कैसे बनेगा आत्मनिर्भर भारत? छाते और चश्मे भी नहीं बना पा रहे हम, चीन से आ रहा है ज्यादातर माल

Updated on 29-12-2025 12:52 PM
नई दिल्ली: आयात पर निर्भरता कम करने के लिए सरकार इस बार बजट में बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। ईटी की एक खबर के मुताबिक सरकार कुछ खास सामान के आयात पर कस्टम ड्यूटी बढ़ाने और स्थानीय स्तर पर उत्पादन बढ़ाने के लिए इंसेंटिव देने पर विचार कर रही है। इसका मकसद देश का व्यापार घाटा कम करना और आयात पर निर्भरता कम करना है। यह नई योजना आने वाले बजट में लागू हो सकती है। एक अधिकारी ने बताया कि कुछ ऐसी चीजें हैं जिनके लिए हम दूसरे देशों पर बहुत ज्यादा निर्भर हैं। सरकार इस निर्भरता को कम करना चाहती है।

अधिकारी ने कहा कि कुछ खास सामान के घरेलू उत्पादन को बढ़ाने के लिए सरकार आर्थिक मदद दे सकती है जबकि कुछ पर आयात शुल्क बढ़ाया जा सकता है। सरकार ने करीब 100 ऐसे सामानों की लिस्ट बनाई है जिन पर इंसेंटिव दिया जा सकता है। इनमें इंजीनियरिंग सामान, स्टील के उत्पाद, मशीनें और रोजमर्रा के इस्तेमाल की चीजें जैसे सूटकेस और फ्लोरिंग मटीरियल्स शामिल है। अभी इन चीजों के आयात पर 7.5 फीसदी से 10 फीसदी तक ड्यूटी लगती है।

सरकार की चिंता

अप्रैल से नवंबर 2026 के बीच, भारत ने 292 अरब डॉलर का सामान निर्यात किया जबकि 515.2 अरब डॉलर का सामान आयात किया। देश के बढ़ते व्यापार घाटे ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। उद्योग जगत को भी यह सलाह दी गई है कि वे अपनी सप्लाई चेन में किसी एक देश पर निर्भर न रहें और स्थानीय स्तर पर भी उत्पादन बढ़ाएं। एक अधिकारी ने बताया कि स्थानीय स्तर पर बने कुछ सामान की क्वालिटी उतनी अच्छी नहीं है और उनकी कीमत भी ज्यादा है, जिस वजह से वे आयातित सामानों से मुकाबला नहीं कर पाते।
भारत में चीन कई सामान का सबसे बड़ा सप्लायर है। उदाहरण के लिए, 2025 में भारत ने 20.85 मिलियन डॉलर के छाते आयात किए, जिनमें से 17.7 मिलियन डॉलर के छाते चीन से आए। इसी तरह, 2024-25 में चश्मों और गॉगल्स का आयात लगभग 114 मिलियन डॉलर का हुआ, जिसमें से करीब आधा चीन से आया। हांगकांग के रास्ते भी काफी सामान आता है। इटली तीसरे नंबर पर है। खेती-बाड़ी में काम आने वाले कुछ मशीनों के मामले में तो चीन से आयात 90% है।

चीन से आयात

यह असंतुलन दोनों देशों के बीच व्यापार में भी दिखता है। अप्रैल से नवंबर 2026 के बीच, भारत ने चीन को 12.2 अरब डॉलर का सामान निर्यात किया जबकि चीन से 84.2 अरब डॉलर का सामान आयात किया। इस तरह, चीन के साथ हमारा व्यापार घाटा करीब 72 अरब डॉलर रहा। चीन का एक्सपोर्ट इस साल पहली बार 1 ट्रिलियन डॉलर के पार पहुंच चुका है। पूरी दुनिया के बाजार चीन के सामान से पटे पड़े हैं।

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