कॉमनवेल्थ देशों में ब्रिटिश राजशाही कैसे गिन रही आखिरी सांसें, किंग चार्ल्स की ताजपोशी का क्या होगा असर?

Updated on 06-05-2023 07:20 PM
लंदन: महारानी एलिजाबेथ द्वितीय के निधन के बाद किंग चार्ल्स तृतीय अब आधिकारिक रूप से ब्रिटेन के सम्राट बनने जा रहे हैं। मंगलवार, 6 मई को लंदन के ऐतिहासिक वेस्टमिनिस्टर ऐबे में किंग चार्ल्स का राज्याभिषेक किया जाएगा। इस अवसर पर देश और दुनिया के कई गणमान्य हस्ति मौजूद रहेंगे, जिसमें भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ भी शामिल हैं। किंग चार्ल्स न सिर्फ ब्रिटेन के महाराजा बनेंगे बल्कि उन्हें 14 अन्य राष्ट्रमंडल देशों का सम्राट भी घोषित किया जाएगा। इसी के साथ उन्हें ब्रिटिश राजपरिवार की शाही शक्ति का प्रतीक ओर्ब, राजदंड और राज्याभिषेक की अंगूठी मिलेगी। उनका राज्याभिषेक यरूशलेम में विशेष रूप से पवित्र किए गए तेल से किया जाएगा। इस अवसर पर 15 देशों के प्रतिनिधियों को ब्रिटिश सम्राट के प्रति वफादारी की शपथ लेने के लिए आमंत्रित किया गया है।

70 साल में ब्रिटेन में पहला राज्याभिषेक


ब्रिटिश महारानी एलिजाबेथ द्वितीय का राज्याभिषेक 70 साल पहले किया गया था। तब से लेकर अब तक बहुत कुछ बदल गया है। राजशाही अब लोगों को रास नहीं आ रही है। यही कारण है कि लोग नए राजा के प्रति निष्ठा रखने में हिचक रहे हैं। किंग चार्ल्स के राज्याभिषेक को लेकर ब्रिटेन में जबरदस्त तैयारियां की गई है। लेकिन, सवाल यह है कि ब्रिटेन के अलावा बाकी के 14 देश किंग चार्ल्स तृतीय को अपने देश के प्रमुख के तौर पर चाहते हैं या नहीं? इन देशों में अक्सर ब्रिटिश राजपरिवार को लेकर विरोध प्रदर्शन होते रहे हैं। ये वो देश हैं, जो कभी न कभी ब्रिटेन के गुलाम रहे हैं और इसी ब्रिटिश राजपरिवार ने वहां के आम लोगों पर न सिर्फ अत्याचार किए बल्कि वहां की संपत्ति को भी लूटा।

ब्रिटिश शाही परिवार के वफादार देश कौन से हैं


वर्तमान में ब्रिटेन के अलावा किंग चार्ल्स तृतीय को 14 देशों में राष्ट्र प्रमुख के तौर पर मान्यता प्राप्त हैं। इनमें एंटीगुआ और बारबुडा, ऑस्ट्रेलिया, बहामास, बेलीज, कनाडा, ग्रेनाडा, जमैका, न्यूजीलैंड, पापुआ न्यू गिनी, सेंट किट्स और नेविस, सेंट लूसिया, सेंट विंसेंट और ग्रेनेडाइंस, सोलोमन द्वीप और तुवालु शामिल हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि महारानी एलिजाबेथ द्वितीय के 70 साल के शासन में 17 देशों ने ब्रिटिश राजशाही को छोड़ दिया। इसमें सबसे नया देश बारबाडोस है, जिसने 2021 में ब्रिटिश राजशाही से अपना नाता तोड़ा है।

'Not My King' बोल किंग चार्ल्स का हो रहा विरोध

चार्ल्स के राज्याभिषेक की खुशी में न्यूजीलैंड जैसे देश हजारों पेड़ लगा रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया इस खुशी में लुप्तप्राय वेस्टर्न ग्राउंड पैरट की रक्षा के लिए दान दे रहा है। लेकिन, कुछ ऐसे भी हैं जो राजशाही को खत्म करना चाहते हैं। यूके की कंजर्वेटिव पार्टी के पूर्व अध्यक्ष लॉर्ड एशक्रॉफ्ट के एक हालिया सर्वेक्षण से पता चलता है कि ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, जमैका, बहामास, सोलोमन द्वीप और एंटीगुआ और बारबुडा सभी अपने संवैधानिक राजतंत्र को खत्म करने के विचार का समर्थन कर रहे हैं। सबसे अधिक विरोध सोलोमन द्वीप समूह पर देखने को मिला है, जहां हाल के एक सर्वेक्षण के अनुसार, 59 प्रतिशत का कहना है कि वे राजशाही को समाप्त कर देंगे। कुछ शाही पर्यवेक्षकों का मानना है कि जमैका अगला देश हो सकता है जो चार्ल्स को उनके राज्य प्रमुख के रूप में छोड़ देगा। कैरेबियाई राष्ट्र ने ब्रिटिश सम्राट को राज्य के प्रमुख के रूप में हटाने के बारे में वर्षों से बात की है।

जमैका में ब्रिटिश राजपरिवार को छोड़ने की आवाजें पिछले साल विलियम और केट की यात्रा के दौरान काफी सुनी गई थी। जमैका के प्रधानमंत्री एंड्रयू होल्नेस ने शाही मेहमानों के साथ एक मुलाकात के दौरान कहा था: "हम एक स्वतंत्र, विकसित, समृद्ध देश के रूप में आगे बढ़ रहे हैं। संक्षेप में, अपने विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने और अपनी सच्ची महत्वाकांक्षाओं और नियति को पूरा करने का इरादा रखते हैं।" उन्होंने कहा था कि उनका देश 2025 के आम चुनाव से पहले गणतंत्र में परिवर्तित हो जाएगा। सितंबर में ब्रिटिश महारानी की मृत्यु के बाद से जमैका ने राज्य के प्रमुख के रूप में ब्रिटिश सम्राट को हटाने की अपनी योजना पर विचार करना शुरू कर दिया है। मार्च में, जमैका के प्रधानमंत्री ने नई संवैधानिक सुधार समिति के 14 सदस्यों की घोषणा की, जो देश के गणतंत्र में परिवर्तन के लिए जिम्मेदार होंगे।

बेलीज भी ब्रिटिश शासन से बाहर आने को तैयार


जमैका के पड़ोसी देश बेलीज में भी ऐसी ही भावनाएं पनप रही हैं। बेली एक पूर्व ब्रिटिश उपनिवेश रह चुका है। यहां की जनता भी ब्रिटिश राजशाही से दूर जाना चाहती है। बेलीज के प्रधानमंत्री जॉन ब्रिसेनो ने द गार्जियन अखबार को बताया था कि काफी संभावना है कि उनका देश गणतंत्र बनने वाला अगला राष्ट्रमंडल क्षेत्र होगा। उन्होंने कहा कि चार्ल्स के राज्याभिषेक ने उनके सहयोगियों के बीच कोई उत्साह नहीं पैदा किया है। बेलीज देश ने पिछले साल गणतंत्र बनने के तरीकों पर गौर करने के लिए एक संवैधानिक आयोग बनाने का कानून पारित किया। ब्रिसेनो ने कहा कि वह अपनी सिफारिशें, अगले साल, एक जनमत संग्रह के लिए रखेंगे, लेकिन संसद के माध्यम से देश की राजशाही को संभावित रूप से समाप्त करने से इंकार नहीं किया।

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