चिप के चक्कर में बर्बाद हो जाएगा भारत... RBI के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन में क्यों कहा ऐसा

Updated on 31-03-2024 01:14 PM
नई दिल्ली: भारत सेमीकंडक्टर चिप्स की मैन्यूफैक्चरिंग में बड़ा दांव खेलने जा रहा है। देश में चार सेमीकंडक्टर यूनिट बनाने का काम शुरू हो चुका है। इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग के मंत्री अश्विनी वैष्णव का दावा है कि अगले पांच साल में भारत सेमीकंडक्टर चिप बनाने वाले दुनिया के टॉप 5 देशों की लिस्ट में शामिल होगा। लेकिन आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन का कहना है कि भारत को सेमीकंडक्टर चिप बनाने की रेस में शामिल नहीं होना चाहिए। ऐसा करके वह बर्बाद हो जाएगा। उन्होंने कहा कि भारत के लिए सेमीकंडक्टर चिप बनाने से भी जरूरी कई काम हैं। उसके इस हाई-प्रोफाइल प्रोजेक्ट पर फोकस करने के बजाय अपने एजुकेशन सिस्टम को दुरुस्त करना चाहिए।

University of Chicago के Booth School of Business में फाइनेंस के प्रोफेसर रघुराम राजन ने एक नोट में कहा कि भारत सरकार हायर एजुकेशन के सालाना बजट से ज्यादा पैसा चिप मैन्यूफैक्चरिंग के लिए सब्सिडी के रूप में दे रही है। यह अच्छी बात नहीं है। निश्चित रूप से यह विकसित देश बनने का रास्ता नहीं है। मोदी सरकार की नीतियों के धुर विरोधी रहे राजन ने साफ किया कि उनकी बात का यह मतलब नहीं है कि भारत को कभी भी सेमीकंडक्टर चिप नहीं बनाना चाहिए। लेकिन आज हर देश यही कर रहा है। इस रेस में पड़ने का मतलब खुद को बर्बाद करना है। भारत ने पिछले महीने तीन सेमीकंडक्टर प्लांट को मंजूरी दी थी। इन पर कुल 1.26 लाख करोड़ रुपये का निवेश होगा जिसमें सरकार की तरफ से 48,000 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी जाएगी।

चिप से ज्यादा जरूरी काम

राजन ने अपने नोट में कहा कि वास्तव में चिप सब्सिडी कैपिटल सब्सिडी है। इसका मतलब यह है कि इसका फ्रंट से भुगतान किया जाएगा, यह प्रॉडक्शन पर आधारित नहीं है। सरकार दावा कर रही है कि जल्दी ही चिप्स का प्रॉडक्शन शुरू हो जाएगा। अगर यह दावा सही है तो कैपिटल सब्सिडी जल्दी हो देनी होगी। लेकिन कोई नौसिखिया ही इस पर यकीन करेगा कि सब्सिडी यहीं खत्म हो जाएगी। अगर सब सही रहा तो हमें 28 एनएम चिप्स मिलेगी। आज मॉडर्न सेल फोन पर तीन एनएम की चिप लगती है। अगर हमें फ्रंटियर में ग्लोबल चिप मैन्यूफैक्चरर बनना है तो हमें उस स्तर तक पहुंचने के लिए कुछ फैक्ट्रीज को सब्सिडी देनी होगी। इसकी वजह यह है कि आधुनिक चिप बनाने में ज्यादा मॉडर्न मैन्यूफैक्चरिंग टैक्नोलॉजी यूज होती है जो ज्यादा महंगी होगी।

आरबीआई के पूर्व गवर्नर ने कहा कि भारत के लिए चिप मैन्यूफैक्चरिंग से भी जरूरी कई काम हैं। जैसे कॉलेजों में स्पेक्ट्रोमीटर लगाना ताकि साइंस के बेहतर छात्र पैदा कर सके। यह साफ नहीं है कि सरकार कैसे तय करती है कि किस इंडस्ट्री, सेक्यर या कंपनी को सब्सिडी चाहिए। चिप मैन्यूफैक्चरिंग में ज्यादा लेबर की जरूरत नहीं है जबकि इस समय रोजगार हमारी सबसे बड़ी चुनौती हैं। राजन ने कहा कि यह कहना गलत है कि भारत को चिप सेगमेंट में भागीदारी के लिए पूरी सप्लाई चेन की जरूरत है। आईटी मिनिस्टर ने खुद यह बात स्वीकार की है कि भारत के पास 300,000 चिप डिजाइनर हैं जबकि भारत चिप नहीं बना रहा है। Nvidia और Qualcomm चिप नहीं बनाते हैं और न ही Apple ऐसा करती है। वे इसका डिजाइन बनाती हैं और इन्हें ताइवान में बनाया जाता है। हॉलैंड की कंपनी ASML चिप बनाने वाली मशीन बनाती है। इसलिए मुझे लगता है कि चिप सब्सिडी की नीति बनाने में सरकार ने ज्यादा सोचविचार नहीं किया।

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