गल्फ से पैसा कैसे आएगा? पश्चिम एशिया संघर्ष से बढ़ाई टेंशन, करोड़ों परिवारों की लाइफलाइन पर संकट

Updated on 24-03-2026 02:11 PM
नई दिल्ली: ईरान युद्ध की तपिश अब उन भारतीय घरों तक भी पहुंच सकती है जिनके परिवार के लोग खाड़ी देशों में काम करते हैं और वहां से पैसे भेजते हैं। इस समय ईरान पर इजरायल और अमेरिका के हमले के बाद हालात कुछ बदल सकते हैं। सबसे बड़ा सवाल है कि युद्ध बड़ा और हालात खराब हुए तो गल्फ यानी खाड़ी देशों में काम करने वाले लोग अपने घर पैसे (रेमिटेंस) कैसे भेजेंगे? यह वह पैसा होता है जिसके दम पर उस शख्स का परिवार अपने घर के खर्चे चलाता है। ऐसे में भारत समेत दुनियाभर के करोड़ों परिवारों की लाइफलाइन पर संकट पैदा हो गया है।

रेमिटेंस पर छाए संकट के बादल

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और युद्ध की आशंका ने प्रवासियों द्वारा अपने देश भेजे जाने वाले पैसे (रेमिटेंस) पर संकट के बादल खड़े कर दिए हैं। विश्व बैंक की साल 2021 की एक रिपोर्ट बताती है कि दक्षिण एशिया, दक्षिण-पूर्व एशिया और अफ्रीका के देशों के लिए यह पैसा उनकी अर्थव्यवस्था की रीढ़ की तरह है।

दोगुना हो गया पैसा

विदेश से भारत आने वाला पैसा यानी रेमिटेंस पिछले कुछ सालों में तेजी से बढ़ा है। साल 2010-11 में भारत को भेजी जाने वाली रकम 55.6 अरब डॉलर थी। यह बढ़कर वित्त वर्ष 2023-24 में 118.7 अरब डॉलर तक पहुंच गई है, जो दोगुने से भी अधिक है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 2025 के एक सर्वे के अनुसार साल 2029 तक यह बढ़कर करीब 160 अरब डॉलर तक पहुंच सकती है।

किस देश की बड़ी हिस्सेदारी?

  • आरबीआई की एक रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2023-24 में भारत के लिए रेमिटेंस का सबसे बड़ा सोर्स अमेरिका था। भारत के कुल रेमिटेंस में अमेरिका की हिस्सेदारी 2023-24 में 27.7 फीसदी थी, जो 2020-21 में 23.4 फीसदी थी।
  • खाड़ी सहयोग परिषद (गल्फ कॉर्पोरेशन काउंसिल- जीसीसी) के देशों, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, कुवैत, कतर, ओमान और बहरीन ने मिलकर 2023-24 में भारत को प्राप्त कुल रेमिटेंस में 38% का योगदान दिया।
  • भारत को भेजे जाने वाले रेमिटेंस में अमेरिका के बाद दूसरे नंबर पर यूएई है। कुल रेमिटेंस में यूएई की हिस्सेदारी 2020-21 में 18% से बढ़कर 2023-24 में 19.2% हो गई।

संकट का मुख्य कारण

  • वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट के अनुसार खाड़ी देशों में युद्ध का असर सीधे तौर पर प्रवासियों की कमाई और उनके द्वारा स्वदेश भेजे जाने वाले पैसे पर पड़ने की आशंका है।
  • आंकड़ों के मुताबिक 15 देशों को अकेले पश्चिम एशिया से 133 अरब डॉलर से ज्यादा की राशि भेजी गई थी।
  • दक्षिण एशिया और अफ्रीका के लाखों लोग खाड़ी देशों में कंस्ट्रक्शन, सर्विस और अन्य सेक्टर में काम करते हैं।

क्यों बढ़ रहा है खतरा?

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष, तेल संकट और आर्थिक अनिश्चितता के कारण वहां काम कर रहे प्रवासी मजदूरों की नौकरियों और आय पर असर पड़ सकता है। इसका सीधा असर उनके द्वारा भेजे जाने वाले पैसों यानी रेमिटेंस पर पड़ेगा।

अन्य महत्वपुर्ण खबरें

 08 September 2026
नई दिल्ली: मध्य पूर्व में जारी तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमत, बिकवाली समेत अन्य वजहों से घरेलू शेयर बाजार में भारी गिरावट देखी जा रही है। आज मंगलवार को…
 08 September 2026
नई दिल्ली: भारत में घरेलू कोयले से गैस और औद्योगिक ईंधन बनाने की योजना को लेकर कंपनियों की दिलचस्पी सामने आई है। केंद्र सरकार की कोयला गैसीकरण योजना के पहले…
 08 September 2026
नई दिल्ली: भारत की पहली स्वदेशी बुलेट ट्रेन का ट्रायल कब होगा, इसकी जानकारी केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंगलवार को दी। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि…
 08 September 2026
नई दिल्ली: भारत और बांग्लादेश के बीच बंद पड़ी यात्री ट्रेन सेवाओं को फिर से शुरू करने की दिशा में बातचीत शुरू हो गई है। दोनों देशों के रेलवे अधिकारियों…
 05 September 2026
नई दिल्ली: ईरान युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमत में काफी तेजी आई थी और यह 120 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया था। शुक्रवार को इंटरनेशनल बेंचमार्क…
 05 September 2026
नई दिल्ली: एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन और जी के फाउंडर सुभाष चंद्रा की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। सीबीआई ने चंद्रा और अन्य लोगों के खिलाफ…
 05 September 2026
नई दिल्ली: आपने कई बार देखा होगा कि जरूरत पड़ने पर जब किसी बीमा कंपनी से इंश्योरेंस क्लेम (बीमा दावा) किया जाता है तो वह कई बार रिजेक्ट भी हो…
 05 September 2026
नई दिल्‍ली: एग्रीकल्चर एनालिस्ट देविंदर शर्मा ने भारत की कृषि नीति पर नए सिरे से विचार करने की मांग की है। उनका तर्क है कि इथेनॉल, फर्टिलाइजर प्रोडक्शन और ट्रेड…
 31 August 2026
नई दिल्ली: देश में करोड़ों की संख्या में लोग क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल कर रहे हैं। अब फेस्टिव सीजन की शुरुआत भी हो रही है। इसको देखते हुए क्रेडिट कार्ड…
Advt.