चाउर नपना से नीली बोतल तक... चूहों से लड़ी जंग, द्वितीय विश्व युद्ध से जुड़ा नाम, जानिए कहानी पैराशूट की

Updated on 07-12-2023 02:10 PM
नई दिल्ली : जब नारियल के तेल (Coconut Oil) की बात होती है तो एक ही कंपनी सबसे पहले याद आती है। वह है पैराशूट। नीले रंग के प्लास्टिक की बोतल में आने वाला यह पैराशूट का नारियल तेल (Parachute Coconut Oil) आपको हर घर में मिल जाएगा। लेकिन पहले इसकी पैकिंग ऐसी नहीं थी। आइए थोड़ा पीछे जाते हैं। आपने देखा होगा कि पहले गांवों से लेकर शहरों तक में चावल नापने के लिए एक टीन के डिब्बे का यूज होता था। बिहार में इसे 'चाउर नपना' भी कहा जाता था। यह पैराशूट के नारियल तेल का ही डिब्बा था। एक दौर था जब गावों में लगभग हर घर में यह डिब्बा दिख जाया करता था। अब आप सोच लीजिए कि उस दौर में पैराशूट के नारियल तेल की कितनी लोकप्रियता रही होगी।

मैरिको कंपनी ने तोड़ा था बड़ा मिथक

केरल में एक लोकप्रिय धारणा थी कि नारियल तेल ब्रांड के नाम में 'केरा' जरूर होना चाहिए। लेकिन महाराष्ट्र बेस्ड मैरिको कंपनी ने इस मिथक को तोड़ दिया। पैराशूट ब्रांड मैरिको कंपनी का ही है। इसके फाउंडर हर्ष मरीवाला हैं। मैरिको इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने देश में नारियल तेल का पहला ब्रांड तैयार किया था। यह इतना लोकप्रिय हुआ कि घर-घर में इस्तेमाल होने लगा। मैरिको दो तरह का नारियल तेल बनाती है। एक पैराशूट एडिबल ग्रेड कम हेयर ऑयल और दूसरा पैराशूट एडवांस्ड हेयर ऑयल। पैराशूट एडिबल ऑयल में 100% नारियल का तेल होता है। जबकि इसके हेयर ऑयल में नारियल के तेल के साथ 50% खनिज तेल (Mineral Oil) भी होता है।

बड़ा सवाल- बालों में लगाने वाला तेल क्या है?

मैरिको उन कैटेगरीज में अपना विस्तार करना चाहती थी जहां मल्टीनेशनल कंपनियां मौजूद नहीं थीं। ऐसे में एक कैटेगरी का नाम सामने आया। यह थी बालों में लगाने वाला हेयर ऑयल की कैटेगरी। हेयर ऑयलिंग केवल सीमित भागों में मौजूद थी। मुख्य रूप से भारत, पड़ोसी देशों और मध्य पूर्व में यह प्रोडक्ट यूज होता था। जब हर्ष ने इस बारे में विश्लेषकों और उन लोगों से बात की जो उनकी कंपनी में निवेश करना चाहते हैं, तो सबसे पहले उन्होंने यही पूछा कि, "बालों में लगाने वाला तेल क्या है?" और फिर उन्होंने बताया कि यह सेक्टर अब खत्म हो रहा है, जो कि उस समय सच था। लोग बालों में तेल लगाना बंद कर रहे थे। इसके बावजूद हर्ष इस बात को लेकर पहले से क्लियर थे कि बालों में तेल लगाने की आदत भारत में खत्म नहीं होगी। लोग कभी भी बालों में तेल लगाना नहीं छोड़ेंगे। यह सच भी साबित हुआ।

चूहों से लड़नी पड़ी लड़ाई


जब कंपनी टीन के डिब्बे से प्लास्टिक की पैकिंग में जा रही थी, तो बताया गया कि नारियल तेल के लिए प्लास्टिक सफल नहीं होगा। ये बात कंपनी के लिए एक तगड़े झटके जैसी थी। मैरिको से करीब 10 साल पहले कोई दूसरी कंपनी नारियल तेल को प्लास्टिक की पैकिंग में लेकर आई थी। उन्होंने नारियल तेल के डिब्बे का आकार चौकोर रखा था। नारियल तेल को प्लास्टिक की बोतल में लाने में चूहे सबसे बड़ी परेशानी साबित हो रहे थे। चूहे प्लास्टिक में नारियल के तेल को देख उसे कुतरने लगते थे। चूहों को प्लास्टिक और नारियल तेल का संयोजन पसंद आ रहा था। ऐसे में जिस भी रिेटेल दुकान में नारियल तेल जाता उसकी बर्बादी पक्की थी। इसके बाद यह तय हुआ कि नारियल तेल को चौकोर डिब्बे की बजाय गोल आकर की बोतल में रखा जाए। गोल आकार के कारण चूहे अपने दांतों की पकड़ नहीं बना सकते थे। इसके बाद पैकिंग इस तरह की गई कि तेल की एक भी बूंद बाहर नहीं टपके।

पैराशूट नाम क्यों पड़ा?

आपके मन में बहुत बार यह खयाल आया होगा कि एक नारियल तेल का नाम पैराशूट क्यों रखा गया। आखिर दोनों के बीच कोई तालमेल ही नहीं है। पैराशूट नाम के पीछे की कहानी द्वितीय विश्व युद्ध (World War II) से जुड़ी है। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान भारतीयों ने पहली बार पैराशूट का यूज किया था। सेना के जवानों द्वारा पैराशूट की सुरक्षित लैंडिंग तब एक बड़ा सरप्राइज था। लोगों ने पैराशूट को सुरक्षा और विश्वसनीयता के साथ जोड़ना शुरू कर दिया था। इसी के चलते मैरिको ने इसे ब्रांडनेम बना लिया।

बोतल पर क्यों नहीं लिखा होता हेयर ऑयल?

पैराशूट नारियल तेल को हम सब बालों में लगाते हैं। लेकिन उसकी बोतल पर हेयर ऑयल क्यों नहीं लिखा होता? इसके पीछे भी एक राज है कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक कंपनी पैकेट पर हेयर ऑयल प्रिंट कर देगी तो उसकी कीमत पर 8% एक्साइज ड्यूटी बढ़ जाएगी। लेकिन भारत में खाद्य तेल (Edible Oil) टैक्स फ्री हैं। पैराशूट कंपनी नारियल तेल की शुद्धता पर फोकस करती है, इसलिए पैक पर 100% शुद्ध लिखती है। कंपनी इसका खाद्य तेल के रूप में उत्पादन करती है।

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