ईरान ने इस्फहान न्यूक्लियर साइट को सील करना शुरू किया, सैटेलाइट तस्वीरों से खुलासा, अमेरिकी हमले का डर बढ़ा?

Updated on 10-02-2026 12:10 PM
तेहरान: ईरान ने अपने इस्फहान न्यूक्लियर साइट की सुरंगों को कंक्रीट और मिट्टी से भरना शुरू कर दिया है। सैटेलाइट तस्वीरों से इसका खुलासा हुआ है। सोमवार को ईरान के ऊपर ली गई हाई-रिजॉल्यूशन सैटेलाइट तस्वीरों से पता चल रहा है कि ईरान, इस्फहान न्यूक्लियर साइट पर अजीब तरह की किलाबंदी कर रहा है। ऐसा लग रहा है कि सुरंगों को कंक्रीट और मिट्टी से बंद किया जा रहा है। इस्फहान, ईरान के सबसे मुख्य संवेदनशील परमाणु साइट में से एक है। यहां पर भारी सुरक्षा व्यवस्था रहती है और पिछले साल जून में हुई लड़ाई के दौरान इजरायल ने यहां बार बार हमले किए थे। अमेरिका ने भी अपने B-2 बॉम्बर जेट से यहां बंकर बस्टर बम गिराए थे।

तस्वीरों से पता चल रहा है कि इस्फहान न्यूक्लियर साइट पर टनल के तीन मेन एंट्रेंस मिट्टी से ढक दिए गये हैं। जिससे उन्हें पहचानना मुश्किल हो गया है और दरवाजों को पूरी तरह से ब्लॉक कर दिया गया है। पहली तस्वीर में इस्फहान में अंडरग्राउंड कॉम्प्लेक्स की ओर जाने वाली टनल के तीन एंट्री गेट मिट्टी से भरे हुए देखे जा सकते हैं। माना जा रहा है कि ईरान इस कोशिश में है कि अगर अमेरिका और इजरायली सैनिक यहां पहुंचे तो वो इस न्यूक्लियर साइट के अंदर दाखिल ना हो पाएं। इसके अलावा अगर बमबारी भी होती है तो नुकसान कम से कम हो।
इस्फहान न्यूक्लियर साइट को कैसे बचा रहा ईरान?
इंस्टीट्यूट फॉर साइंस एंड इंटरनेशनल सिक्योरिटी की वेबसाइट पर सैटेलाइट तस्वीरें जारी की गई हैं। इन तस्वीरों से पता चलता है कि दक्षिणी एंट्री गेट और साइट के बीच वाले सुरंग को बंद कर दिया गया है। अब उन्हें पहचाना नहीं जा सकता है। उत्तरी टनल एंट्रेंस, जहां तैयारी के और उपाय किए गए थे, उसे भी मिट्टी से भर दिया गया है। इंस्टीट्यूट ने बताया कि एंट्रेंस वाले एरिया में कोई गाड़ी की एक्टिविटी नहीं दिख रही है। इंस्टीट्यूट के रिसर्चर्स ने कहा है कि ऐसा लग रहा है कि ईरान जानता है कि अमेरिका और इजरायल का हमला होना तय है। वो अपने न्यूक्लियर फैसिलिटी को बचाने की कोशिश कर रहा है।रिसर्चर्स का कहना है कि टनल के एंट्रेंस को मिट्टी और कंक्रीट से भरने से हवाई हमले से होने वाला नुकसान कम होगा और साइट पर स्टोर किए गए एनरिच्ड यूरेनियम को जब्त करने या नष्ट करने के लिए स्पेशल फोर्स के ऑपरेशन की स्थिति में जमीन तक पहुंचना मुश्किल हो जाएगा। इसके अलावा यह भी हो सकता है कि ईरान ने सुरंगों को बचाने के लिए उनमें इक्विपमेंट या कुछ सामान ट्रांसफर किया हो। जून 2025 में अमेरिका ने फोर्डो, नतांज और इस्फहान न्यूक्लियर साइट पर हमले किए थे। इस बीच बुधवार को इजरायल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात होने वाली है, जिसमें ईरान पर हमले को लेकर फैसला लिया जा सकता है। इसमें मीडिया को जाने की इजाजत नहीं दी गई है।
ट्रंप को हमले के लिए उकसा रहे नेतन्याहू?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इजरायली प्रधानमंत्री को लगता है कि डोनाल्ड ट्रंप, ईरान की सरकार से कोई समझौता कर सकते हैं। जिसके बाद अमेरिका, ईरान पर हमला नहीं करेगा। इसीलिए वो वाइट हाउस जा रहे हैं। इजरायल को इस बात का डर है कि अमेरिका और ईरान के बीच अगर कोई समझौता होता है, तो उसके हाथ बंध जाएंगे। उसके लिए फिर ईरान के खिलाफ कोई एक्शन लेना मुश्किल हो जाएगा। इसीलिए इजरायल, हर हाल में बातचीत को बंद देखना चाहता है। नेतन्याहू और ट्रंप की करीबी किसी से छिपी नहीं है।
इजरायली अखबार ynetnews से एक सीनियर इजरायली अधिकारी ने कहा है कि "चिंता है कि यह एक ऐसे समझौते की ओर बढ़ रहा है जो हमारे लिए अच्छा नहीं है। यह सिर्फ विटकॉफ और कुशनर और ईरानियों के बीच बातचीत नहीं है। इसमें तुर्की भी शामिल है, साथ ही कतर, सऊदी अरब और मिस्र भी। ट्रंप पर असर डालने वाले कई लोग हैं। हमें चिंता है कि यह एक ऐसे समझौते की ओर बढ़ रहा है जो इजरायल के लिए अच्छा नहीं होगा और यह परेशान करने वाला है।"

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