नौकरी थी पायलटों को ट्रेनिंग देने की, कर रहा था कुछ और, एयर इंडिया ने ऐसा कर होश उड़ा दिया

Updated on 06-03-2025 05:57 PM
नई दिल्ली: आपने ऐसा कई दफ्तरों में देखा होगा। जिसका जो काम होता है, वह उस काम को छोड़ कर बांकी सब काम करते हैं। ऐसा ही कुछ एयर इंडिया (Air India Pilot) के पायलट ट्रेनिंग स्कूल (Pilot Training School) में भी चल रहा था। एक सिम्युलेटर ट्रेनर पायलट अपना काम सही से नहीं कर रहा था। इसकी भनक प्रबंधन को मिल गई। फिर क्या था, एयर इंडिया ने उस सिम्युलेटर ट्रेनर पायलट को नौकरी से निकाल दिया।

व्हिसलब्लोअर ने की शिकायत


एयर इंडिया को एक व्हिसलब्लोअर ने शिकायत की थी कि ट्रेनर ने पायलट ट्रेनिंग के दौरान अपना काम सही से नहीं किया। कंपनी ने हमारे सहयोगी ईटी को बुधवार को बताया कि जांच के बाद आरोप सही पाए गए। सावधानी के तौर पर, उस प्रशिक्षक के तहत प्रशिक्षण लेने वाले 10 पायलटों को अस्थायी रूप से उड़ान भरने से रोक दिया गया है। टाटा के स्वामित्व वाली एयरलाइन ने उच्च नैतिक मानकों और पारदर्शिता बनाए रखने की अपनी प्रतिबद्धता के तहत, इस मामले की स्वेच्छा से DGCA को भी सूचना दी है। DGCA यानी डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन, भारत में विमानन क्षेत्र की देखरेख करने वाली संस्था है।

क्या कहा एयरलाइन ने


एयरलाइन ने कहा, "एक विस्तृत जांच की गई और सबूतों की समीक्षा के बाद, आरोप की पुष्टि हुई। इसलिए, उक्त ट्रेनर पायलट की सेवाएं समाप्त की जा रही हैं। सावधानी के तौर पर, ट्रेनर पायलट के तहत आवर्ती प्रशिक्षण recurrent training लेने वाले 10 पायलटों को आगे की जांच लंबित रहने तक फ्लाइंग ड्यूटी से हटा दिया गया है।" एयरलाइन ने व्हिसलब्लोअर की सराहना की। उसने संगठन के भीतर नैतिक प्रथाओं को बनाए रखने में मदद करने वाले व्यक्तियों के महत्व को पहचाना। व्हिसलब्लोअर यानी वो व्यक्ति जो किसी गलत काम की जानकारी अधिकारियों को देता है।

टाटा ग्रुप का कुछ अलग है मानक


यह मामला टाटा समूह के नैतिक मानकों के प्रति एयरलाइन की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। ये मानक कंपनी के निजीकरण के बाद लागू किए गए थे। टाटा कोड ऑफ कंडक्ट, अधिग्रहण के बाद पेश किया गया था। यह स्पष्ट व्यवहारिक अपेक्षाएं निर्धारित करता है और सांस्कृतिक परिवर्तन को बढ़ावा देता है। इसमें कर्मचारियों के लिए रिश्वतखोरी विरोधी, भ्रष्टाचार विरोधी और व्हिसलब्लोइंग नीतियों पर व्यापक प्रशिक्षण शामिल है। यह पूरी कंपनी में ईमानदारी और नैतिक आचरण के महत्व को पुख्ता करता है।

पिछले साल 30 से भी ज्यादा कर्मचारियों पर गिरी थी गाज


इस प्रणाली के कारण साल 2024 में ही नैतिक उल्लंघन के लिए 30 से अधिक कर्मचारियों को नौकरी से निकाला जा चुका है, जबकि अन्य को अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ा है। यह दर्शाता है कि एयर इंडिया नैतिकता को कितनी गंभीरता से लेता है। यह यात्रियों के लिए एक सुरक्षित और विश्वसनीय एयरलाइन बनाने में मदद करता है।

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