कैसे बनेगा भारत आत्मनिर्भर बढ़ गया इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों का इंपोर्ट बिल

Updated on 09-12-2025 01:37 PM
नई दिल्ली: आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत सरकार देश में इलेक्ट्रॉनिक आइटम्स की मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा दे रही है। इसका नतीजा यह हुआ कि फाइनेंशियल ईयर 2024 में पहली बार इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स और प्रोडक्ट्स के आयात में कमी आई थी। लेकिन फाइनेंशियल ईयर 2025 में मामला बदल गया। ऐपल, सैमसंग, एलजी, हायर, लेनोवो, व्हर्लपूल और मोटोरोला जैसी करीब एक दर्जन इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों ने वित्त वर्ष 2025 में करीब 1.21 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के कंपोनेंट्स और प्रोडक्ट्स का आयात किया। यह 2024 की तुलना में 13% से ज्यादा की बढ़ोतरी है।

ईटी की एक रिपोर्ट के मुताबिक यह जानकारी इन कंपनियों की ताजा रेगुलेटरी फाइलिंग से सामने आई है। इंडस्ट्री के जानकारों का कहना है कि यह उछाल महंगे पार्ट्स के ज्यादा आयात और कमजोर रुपये की वजह से आया है। हालांकि, सरकार के 'मेक इन इंडिया' अभियान के बावजूद, 2018-19 से ज्यादातर कंपनियों के लिए आयात की वैल्यू कम नहीं हुई है। यह बात भी फाइलिंग से पता चली है। केवल वित्त वर्ष 2024 में इन कंपनियों का कुल आयात बिल 6% कम हुआ था।

इंपोर्ट बिल

एक बड़ी इलेक्ट्रॉनिक्स मल्टीनेशनल कंपनी की भारतीय यूनिट के सीईओ ने बताया कि मेक इन इंडिया इनिशिएटिव्स मुख्य रूप से तैयार माल के आयात को हतोत्साहित करने के लिए थीं और इसमें सफलता मिली है। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट PLI और व्हाइट गुड्स PLI स्कीमें ज्यादातर कंपोनेंट्स पर ध्यान केंद्रित करती हैं। जब ये स्कीमें ठीक से काम करने लगेंगी, तो इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री का इंपोर्ट बिल कम हो जाएगा।पिछले पांच साल में कुछ कंपनियों के लिए उनके रेवेन्यू के मुकाबले आयात का प्रतिशत कम हुआ है। खासकर उन कंपनियों के लिए जिन्होंने अपने तैयार माल का ज्यादातर प्रोडक्शन भारत में ही शुरू कर दिया है। इनमें ऐपल भी शामिल है, जिसने आईफोन का प्रोडक्शन भारत में शिफ्ट कर दिया है। इसी तरह सैमसंग ने भी टीवी का प्रोडक्शन भारत में शुरू किया है। ऐपल इंडिया का वित्त वर्ष 2025 में बिक्री के मुकाबले आयात का प्रतिशत घटकर 23% रह गया, जो वित्त वर्ष 2024 में 25% और वित्त वर्ष 2021 में 60% था। सैमसंग इंडिया के लिए यह पिछले वित्तीय वर्ष में 60% था जो वित्त वर्ष 2021 में 67% था।

घरेलू कंपनियों का हाल

घरेलू कंपनियों की बात करें तो ब्लू स्टार में बिक्री के मुकाबले आयात 25% से घटकर 16% रह गया है। वहीं, हैवेल्स के लिए यह 17% से घटकर 13% रह गया है। लेकिन एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स और लेनोवो जैसी कंपनियों की भारतीय यूनिट्स के लिए बिक्री के मुकाबले आयात के मूल्य में कोई कमी नहीं आई है। वोल्टास के लिए यह आंकड़ा वित्त वर्ष 2021 में 9% से बढ़कर वित्त वर्ष 2025 में 15% हो गया।
एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया के चीफ सेल्स ऑफिसर संजय चितकारा ने बताया कि कंपनी का लोकलाइजेशन रेट फिलहाल करीब 56% है। पिछले तीन वित्त वर्षों में यह हर साल 2-3% बढ़ा है। कंपनी इसे बढ़ाकर 70% करने का लक्ष्य रखती है। कंपनी वित्त वर्ष 2023 से स्थानीय स्तर पर एसी कंप्रेसर का उत्पादन कर रही है। इसके अलावा, प्रीमियम प्रोडक्ट्स जैसे OLED टीवी और साइड-बाय-साइड रेफ्रिजरेटर पहले दक्षिण कोरिया से आयात किए जाते थे और अब भारत में ही बन रहे हैं।

कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरर्स

एक दर्जन कंपनियों का कुल आयात मूल्य वित्त वर्ष 2022 से बढ़कर 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया था। वित्त वर्ष 2024 में यह वित्त वर्ष 2023 के 1.14 लाख करोड़ रुपये से घटकर 1.07 लाख करोड़ रुपये रह गया था। डिक्सन टेक्नोलॉजीज और एम्बर एंटरप्राइजेज जैसे कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरर्स ने अपने इंपोर्ट बिल में कमी दर्ज की है। डिक्सन के लिए पिछले वित्त वर्ष में यह बिक्री का 6% रह गया जो वित्त वर्ष 2021 में 59% था। वहीं, एम्बर के लिए इसी अवधि में यह 22% से घटकर 17% रह गया।

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