भारत की हालत पाकिस्तान और अफ्रीका के गरीब देशों से भी बदतर... फाइनेंशियल प्लानर ने क्यों कहा ऐसा?

Updated on 14-08-2025 04:17 PM
नई दिल्ली: हुरुन इंडिया ने हाल में देश के सबसे अमीर परिवारों की लिस्ट जारी की थी। इसके मुताबिक अंबानी परिवार देश की सबसे अमीर फैमिली है। इस परिवार के बिजनेस की कुल वैल्यू 28.2 लाख करोड़ रुपये है जो देश की जीडीपी का करीब 1/12वां हिस्सा है। इसके मुताबिक देश के टॉप तीन परिवारों के बिजनेस की वैल्यू 471 अरब डॉलर (40.4 लाख करोड़ रुपये) है जो फिलीपींस की जीडीपी के बराबर है। इन परिवारों के बिजनेस की वैल्यू पिछले एक साल में 4.6 लाख करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई है। दूसरी ओर सरकार का दावा है कि देश में 80 करोड़ लोग मुफ्त राशन योजना का लाभ उठा रहे हैं। इससे पता चलता है कि देश में अमीरी और गरीबी की खाई कितनी बड़ी है।

ग्लोबल वेल्थ रिपोर्ट, 2023 के मुताबिक भारत में टॉप एक फीसदी रईसों के पास 41 फीसदी वेल्थ है। इस मामले में केवल ब्राजील ही हमसे आगे है। इस दक्षिण अमेरिकी देश में टॉप 1 फीसदी अमीरों के पास 48.4 फीसदी वेल्थ है। अमेरिका (34.3%), चीन (31.1%), जर्मनी (30%), साउथ कोरिया (23.1%), इटली (23.1%), ऑस्ट्रेलिया (21.7%), फ्रांस (21.2%) यूके (20.7%) और जापान (18.8%) इस लिस्ट में भारत से पीछे हैं। इसका मतलब है कि इन देशों में अमीरी और गरीबी के बीच का अंतर हमसे काफी बेहतर है।

पाकिस्तान से बदतर हालत

चेन्नई के फाइनेंशियल प्लानर डी मुत्थूकृष्णन का कहना है कि देश में भारत में आर्थिक विभाजन जितना दिखता है, उससे कहीं ज्यादा है। 90 फीसदी लोगों के पास नेशनल इनकम का केवल 43 फीसदी हिस्सा है और उनकी जीडीपी राष्ट्रीय औसत से आधी है। उन्होंने एक्स पर एक ट्वीट में कहा कि देश की राष्ट्रीय प्रति व्यक्ति आय 2700 डॉलर है लेकिन अगर आप टॉप 10 फीसदी लोगों को हटा दें तो यह 1,300 डॉलर रह जाती है। यह सब-सहारा देशों और पाकिस्तान से भी बदतर है। पाकिस्तान की प्रति व्यक्ति आय करीब 1,485 डॉलर है।
मुत्थूकृष्णन ने कहा कि अगर आप देश के टॉप 15 करोड़ लोगों में शामिल नहीं हैं और बाकी 1.3 अरब लोगों में हैं, तो आपके लिए जिंदगी नरक है। उन्होंने कहा, 'देश के टॉप 10% लोगों की नेशनल इनकम में 57 फीसदी हिस्सेदारी है। बाकी 90 फीसदी का हिस्सा केवल 43% है। 15 करोड़ बड़ी आबादी है, इसलिए देश समृद्ध दिखता है। इंडस वैली की रिपोर्ट के मुताबिक 100 करोड़ भारतीयों की जीरो परचेजिंग पावर है। वे अपनी मूलभूत जरूरतों से ज्यादा खर्च नहीं कर सकते हैं। वे केवल सरकारी सपोर्ट पर जिंदा हैं। एक देश के तौर पर हमें अभी लंबी यात्रा करनी है।'


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