चीन से निकलने वाली कंपनियों के लिए भारत बनेगा अड्डा, डील के बाद अमेरिका ने कह दी बड़ी

Updated on 11-02-2026 11:56 AM
नई दिल्‍ली: अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि जैमिसन ग्रीर ने बड़ी बात कह दी है। उन्‍होंने कहा है कि चीन से बाहर निकलने वाली अमेरिकी कंपनियों के लिए भारत ऑल्‍टरनेटिव डेस्टिनेशन के तौर पर काम कर सकता है। उन्होंने मंगलवार को फॉक्स न्यूज को दिए एक इंटरव्‍यू में ये बात कही। ग्रीर ने बताया कि भारत पहले ही रूसी ऊर्जा की अपनी खरीद कम कर चुका है। वह अमेरिका के साथ आर्थिक प्रतिबद्धताओं का विस्तार कर रहा है।

जैमिसन ग्रीर ने कहा कि भारत अगले पांच सालों में अमेरिकी ऊर्जा, विमान और प्रौद्योगिकी में 500 अरब डॉलर तक की खरीद के लिए प्रतिबद्ध होगा।अमेरिकी व्‍यापार प्रतिनिधि बोले, 'उन्होंने (भारत) पहले ही रूसी ऊर्जा उत्पादों की अपनी खरीद को कम करना शुरू कर दिया है। इसके बजाय अमेरिकी ऊर्जा और अन्य स्रोतों से ऊर्जा की खरीद को बढ़ाना शुरू कर दिया है।'

रूसी तेल खरीद पर क्‍या बोले ग्रीर?

ग्रीर ने बताया कि 2022 से पहले भारत रूसी तेल की खरीद नहीं करता था। यह रूस-यूक्रेन युद्ध और उसे मिलने वाली छूट का नतीजा था। भारत रूस से तेल खरीदकर उसे रिफाइन करके यूरोप को बेचता था।
ग्रीर ने कहा, 'यूरोप और भारत रूसी एनर्जी लेकर यूक्रेन में रूस के युद्ध को फाइनेंस कर रहे थे। लेकिन, भारत वास्तव में प्रतिबद्ध है। उसने अपनी खरीद के संबंध में कुछ प्रतिबद्धताओं का विस्तार करना शुरू कर दिया है।' उन्होंने यह भी कहा कि भारत पहले ही टैक्‍सेशन और टैरिफ पर कुछ अमेरिकी चिंताओं को दूर कर चुका है।

भारत बन सकता है सप्‍लाई चेन डेस्‍ट‍िनेशन

ग्रीर से यह भी पूछा गया कि क्या अमेरिकी कंपनियां जो चीन पर अपनी निर्भरता कम करना चाहती हैं, उनके लिए भारत एक व्यवहार्य सप्‍लाई चेन डेस्टिनेशन के रूप में उभर सकता है। इस पर उनका जवाब था, 'यह हो सकता है।'

उन्होंने कहा, 'हम जानते हैं कि कई कंपनियां पहले से ही उस दिशा में जा रही हैं। हम चाहते हैं कि सप्‍लाई चेन अमेरिका में, यथासंभव घर के करीब हों... भारत उसके लिए एक पड़ाव हो सकता है। वहां बहुत सारे लोग हैं। उनके पास मैन्‍युफैक्‍चरिंग क्षमता है। बेशक, हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि अमेरिकी मैन्‍युफैक्‍चरिंग सर्वोपरि हो। अमेरिकी काम करने वाले पहले हों। लेकिन, निश्चित रूप से जहां तक हम अन्य देशों से आयात करने जा रहे हैं, भारत एक अच्छा स्रोत हो सकता है, जब तक कि यह संतुलित और निष्पक्ष हो।'

ग्रीर का बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी व्यवसाय भू-राजनीतिक जोखिम, सप्‍लाई चेन फ्लेक्सिबिलिटी और टैरिफ संरचनाओं का मूल्यांकन कर रहे हैं कि मैन्‍युफैक्‍चरिंग को कहां ट्रांसफर किया जाए।

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