सरकारी बैंकों में विदेशी पैसा! चीन-अमेरिका को टक्कर देने के लिए तगड़ी प्लानिंग कर रही सरकार

Updated on 24-09-2025 03:26 PM
नई दिल्लीसरकार सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में विदेशी निवेश की सीमा बढ़ाने पर विचार कर रही है। इसका मकसद सरकारी बैंकों को मजबूत करना है ताकि ये बैंक आसानी से पैसा जुटा सकें। अभी सरकारी बैंकों में विदेशी निवेश की सीमा 20% है जबकि प्राइवेट बैंकों में यह 74% है। एक सरकारी अधिकारी ने कहा कि सरकार अपनी हिस्सेदारी 51% से कम नहीं करेगी। विदेशी निवेश बढ़ने के बाद भी बैंकों पर सरकार का नियंत्रण बना रहेगा। अंतिम फैसला सरकार के उच्च स्तर पर लिया जाएगा।

सूत्रों के अनुसार यह प्रस्ताव उन कई सुधारों का हिस्सा है जिन पर सरकार विचार कर रही है। खासकर भू-राजनीतिक चिंताओं के बीच सरकार इकॉनमी को बढ़ावा देना चाहती है। वित्तीय सेवा सचिव एम नागराजू ने कुछ समय पहले कहा था कि सरकारी बैंक अब मुश्किल दौर से बाहर आ गए हैं। वे अब विकास में बड़ी भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं। उन्होंने तीसरे PSB मंथन सम्मेलन के बाद कहा, "सरकारी बैंक 2047 तक विकसित भारत की यात्रा में ग्रोथ, इनोवेशन और लीडरशिप के चैंपियन होने चाहिए।
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वोटिंग राइट्स

नागराजू ने सरकारी बैंकों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनने, अपने कामकाज को मजबूत करने और पारंपरिक तथा नए उद्योगों में आगे बढ़ने की बात कही। अभी सरकारी बैंकों में विदेशी निवेश की सीमा 20% और वोटिंग राइट्स 10% है। सरकार यह देख रही है कि कैसे इन नियमों को आसान बनाया जा सकता है। सरकार यह भी सुनिश्चित करना चाहती है कि बैंकों का स्वरूप और उनके बोर्ड के फैसले लेने की क्षमता पर कोई असर न पड़े।
सरकार का मानना है कि पिछले कुछ साल में सरकारी बैंकों ने अच्छा प्रदर्शन किया है। भारत में विकास की अच्छी संभावना है और बुनियादी ढांचे में भी भारी निवेश हो रहा है। इसलिए, सरकारी बैंकों में निवेश करना बहुत आकर्षक है। एक सरकारी बैंक के बड़े अधिकारी ने कहा, "आज सबसे बड़ी समस्या पूंजी की है। अगर हम दुनिया के टॉप बैंकों में शामिल होना चाहते हैं, तो हमें एक मजबूत बैलेंस शीट की जरूरत होगी। ऐसे में अगर सही नियम बनाए जाएं तो विदेशी निवेश एक गेम चेंजर साबित हो सकता है।"

गोल्डन शेयर

उन्होंने यह भी कहा कि सरकार 'गोल्डन शेयर' का तरीका भी अपना सकती है। इसके तहत नियंत्रण सरकार के पास ही रहेगा, चाहे हिस्सेदारी कितनी भी हो। देश के सबसे बड़े बैंक SBI में करीब 10% विदेशी हिस्सेदारी है। सरकारी बैंकों ने अपनी वित्तीय स्थिति में काफी सुधार किया है। मार्च के अंत तक बैंकों का फंसा हुआ कर्ज घटकर 2.58% रह गया है।

मार्च 2021 में यह 9.11% था। इस दौरान बैंकों का मुनाफा बढ़कर 1.78 लाख करोड़ रुपये हो गया है, जो पहले 1.04 लाख करोड़ रुपये था। बैंकों ने डिविडेंड के तौर पर 34,990 करोड़ रुपये बांटे हैं जो पहले 20,964 करोड़ रुपये था। CareEdge Ratings की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत का बैंक क्रेडिट-टू-जीडपी अनुपात अब भी कम है।

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