि वे मिट्टी (कुल्हड़), स्टील या कांच के कप का इस्तेमाल करें और अपनी सेहत को इन ‘साइलेंट टॉक्सिन्स’ से बचाएं।

हाइड्रोफोबिक फिल्म है हानिकारक- 

आईआईटी खड़गपुर के सिविल इंजीनियरिंग विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सुधा गोयल और उनके शोध सहयोगी वेद प्रकाश रंजन और अनुजा जोसेफ द्वारा किए गए इस अध्ययन में यह साबित किया गया कि पेपर कप की भीतरी परत में इस्तेमाल होने वाली पतली हाइड्रोफोबिक फिल्म, जो तरल को कप में रोकने के लिए लगाई जाती है।

गर्म तरल के संपर्क में आते ही टूटने लगती है। यह फिल्म पॉलीइथिलीन या अन्य को-पॉलिमर से बनी होती है और जब इसमें गर्म पानी (85–90°C) डाला जाता है, तो 15 मिनट के भीतर यह सूक्ष्म कणों में बदलकर पेय पदार्थ में घुल जाती है।

गंभीर बीमारी का बनते हैं कारण

रिसर्च के अनुसार, हर 100 मिलीलीटर गर्म तरल में लगभग 25,000 माइक्रो प्लास्टिक कण मिल जाते हैं। ये इतने छोटे होते हैं कि आंखों से दिखाई नहीं देते, लेकिन शरीर में जाकर कोशिकाओं को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

रिसर्च में पाया गया कि ये कण भारी धातुओं जैसे पैलेडियम, क्रोमियम और कैडमियम के वाहक के रूप में काम करते हैं। जब ये शरीर में प्रवेश करते हैं, तो वे अंगों में जमा होकर हार्मोन असंतुलन, न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर और इम्यून सिस्टम की गड़बड़ी जैसी समस्याएं उत्पन्न कर सकते हैं।

पेपर कप बढ़ाता है कैंसर की संभावना

एक्सपर्ट्स के अनुसार, जब कोई व्यक्ति कैंसर से ग्रसित पाया जाता है तो उसका सिर्फ कोई एक कारण नहीं होता है। व्यक्ति के शरीर में मौजूद रोग प्रतिरोधक क्षमता में गिरावट आना, खराब दिनचर्या, शरीर में टाक्सीसिटी का लेवल बढ़ाना, कैंसर कॉजिंग सेल्स की तेज ग्रोथ जैसे कई फैक्टर शामिल होते हैं।

पेपर कप और प्लास्टिक कब से निकलने वाला माइक्रो प्लास्टिक इन्हीं फैक्टर को बढ़ावा देते हैं। जिससे कैंसर होने की संभावना बढ़ जाती है।

भोपाल स्वास्थ्य विभाग ने जारी की चेतावनी आईआईटी खड़गपुर की इस रिपोर्ट के बाद भोपाल के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने नागरिकों से अपील की है कि वे पेपर कप में गर्म पेय पदार्थों का सेवन बंद करें। सीएमएचओ डॉ. मनीष शर्मा ने कहा कि अपने स्वास्थ्य और पर्यावरण की सुरक्षा के लिए घर से अपना कप साथ लाएं। इसके अलावा बाजार में मिट्टी (कुल्हड़), कांच या स्टील के कप का उपयोग करें। प्लास्टिक या पेपर लाइनिंग वाले डिस्पोजेबल कप का उपयोग न करें।



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