भारत का एलन मस्क... 2,000 रुपये से शुरू किया बिजनस और लगा दी सुपरहिट ब्रांड्स की झड़ी

Updated on 14-12-2023 02:49 PM
नई दिल्ली: अगर कोई आपसे कहे कि केश किंग, पेट सफा, रूप मंत्रा, सच्ची सहेली और डॉक्टर ऑर्थो जैसे सुपरहिट एक ही आदमी के दिमाग की उपज हैं, तो शायद आपको यकीन नहीं होगा। लेकिन यह सच है। यह चमत्कार किया है एसबीएस ग्रुप ऑफ कंपनीज के फाउंडर संजीव जुनेजा ने। 46 साल के जुनेजा को 'ब्रांड मशीन' के रूप में जाना जाता है। उनके लॉन्च किए गए आयुर्वेदिक प्रॉडक्ट्स की देश-विदेश में जबरदस्त मांग है। जुनेजा ने अपनी मां से 2,000 रुपये लेकर आयुर्वेदिक दवाओं का कारोबार शुरू किया था। कई साल की मेहनत के बाद उन्हें सफलता हाथ लगी और आज उनकी कंपनी का टर्नओवर अरबों रुपये में है। एक नजर उनके कामयाब सफर पर

संजीव जुनेजा के पिता हरियाणा के शहर अंबाला में आयुर्वेद के डॉक्टर थे। उनका एक छोटा सा क्लीनिक था। संजीव ने अपने पिता के साथ रहकर आयुर्वेदिक दवाओं का काम सीखा। मगर जल्दी ही उनके सिर से पिता का साया उठ गया। साल 1999 में पिता के निधन के बाद उनके कंधों पर परिवार की जिम्मेदारी आ गई। उन्होंने पिता की विरासत को आगे बढ़ाने का फैसला किया। दवाओं का कारोबार शुरू करने के लिए मां से दो हजार रुपये लिए। कुछ साल की लगातार मेहनत और रिसर्च के बाद साल 2003 में अपनी कंपनी शुरू की।

केश किंग

सबसे पहले संजीव ने रॉयल कैप्सूल बनाकर बाजार में उतारा। मार्केट में इसकी डिमांड बढ़ी तो प्रॉफिट बढ़ने लगा। प्रॉफिट से आने वाले पैसों को रीइन्वेस्ट करना शुरू कर दिया। इसका नतीजा यह हुआ कि उन्हें कभी बैंक से कर्ज लेने की जरूरत नहीं पड़ी। उनके बिजनस में सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साल 2008 में आया। असल में उनके खुद के बाल झड़ रहे थे और इसे रोकने के लिए उन्होंने एक आयुर्वेदिक फॉर्मूला बनाया। यह काम कर गया। उन्होंने इसे कमर्शलाइज करने का फैसला किया और नाम दिया केश किंग। साल 2009 में यह मार्केट में आ गया।

लेकिन उस जमाने में मार्केट में कई बड़ी-बड़ी कंपनियां मौजूद थी। उनके बीच एक छोटी सी आयुर्वेदिक कंपनी के लिए जगह बनाना आसान नहीं था। उन्होंने देखा कि मार्केट में सारी ब्रांडिंग बालों की स्टाइल पर हो रही है। जुनेजा ने स्टाइल के बजाय बालों की हेल्थ पर फोकस किया। उनकी यह तरकीब काम कर गई। उन्होंने खुद दुकानों पर जाकर अपने प्रॉडक्ट की मार्केटिंग की। एक-एक शीशी अपने हाथ से बेचते थे और लोगों को उसके फायदे बताते थे। उन्होंने दुकानदारों को अच्छा मार्जिन दिया। इससे कारोबार बढ़ने लगा। जुनेजा ने फिर अखबारों में भी बड़े-बड़े विज्ञापन देने शुरू कर दिए और सीधे कस्टमर तक पहुंच बनाई।

पांच गुना वैल्यूएशन पर बिक्री

धीरे-धीरे उनकी सेल बढ़ने लगी। अब उन्होंने टीवी विज्ञापन पर भी जोर दिया और जानी-मानी अभिनेत्री जूही चावला को अपना ब्रांड एंबेसेडर बनाया। पहले साल की सेल छह करोड़ रही जो दूसरे साल 13 करोड़ रुपये पहुंच गई। तीसरा साल आते-आते कंपनी की सेल 29 करोड़ रुपये पहुंच गई। फिर 150 करोड़ रुपये और 300 करोड़ रुपये की सेल कंपनी ने हासिल की। कंपनी की सेल सालाना 60% की ग्रोथ से बढ़ रही थी। तब दुनिया की बड़ी-बड़ी कंपनियों का ध्यान इसकी तरफ गया। आखिरकार 2015 में दिग्गज एफएमसीजी कंपनी इमामी ने केश किंग को पांच गुना वैल्यूएशन के साथ 1651 करोड़ रुपये में इसे खरीद लिया।

पेट सफा और डॉ ऑर्थो

जुनेजा ने केश किंग को बेचने के बाद नए प्रोजेक्ट पर काम किया। इस बार कब्ज की समस्या पर फोकस किया। इस तरह उन्होंने अपना अगला ब्रांड पेट सफा बनाया। इस बार उन्होंने कॉमेडियन राजू श्रीवास्तव को अपना ब्रांड एंबेसेडर बनाया और दुकानदारों को भारी मार्जिन दिया। पेट सफा भी एक सुपरहिट प्रॉडक्ट साबित हुआ। इसके बाद बारी थी जोड़ों के दर्द की दवा डॉक्टर ऑर्थो की। मशहूर गीतकार जावेद अख्तर इसके ब्रांड एंबेसेडर हैं। फिर उन्होंने कील मुहासों की दवा रूप मंत्रा लॉन्च की। इसमें प्रीति जिंटा को ब्रांड एंबेसेडर बनाया। इसके बाद भी उन्होंने सच्ची सहेली जैसे कई और ब्रांड बनाए। इसलिए जुनेजा को ब्रांड मशीन भी कहा जाता है।

उद्यमी और इन्वेस्टर के अलावा संजीव जुनेजा मोटिवेशनल स्पीकर भी हैं। उन्होंने IIM अहमदाबाद, इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस, टाई, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट जैसी बड़ी संस्थानों में लेक्चर दिए हैं। आयुर्वेद के आधुनिक रूप को देश में पहचान दिलाने में भी उनका अहम योगदान है। साथ ही वह वोकल फॉर लोकल और आत्मनिर्भर भारत जैसे कैंपेन के भी समर्थक रहे हैं। आज उनके प्रॉडक्ट्स लोगों की जरूरत बन गए हैं। दिलचस्प बात है कि संजीव जुनेजा ने यह काम बहुत कम समय में कर दिखाया। आज उनकी एसबीएस ग्रुप ऑफ कंपनीज का टर्नओवर अरबों में है।


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