सामान गुम होने पर इंडिगो को 1.82 लाख रुपये हर्जाना देने का आदेश

Updated on 03-09-2026 01:44 PM
रायपुर। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, रायपुर ने यात्री का सामान गुम होने के मामले में इंटरग्लोब एविएशन लिमिटेड (इंडिगो) को सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार का दोषी ठहराया है। आयोग ने एयरलाइन को कुल 1.82 लाख रुपये का हर्जाना अदा करने का आदेश दिया है।

मामला समता कॉलोनी, रायपुर निवासी 28 वर्षीय आशुतोष जाखोदिया से जुड़ा है। उन्होंने आयोग में परिवाद दायर कर बताया था कि 4 दिसंबर 2015 को आगरा में विवाह समारोह में शामिल होने के बाद वे 5 दिसंबर को दिल्ली से रायपुर लौट रहे थे। दिल्ली एयरपोर्ट पर इंडिगो के कर्मचारियों ने समय की कमी और सप्ताहांत की भीड़ का हवाला देते हुए उनसे तीन बैग फ्लाइट में नहीं ले जाने का अनुरोध किया था। कर्मचारियों ने भरोसा दिलाया था कि सामान अगले दिन रायपुर पहुंचा दिया जाएगा।

रायपुर पहुंचने पर नहीं मिले तीनों बैग

रायपुर एयरपोर्ट पर इंडिगो कर्मचारियों ने पहले बताया कि तीनों बैग उसी फ्लाइट में लोड हो गए हैं और लगेज बेल्ट से मिल जाएंगे। हालांकि, बेल्ट पर पहुंचने के बाद आशुतोष को काला, चेकदार और नीला रंग के तीनों बैग नहीं मिले। उन्हें स्लिप क्रमांक 632881 और 632804 दी गई।

बार-बार पूछताछ के बाद 18 दिसंबर 2015 को इंडिगो ने सामान गुम होने की बात स्वीकार की। इसके बाद 7 जनवरी 2016 को एयरलाइन ने क्षतिपूर्ति देने से इनकार करते हुए कंडीशन ऑफ कैरिज का हवाला दिया।

आयोग ने खारिज किया इंडिगो का बचाव
इंडिगो ने आयोग के क्षेत्राधिकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि परिवादी ने प्रॉपर्टी इरेगुलैरिटी रिपोर्ट (PIR) दर्ज नहीं कराई और चेक-इन के समय सामान में मौजूद कीमती वस्तुओं की घोषणा भी नहीं की थी।

अध्यक्ष ढाकेश्वर प्रसाद शर्मा तथा सदस्य निरूपमा प्रधान और अनिल कुमार अग्निहोत्री की खंडपीठ ने एयरलाइन की दलीलों को खारिज कर दिया। आयोग ने कहा कि सामान यात्री ने एयरलाइन के आग्रह पर छोड़ा था और उसे अगले दिन सुरक्षित पहुंचाने का आश्वासन दिया गया था। ऐसे में यात्री को तत्काल यह जानकारी ही नहीं थी कि उसका सामान गुम हो चुका है। आयोग ने इंडिगो के उस ईमेल का भी उल्लेख किया, जिसमें एयरलाइन ने सामान गुम होने पर खेद व्यक्त किया था।

हालांकि, परिवादी द्वारा सामान में 3.20 लाख रुपये मूल्य की वस्तुएं होने के दावे का ठोस प्रमाण नहीं दिया जा सका। इसलिए आयोग ने प्रति बैग 50 हजार रुपये के हिसाब से कुल 1.50 लाख रुपये का मुआवजा निर्धारित किया।

45 दिनों में करना होगा भुगतान

20 अगस्त 2026 को जारी आदेश के मुताबिक इंडिगो को 45 दिनों के भीतर 1.50 लाख रुपये, 29 अप्रैल 2016 से भुगतान तक 6 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज सहित अदा करने होंगे। इसके अलावा 25 हजार रुपये मानसिक क्षतिपूर्ति और 7 हजार रुपये वादव्यय एवं अधिवक्ता शुल्क के रूप में देने होंगे।

परिवादी की ओर से अधिवक्ता अनिकेत लहरी और अपूर्व गोयल ने पैरवी की।



अन्य महत्वपुर्ण खबरें

 17 September 2026
छत्तीसगढ़ के जीएसटी विभाग में सीमित भर्ती परीक्षा के जरिए टैक्स इंस्पेक्टर बने 42 कर्मचारियों की नियुक्ति रद्द कर दी गई है। 2021 और 2022 में हुई परीक्षा के माध्यम…
 17 September 2026
राज्य सरकार के लिखित आदेश के बावजूद दूसरे-तीसरे वर्ष और तीसरे-पांचवें सेमेस्टर में प्रवेश नहीं मिलने का आरोप लगाते हुए एनएसयूआई कार्यकर्ताओं और छात्रों ने बुधवार को पं. रविशंकर शुक्ल…
 17 September 2026
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक पद पर 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर भाजपा का महीनेभर का ‘सेवा संकल्प अभियान’ गुरुवार से शुरू होगा। 17 सितंबर से 17 अक्टूबर…
 17 September 2026
सीजीपीएससी पर्चा लीक मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 2021 के साथ अब 2020 में हुई परीक्षा की भी जांच शुरू कर दी है। ईडी की ओर से जारी बयान…
 17 September 2026
छत्तीसगढ़ में फिलहाल बारिश कमजोर है। पिछले 24 घंटे में ज्यादातर जिले सूखे रहे, जबकि कुछ जगहों पर हल्की बारिश हुई। सरायपाली और कटेकल्याण में 10-10 मिमी बारिश दर्ज की…
 17 September 2026
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में युवक ने खुद को बीट्स पिलानी से B.Tech और जयपुर की कंपनी में 48 लाख रुपए सालाना सैलरी पर काम करने वाला बताकर युवती से शादी…
 17 September 2026
रायपुर में गणेश उत्सव धूमधाम से मनाया जा रहा है। शहर में अलग-अलग थीम पर गणेश पंडाल और अनोखी मूर्तियां आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। कहीं 20 फीट लंबे…
 17 September 2026
2013 में झीरम घाटी में कांग्रेस नेताओं समेत 29 लोगों की हत्या के मामले में जगदलपुर NIA कोर्ट ने 10 दोषियों को फांसी की सजा सुनाई है। इनमें 2 महिला…
 16 September 2026
कोरबा । कलेक्टर  कुणाल दुदावत ने आज कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित समय-सीमा बैठक में विभागवार लंबित प्रकरणों, टीएल मामलों, जनशिकायतों तथा शासन की प्राथमिकता वाली योजनाओं की प्रगति की समीक्षा…
Advt.