पीएम मोदी की अपील के बाद सरकार ने बैंकों से मांगा गोल्ड लोन का पूरा हिसाब-किताब, क्या है प्लान?

Updated on 09-06-2026 01:40 PM
नई दिल्ली: वित्त वर्ष 2025-26 में सोने का आयात 24% बढ़कर $71.9 अरब के नए रेकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। इसे देखने हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से एक साल तक सोना नहीं खरीदने की अपील की थी। इससे विदेशी मुद्रा बचेगी, चालू खाते का घाटा कम होगा और रुपये पर दबाव कम होगा। सरकार ने हाल में सोने और चांदी पर आयात शुल्क 6% से 15 फीसदी कर दिया था। अब सरकार ने बुलियन बैंकों से गोल्ड मेटल लोन और सोने के बदले लोन के बारे में 2023 से अब तक की सारी जानकारी मांगी है। माना जा रहा है कि सरकार सोने को लेकर आने वाले दिनों में और भी कदम उठा सकती है।

ईटी की एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से यह दावा किया गया है कि फाइनेंस मिनिस्ट्री के तहत आने वाले डिपार्टमेंट ऑफ फाइनेंशियल सर्विसेज ने शुक्रवार शाम बैंकों को भेजे गए एक संदेश में गोल्ड मेटल लोन की वैल्यू और वॉल्यूम, ग्राहकों की संख्या, इंटरनेशनल गोल्ड सप्लायर्स, पोर्टफोलियो साइज़, गिरवी रखे गए सोने (कोलेटरल) की मात्रा और उधार लेने वालों की संख्या के बारे में डेटा मांगा है।

गोल्ड मेटल लोन

एक सीनियर बैंकर ने कहा कि बैंकों को सोमवार तक जानकारी देने को कहा गया था। कुछ मामलों में मंथली आधार पर आंकड़े दिए गए। जून-जुलाई में कारोबार कम रहता है और मई में सोने का इंपोर्ट भी कम हुआ है, इसलिए विकल्पों पर विचार करने का यह अच्छा समय है। एक अन्य सूत्र ने बताया कि मंत्रालय के बैंकों से संपर्क करने से कुछ समय पहले ही आरबीआई ने उनसे चालू वर्ष के लिए गोल्ड मेटल लोन का अनुमान लगाने को कहा था।सोना आयात करने वाले बैंक इंटरनेशनल बैंकों से सोना उधार लेकर जूलर्स को लोन पर देते हैं या फिर कंसाइनमेंट का तरीका अपनाते हैं। इसमें लोकल होलसेल खरीदारों की खास मांगों के आधार पर ग्लोबल बैंकों से सीधे पेमेंट करके सोना मंगाया जाता है। गोल्ड मेटल लोन को साल 1998 में एक्सपोर्टर्स के लिए शुरू किया गया था। बाद में जूलर्स को भी यह सुविधा दी गई। साल 2013 में इसे एक महीने के लिए रोक दिया गया था। बैंक गोल्ड मेटल लोन के एंड यूज पर कड़ी नजर रखते हैं।

कैसे कम होगा आयात?

  • बैंकों और इंडस्ट्री का कहना है कि नियमों में कुछ बदलाव हो सकता है
  • सरकार और आरबीआई गोल्ड प्रोडक्ट्स पर डेटा कलेक्ट कर रहे हैं
  • इंडस्ट्री का सुझाव है कि गोल्ड लोन के लिए रिफाइंड बार यूज कर सकते हैं
  • साथ ही ईटीएफ भी रिफाइंड डोर बार खरीदने पर विचार कर सकते हैं

कैसे कम होगा इम्पोर्ट?

एक सूत्र ने कहा कि भले ही कोई बड़ा फैसला न लिया जाए, लेकिन इंडस्ट्री ने सप्लाई बनाए रखते हुए आयात को कम करने के तरीके सुझाए हैं। एक बुलियन इंडस्ट्री एसोसिएशन ने सुझाव दिया है कि गोल्ड मेटल लोन के लिए नया सोना इंपोर्ट करने के बजाय बैंक रिफाइन किए गए बार का इस्तेमाल गोल्ड मेटल लोन के लिए कर सकते हैं। इंडस्ट्री के एक सूत्र ने कहा कि गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF) इम्पोर्टेड सोना खरीदने के बजाय रिफाइंड बार खरीद सकते हैं। इससे इम्पोर्ट कम होगा।

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