अमेरिका में ट्रंप सरकार की नीतियों से हलकान भारतीय छात्र, खटखटाया अदालत का दरवाजा, वीजा संकट पर ग्राउंड रिपोर्ट

Updated on 08-10-2025 02:11 PM
मधुलिका सिन्‍हा, वॉशिंगटन: अमेरिका में डोनाल्‍ड ट्रंप प्रशासन की आव्रजन कार्रवाई में फंसे जिन अंतर्राष्ट्रीय छात्रों ने अपना वीजा बहाल करवाने के लिए विदेश विभाग पर मुकदमा दायर किया है, उनमें सबसे ज्यादा संख्या भारतीय छात्रों की है। जबसे ट्रंप सरकार सत्ता में आई है, तब से अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो अमेरिकी कानून के उल्लंघन और इजरायल विरोधी प्रदर्शनों में हिस्सा लेने का हवाला देकर अब तक हजारों छात्र वीजा रद्द कर चुके हैं। इमीग्रेशन के मुद्दों पर कानूनी सलाह और सहायता प्रदान करने वाली कंपनी इंपैक्ट लिटिगेशन से मिली जानकारी के अनुसार कुल 217 छात्रों ने उनका वीजा अचानक रद्द किए जाने को चुनौती देते हुए सरकार के खिलाफ अगस्त और सितंबर में दो अलग-अलग मुकदमें दायर किए हैं।

पहला मुकदमा अगस्त की शुरुआत में एटार्नी स्टीवन ब्राउन और ब्रैड बनियास द्वारा 59 छात्रों की तरफ से दायर किया गया। इस मुकदमे में विदेश मंत्री मार्को रुबियो, होमलैंड सुरक्षा विभाग- डीएचएस की प्रमुख क्रिस्टी नोएम और आव्रजन एवं सीमा शुल्क प्रवर्तन विभाग -आईसीई के कार्यवाहक निदेशक टॉड लियोन्स को भी प्रतिवादी बनाया गया। दूसरा मुकदमा सितंबर में दायर किया गया। यह मुकदमा 158 अंतरराष्ट्रीय छात्रों की ओर से दायर किया गया। इसमें केवल रुबियो को प्रतिवादी बनाया गया है।

अमेर‍िका ने छात्रों के वीजा रोके


ट्रंप सरकार के खिलाफ ये मुकदमें लड़ रहे एटार्नी चार्ल्स कुक और सिसकिंड की टीम ने बताया कि ट्रंप प्रशासन के खिलाफ इससे पहले भी कई छात्रों ने मुकदमे दायर किए थे। इसमें अदालत की ओर से छात्रों के पक्ष में फैसला सुनाए जाने के बाद सरकार ने स्टूडेंट एक्सचेंज विजिटर इन्फॉरमेशन सिस्टम - एसईवीआईएस में ऐसे छात्रों के रिकॉर्ड बहाल कर दिए फिर भी इनमें से कई के वीज़ा अभी भी रोके रखे गए है

एसईवीआईएस सिस्टम


एसईवीआईएस वेब-आधारित एक आनलाइन प्रणाली है जिसका उपयोग अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग F-1 और M-1 वीजा पर आने वाले छात्रों और J-1 वीजा पर आने वाले अध्यापकों और अनुसंधानकर्ताओं की जानकारी एकत्र करने के लिए करता है जिससे उनकी स्थिति और गतिविधियों को हर समय ट्रैक किया जा सके। अमेरिकी सरकार के लिए यह एक राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी व्यवस्था है। अमेरिका में पढ़ने के इच्छुक छात्रों को जब किसी अमेरिकी विश्वविद्यालय या वोकेशनल ट्रेनिंगू प्रोग्राम में एडमिशन मिल जाता है तो ऐसे संस्थान इन छात्रों को फॉर्म I-20 के रूप में 'गैर-आप्रवासी छात्र स्थिति के लिए पात्रता प्रमाणपत्र' जारी करते हैं। इसके आधार पर ही F-1 वीज़ा जारी किया जाता है

क्यों उलझ रहा है मामला


विदेशी छात्रों का मामला इसलिए भी ज्यादा उलझ रहा है क्योंकि सरकार ने छात्रों के वीजा निरस्त किए जाने के अलग-अलग कारण बताए हैं। कुछ छात्रों के वीज़ा केवल इसलिए रद्द कर दिए गए क्योंकि उनका एसईवीआईएस दर्जा रद्द कर दिया गया था और इस बारे में छात्रों को जानकारी नहीं हो पाई। दूसरी ओर कुछ अन्य छात्रों के मामले में सरकार की ओर से यह तर्क दिया गया है कि इनके वीजा डीएचएस द्वारा 'स्टूडेंट क्रिमिनल एलियन इनिशिएटिव' कार्यक्रम के तहत रद्द किए गए हैं। यह एक ऐसा कानून है जिसे ट्रंप सरकार के सत्ता में आने के बाद अमेरिकी आव्रजन और सीमा शुल्क प्रवर्तन विभाग- यूएससीआईएस द्वारा 2025 की शुरुआत में लागू किया गया था। इसके तहत किसी भी आपराधिक रेकार्ड वाले अंतर्राष्ट्रीय छात्रों की पहचान करके उन्हें निर्वासित करने के प्रयास से है, चाहे उनके आरोपों की गंभीरता या समाधान कुछ भी हो।

वीजा रद्द करने के पीछे सरकार का तर्क


अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने अगस्त में कहा था कि ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद से उसने 6,000 से ज़्यादा वीज़ा रद्द कर दिए हैं। सरकार की विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों द्वारा ऐसे मामलों में अदालत में दी गई गवाही में कहा गया कि गृह सुरक्षा विभाग की ओर से अब तक 13 लाख विदेशी छात्रों के नामों की जांच संघीय डेटाबेस के माध्यम से की गई। जैसे ही किसी भी छात्र के बारे में आपराधिक गतिविधियों में संलिप्तता का पता चला गृह सुरक्षा विभाग जो एसईवीआईएस प्रणाली का रखरखाव करता है, ने छात्रों का एसईवीआईएस स्टेटस खत्म कर दिया और विदेश विभाग ने वीज़ा रद्द कर दिया। विदेश मंत्रालय के उप-प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने हाल में एक मीडिया साक्षात्कार में कहा, 'हम यहां वीज़ा पर आए ऐसे लोगों को बर्दाश्त नहीं करेंगे जो हमारे क़ानून तोड़ते हैं या आतंकवाद का समर्थन करते हैं। यह हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा का सवाल है।'

छात्रों की स्थिति को लेकर असमंजस


वकीलों का कहना है कि एसईवीआईएस स्टेटस और F-1वीज़ा के बीच अंतर के बारे में जागरूकता की कमी और सरकार की ओर से समय-समय पर जारी बयानों की वजह से भी भ्रम की स्थिति पैदा हुई है। एसईवीआईएस स्टेटस और वीज़ा के बीच अंतर को जानना जरूरी है। एसईवीआईएस का स्टेटस विदेशी छात्रों को अमेरिका में प्रवेश के बाद वहां रहने की अनुमति देता है, लेकिन अमेरिका से बाहर जाने और वापस लौटने के लिए उनके पास F-1 यानी कि छात्र वीजा का होना जरूरी है। ऐसे में यदि कोई छात्र अमेरिका में है और किसी कारण उसका F-1वीजा रद्द हो गया है लेकिन एसईवीआईएस में उसका स्टेटस बना हुआ है तो उसे अमेरिका छोड़ने की जरूरत नहीं होगी लेकिन यदि वह अमेरिका से बाहर जाकर दोबारा वापस आना चाहेगा तो उसे फिर से वीजा लेना होगा।

अप्रैल में गृह सुरक्षा विभाग की प्रवक्ता ट्रिशिया मैकलॉघलिन ने कहा था कि जिनके वीजा रद्द नहीं हुए हैं और किसी कारणवश गलती से उनका एसईवीआईएस स्टेटस खत्म कर दिया गया है तो उसे जांच के बाद बहाल किया गया है। लेकिन आव्रजन मामलों से जुड़े वकीलों का कहना है कि उनके कई मुवक्किल छात्रों ने जिनके एसईवीआईएस स्टेटस और F-1 वीजा दोनों खत्म कर दिए गए थे उनमें से कई ने अपना ये स्टेटस दोबारा से अपडेट पाया। कुल मिलाकर कानूनी लड़ाई में उलझे छात्र बुरी तरह से परेशान हैं। उनका करियर प्रभावित हो रहा है साथ ही उन्हें वित्तीय नुकसान भी उठाना पड़ रहा है। मुकदमों के निपटारे में छह महीने से एक साल तक का समय लग जाता है। अभी शटडाउन के कारण सरकारी कामकाज वैसे ही ठप पड़ा है ऐसे में इसमें और देरी हो सकती है।

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