रेयर अर्थ मैग्नेट के मामले में भी भारत होगा आत्मनिर्भर, सरकार की योजना जान लीजिए

Updated on 12-09-2025 02:29 PM
नई दिल्लीरेयर अर्थ मैग्नेट, जिसे दुर्लभ-पृथ्वी चुंबक ( Rare Earth Magnets ) भी कहते हैं। इसके लिए चीन पर निर्भरता कम करने की भारत तैयारी कर रहा है। केंद्रीय भारी उद्योग और इस्पात मंत्री एच डी कुमारस्वामी ने आज कहा कि सरकार इसे यहीं बनाने को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय प्रोत्साहन देने की योजना बना रही है।

मिलेगी वित्तीय मदद

कुमारस्वामी ने यहां ऑटोमोटिव कंपोनेंट म

भारत की भागीादारी बढ़ेगी

कुमारस्वामी ने कहा, "हम एक ऐसी योजना पर काम कर रहे हैं जिसका उद्देश्य उद्योग की पूंजीगत व्यय और परिचालन व्यय दोनों जरूरतों के लिए लक्षित समर्थन के माध्यम से वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में भारत की भागीदारी को बढ़ाना है। इससे लागत के अंतर को पाटने, प्रमुख उपकरणों पर टैरिफ राहत देने और बढ़ते वैश्विक प्रतिबंधों के सामने आपूर्ति की निरंतरता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।" कुमारस्वामी ने ACMA के वार्षिक सत्र में एक वीडियो संदेश में कहा, "Rare Earth Magnets EV मोटर्स के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं, लेकिन वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर ज्यादातर चीन का नियंत्रण है। भारत की स्थिति को सुरक्षित रखने और लचीलापन बनाने के लिए, हम घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए प्रोत्साहन तैयार कर रहे हैं।"
न्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ACMA) की वार्षिक बैठक को संबोधित करते हुए कहा, "मंत्रालय महत्वपूर्ण कच्चे माल की कमियों को दूर करने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहा है। हम जानते हैं कि Rare Earth Magnets इलेक्ट्रिव व्हीकल्स या EV मोटर्स के लिए बहुत जरूरी है। अभी इस पर चीन का दबदबा है। इसलिए हम घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए वित्तीय प्रोत्साहन तैयार कर रहे हैं।" इस पहल से महत्वपूर्ण उपकरणों पर लगने वाले ऊंचे टैक्स को कम करने में मदद मिलेगी। साथ ही, लागत के अंतर को भी कम किया जा सकेगा। इससे वैश्विक व्यापार प्रतिबंधों के बीच स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी।

1,345 करोड़ की योजना

सरकार Rare Earth Magnet के उत्पादन को समर्थन देने के लिए 1,345 करोड़ रुपये के कार्यक्रम पर विचार कर रही है। इस कार्यक्रम में दो निर्माताओं को ऐसी प्रोसेसिंग फैसिलिटी स्थापित करने के लिए प्रोत्साहन दिया जाएगा जो Rare Earth Oxide को इस्तेमाल करने योग्य चुंबकों में बदल सकें। अभी, परमाणु ऊर्जा विभाग के तहत काम करने वाले भारतीय दुर्लभ पृथ्वी चुंबक लिमिटेड Indian Rare Earth Magnets Ltd इन संसाधनों का एकमात्र संरक्षक है।

रेयर अर्थ मेग्नेट की पड़ गई है कमी

इस समय चीन ने कुछ महत्वपूर्ण मेटल्स के निर्यात पर कुछ रोक लगाई है। इससे ऑटो और सेमीकंडक्टर उद्योगों में दिक्कतें आई हैं। इसलिए भारत के लिए यह जरूरी हो गया है कि वह अपनी आपूर्ति को स्थानीय स्तर पर ही पूरा करे। Rare Earth Magnets, जैसे कि नियोडिमियम-आयरन-बोरॉन (NdFeB), का इस्तेमाल आधुनिक ऑटोमोटिव सिस्टम में खूब होता है। इनका उपयोग इलेक्ट्रिक वाहन (EV) के मोटर्स से लेकर पावर स्टीयरिंग यूनिट तक में होता है, चाहे वो EV हो या पेट्रोल-डीजल वाली गाड़ियां। सरकार की कोशिश है कि भारत इन Rare Earth Magnets के मामले में आत्मनिर्भर बने और चीन पर उसकी निर्भरता कम हो जाए। इससे भारत का ऑटोमोबाइल उद्योग और अन्य संबंधित उद्योग सुरक्षित रहेंगे।

रेयर अर्थ मैग्नेट क्या होता है

रेयर अर्थ मैग्नेट नियोडिमियम (Neodymium) और सैमरियम (Samarium) जैसी दुर्लभ पृथ्वी धातुओं से बने सबसे शक्तिशाली स्थायी चुम्बक होते हैं। ये छोटे होते हुए भी बहुत शक्तिशाली होते हैं और तापमान में बदलाव होने पर भी स्थिर रहते हैं। इनका उपयोग इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs), विंड टर्बाइन, मिसाइल, स्मार्टफोन, लैपटॉप, स्पीकर, कैमरा, हार्ड डिस्क, एमआरआई मशीन और रेडिएशन थेरेपी से जुड़े उपकरणों में होता है।

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