पूर्व मुख्य सचिव बैंस और एलएम बेलवाल के खिलाफ आरोपों की जांच अटकी, विभाग नहीं दे रहा दस्तावेज

Updated on 20-03-2026 12:08 PM

 भोपाल। राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (एसआरएलएम) में वर्ष 2018 से 2021 के बीच पोषण आहार और टेक होम राशन (टीएचआर) वितरण में कथित अनियमितताओं की जांच अब दस्तावेजों के अभाव में अटक गई है।

लोकायुक्त संगठन को संबंधित विभागों से जरूरी जानकारी नहीं मिल पाने के कारण जांच शुरू ही नहीं हो पा रही है। पूर्व मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस और तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी ललित मोहन बेलवाल के खिलाफ लगाए गए गंभीर आरोपों के बावजूद विभागों की टालमटोली से मामला लंबित है।

दस्तावेजों के अभाव में जांच ठप

लोकायुक्त संगठन के विधि सलाहकारों द्वारा बार-बार पत्र भेजे जाने के बावजूद पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग और नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने अब तक आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए हैं। वर्ष 2025 में ही अलग-अलग तारीखों पर पांच पत्र भेजे जा चुके हैं, लेकिन जवाब नहीं मिला। इससे जांच प्रक्रिया पूरी तरह ठप पड़ी है।

विधानसभा में भी उठा मामला

यह मुद्दा बजट सत्र के दौरान विधानसभा में भी गूंज चुका है। एक प्रश्न के लिखित उत्तर में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्वीकार किया था कि संबंधित विभागों से जानकारी अभी तक प्राप्त नहीं हुई है। इससे प्रशासनिक स्तर पर समन्वय की कमी उजागर हुई है।

मंत्री ने दिए कार्रवाई के संकेत

अब पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल ने सख्त रुख अपनाते हुए जानकारी नहीं देने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की नोटशीट लिखी है। इससे मामले में तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है।

2022 से लंबित है शिकायत

इस पूरे प्रकरण की शिकायत वर्ष 2022 में पूर्व विधायक पारस सकलेचा ने लोकायुक्त में की थी। उसी वर्ष नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) की रिपोर्ट में भी टीएचआर वितरण में गड़बड़ियों की पुष्टि हुई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि पोषण आहार और टीएचआर के वितरण, परिवहन, मात्रा और गुणवत्ता में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुई हैं।

विभागों के विरोधाभासी जवाब

जनवरी 2025 में राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की ओर से भेजे गए पत्र में कहा गया कि सीएजी ऑडिट से संबंधित जानकारी सीलबंद लिफाफे में भेज दी गई है। वहीं महिला एवं बाल विकास विभाग के संयुक्त संचालक ने जानकारी मिलने से ही इनकार कर दिया। इसके बाद भी कई बार पत्राचार हुआ, लेकिन स्थिति जस की तस बनी रही।

13 अप्रैल तक मांगी गई जानकारी

अब लोकायुक्त संगठन ने एक बार फिर सख्ती दिखाते हुए संबंधित विभागों को पत्र भेजकर 13 अप्रैल 2026 तक सभी जरूरी दस्तावेज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। यदि इसके बाद भी जानकारी नहीं मिलती है, तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई तय मानी जा रही है।



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