मध्य प्रदेश में गोंद माफिया, पेड़ में इंजेक्शन लगाकर अप्राकृतिक रूप से बढ़ा रहे उत्पादन

Updated on 10-10-2025 11:52 AM
भोपाल। मध्य प्रदेश में गोंद माफिया सक्रिय है। धावड़ा और सलाई के पेड़ों से गोंद निकाला जाता है, लेकिन अधिक लाभ के चक्कर में माफिया दिवासियों को अप्राकृतिक तरीके से इथेफोन रसायन का इंजेक्शन लगाकर गोंद निकाले के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं।रसायनिक इंजेक्शन लगाने से इन पेड़ों को जहां पर्यावरणीय नुकसान हो रहा है, वहीं पेड़ निर्धारित क्षमता से अधिक गोंद उगलते हैं जो सेहत के लिए खासतौर पर प्रसव वाली महिलाओं के लिए नुकसानदायक होता है। इंजेक्शन लगाए जाने से पांच-छह साल में वृक्ष नष्ट होने लगते हैं। बता दें कि गोंद निकालने की प्रक्रिया हर साल नवंबर से जून तक की जाती है।

बुरहानपुर, खंडवा, देवास को मिली थी अनुमति

मध्य प्रदेश के तीन जिलों बुरहानपुर, खंडवा, देवास के जंगलों में पिछले वर्ष पेड़ों से गोंद निकालने की अनुमति दी गई थी। राज्य सरकार ने इन तीन जिलों में पेड़ों से गोंद निकालने पर लगे प्रतिबंध को हटा दिया था। यह प्रतिबंध इस आधार पर हटाया गया था कि गोंद प्राकृतिक तरीके से वृक्ष को नुकसान पहुंचाए बगैर निकाली जा सकेगी।

अन्य जिलों में यह प्रतिबंध यथावत रखा गया है। दरअसल, धार जिले की मनावर सीट से कांग्रेस विधायक हीरालाल अलावा ने राज्य शासन को पत्र लिखकर यह मामला उठाया था। जिसके बाद वन विभाग ने इन तीनों वनमंडलों में गोंद निकालने पर लगा प्रतिबंध हटा दिया था।

औषधीय गुणों के कारण अधिक मांग

वनों में गोंद सलई, गुग्गल, धावड़ा, कुल्लू, पलाश, खैर, बबूल एवं साजा आदि वृक्षों से मिलता है। इनमें सलई गोंद का उपयोग औषधीय रूप से पूजन व हवन सामग्री, पेंट तथा वार्निश निर्माण में किया जाता है तथा इसकी मांग पेपर, टेक्सटाइल, खाद्य उद्योग, फार्मास्युटिकल, पेट्रोलियम तथा अगरबत्ती उद्योग आदि में भी है। इससे सुगंधित तेल भी बनता है।

जहां इसका निर्यात होता है वहीं इसकी महत्ता को देखते हुए इसकी तस्करी भी होती है। मप्र में सलई के वृक्ष खंडवा, देवास, बुरहानपुर, शिवपुरी, श्योपुर, ग्वालियर, टीकमगढ़, बड़वानी, झाबुआ, सतना, अशोकनगर, गुना, मंडला एवं डिंडौरी में भी पाए जाते हैं।

यह है इथेफोन

इथेफोन एक ऐसा रसायन है जिसका उपयोग फल पकाने, जल्दी फूल आने, फलों को गिरने से रोकने और पत्तियों को गिराने, लेटेक्स (रबर) के उत्पादन को बढ़ाने और पौधों की वृद्धि को धीमा करने में किया जाता है। इसका उपयोग तंबाकू, टमाटर, केले, कपास और रबर जैसे विभिन्न फसलों में किया जाता है। इसी रसायन का उपयोग पेड़ों से शीघ्र और अधिक मात्रा में अप्राकृतिक रूप से गोंद निकालने के लिए भी किया जाता है।



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