इनकम टैक्स में छूट, लेबर कोड, सुधारों के नाम रहा 2025, नए साल में बढ़ेगी रफ्तार

Updated on 26-12-2025 01:34 PM
नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने साल 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए इस साल एक के बाद एक कई ऐसे कदम उठाए, जिनके दूरगामी असर दिखेंगे। बजट में इनकम टैक्स में राहत की घोषणा के बाद GST 2.0 के रूप में एक बड़ा टैक्स सुधार किया गया, वहीं लेबर कोड के जरिए विशाल वर्कफोर्स को संगठित क्षेत्र में लाने की राह बनाई गई। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस पर फोकस के साथ औद्योगिक क्षेत्र की राह भी आसान की गई। विशेषज्ञों का कहना है कि तेज ग्रोथ बनाए रखने के लिए नए साल में कुछ और आर्थिक सुधारों की जरूरत है।

अमेरिकी टैरिफ से प्रभावित रहे साल में केंद्र ने आम बजट में 12 लाख रुपये सालाना आमदनी पर इनकम टैक्स छूट के साथ कंजम्पशन बूस्ट का बड़ा कदम उठाया। इसके बाद 15 अगस्त को पीएम नरेंद्र मोदी ने GST 2.0 रिफॉर्म्स का ऐलान किया और सितंबर में GST की घटी दरें लागू की गई। केवल 5% और 18% के रेट्स रखने का असर 6 लाख करोड़ रुपये से अधिक की दिवाली सेल्स के रूप में दिखा। इन सुधारों ने GST रजिस्ट्रेशन में लगने वाला समय भी घटा।

टैक्स पर नई राह

इनकम टैक्स एक्ट 1961 की जगह नए और सरल आयकर कानून 2025 की राह भी बनाई गई, जो अगले साल अप्रैल से लागू होगा। वही, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कस्टम्स से जुड़े नियमों को सरल बनाने का एजेंडा भी सामने रख दिया है, जिस पर अगले साल कदम बढ़ाए जा सकते हैं।

सोशल सिक्योरिटी बेनेफिट

वही, 29 श्रम कानूनों की जगह लेने वाले 4 लेबर कोड से डिलीवरी बॉय से लेकर कैब ड्राइवर तक को PF, ESIC और इंश्योरेंस सहित दूसरे सोशल सिक्योरिटी बेनेफिट की व्यवस्था की गई है। नैशनल लेवल पर मिनिमम वेजेज तय किए जाने से कम आमदनी वाले करीब 18 करोड़ कामगारों को फायदा हो सकता है। एक सरकारी अधिकारी ने कहा, 'इन सुधारों से मैनपावर और प्रोडक्शन शटडाउन से जुड़े खर्च घटने से करीब 5000 करोड़ रुपये की बचत हो सकती है।'

मैन्युफैक्चरिंग आसान

केंद्र सरकार ने मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स लगाने के लिए पर्यावरण से जुड़े नियमों में भी ढील दी और 33% ग्रीन कवर के नियम के बजाय इंडस्ट्री से हो सकने वाले प्रदूषण पर आधारित व्यवस्था बनाई। इंडस्ट्री से जुड़े एक्सपर्ट का कहना है कि इससे प्रोजेक्ट कॉस्ट 20% घट सकती है।

निवेशकों की सुरक्षा पर जोर

BSE स्टॉक मार्केट्स के मोर्चे पर केंद्र ने सिक्योरिटीज मार्केट कोड बिल संसद में पेश कर दिया, जिसे और चर्चा के लिए स्थायी समिति के पास भेजा गया है। इस बिल में नियमों के पालन का बोझ घटाने और शेयर बाजार में टेक्नॉलजी का उपयोग बढ़ाते हुए निवेशकों की सुरक्षा पर जोर है।

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