ई-रुपी ने 10 लाख डेली ट्रांजैक्शन का आंकड़ा पार किया सके लिए बैंक अकाउंट की जरूरत नहीं

Updated on 01-01-2024 02:46 PM

भारत की सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) ई-रुपी के जरिए एक दिन में ट्रांजैक्शन की संख्या 10 लाख के पार चली गई है। करेंसी ने यह रिकॉर्ड बीते 27 दिसंबर 2023 को बनाया। RBI गवर्नर शक्तिकांत दास ने इस बात की जानकारी दी है।

एक एम्प्लॉई को लिखे लेटर में शक्तिकांत दास ने बताया कि UPI की सक्सेस अब इंटरनेशनल मॉडल बन चुका है। ई-रुपी के मामले में भी हमने बड़ी ग्रोथ की है। RBI ने 1 दिसंबर 2022 को रिटेल यूजर्स के लिए CBDC रिटेल लॉन्च किया था।

जुलाई 2023 में RBI के डिप्टी गवर्नर टी. रबी शंकर ने कहा था कि सेंट्रल बैंक 2023 के आखिर तक 1 मिलियन डिजिटल करेंसी ट्रांजैक्शन के रिकॉर्ड तक पहुंचने का टारगेट रखा है।

क्या है डिजिटल ई-रुपी (e₹)?
सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) को शॉर्ट में ई-रुपी कहा जाता है। यह कागज करेंसी का डिजिटल रूप है, जो क्रिप्टो करेंसी की तरह ब्लॉक-चेन टेक्नोलॉजी पर बेस्ड है। इसकी वैल्यू मौजूदा करेंसी के बराबर ही होती है।

यह 100, 200 या 500 रुपए के नोट की तरह ही सरकार का एक लीगल टेंडर है, जिसे कोई लेने से इनकार नहीं कर सकता है। e₹ को मोबाइल वॉलेट में ही रखा जा सकता है। इसे रखने के लिए बैंक खाते की जरूरत नहीं होती है। ये दो तरह की है- CBDC होलसेल और CBDC रिटेल।

डिजिटल वैलेट में रहेगा CBDC?
e-rupee ट्रांजैक्शन में बैंक अकाउंट की जरूरत नहीं होती है। RBI फिजिकल करेंसी की जगह सीधे डिजिटल वॉलेट में पैसा (e₹) ट्रांसफर करता है। इसका मतलब है कि आप अभी जिस तरह से अपने जेब या लेदर वॉलेट में नोट रखते है, उसकी जगह वॉलेट में e-rupee रखेंगे और ट्रांजैक्शन कर सकेंगे। ये डिजिटल वॉलेट बैंक की ओर से जारी किया जाता है।

यहां यह लेना जरूरी है कि अन्य पेमेंट सिस्टम जैसे Phone-pay, paytm, गूगल-पे में ट्रांजैक्शन के बाद बैंक सेटलमेंट की जरूरत होती है, यानी इन प्लेटफॉर्म पर आपका ट्रांजैक्शन कम से कम एक बैंक से होकर गुजरता है। जबकि e₹ सीधे कैश की तरह QR कोड स्कैन कर के किया जा सकता है।

UPI से कैसे अलग है e-रुपी?
UPI से ट्रांजैक्शन करने के लिए बैंक अकाउंट में पैसा होना जरूरी है। इसके लिए आपको या तो खुद फिजिकल करेंसी को अकाउंट में डिपॉजिट करना होगा या कहीं से अपने बैंक अकाउंट में पैसे ट्रांसफर करवाने होंगे।

इसका मतलब यह है कि किसी न किसी को कम से कम एक बार तो फिजिकल करेंसी अकाउंट में डिपॉजिट करना ही होगा तभी ये ट्रांजैक्शन पॉसिबल हो पाएगा। लेकिन e-rupee में एक बार भी फिजिकल करेंसी को अकाउंट में नहीं डालना पड़ता है।



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