ईरान-इजरायल युद्ध से कच्चे तेल की कीमत में तेजी, खड़े हो सकते हैं ये 5 बड़े संकट, भारत पर असर भी जान लीजिए

Updated on 21-06-2025 04:25 PM
नई दिल्ली: ईरान और इजरायल संघर्ष की वजह से पिछले दिनों क्रूड ऑयल के दाम में एक ही दिन में पिछले तीन साल की सबसे बड़ी तेजी आई। दोनों देश एक-दूसरे के ऊपर मिसाइल से हमला कर रहे हैं। ऐसे में दोनों देशों के बीच फिलहाल इस युद्ध के रुकने के कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही है। तेल की बढ़ती कीमतों ने भारत समेत दुनियाभर के लिए संकट पैदा कर दिया है। तेल की बढ़ती कीमत के कारण यह संकट किस तरह गहरा रहा है, आगे क्या हो सकता है और भारत पर क्या असर पड़ सकता है, जानते हैं इन 5 पॉइंट्स में:

शिपमेंट में आ गई कमी

क्रूड ऑयल की ग्लोबल डिमांड का 2% ईरान से आता है है। यहां के खरग द्वीप से करीब 90% तेल बाहर भेजा जाता है। सैटेलाइट इमेज से पता चलता है कि क्रूड शिपमेंट में कमी आई है। हालांकि ईरान ने खरग द्वीप टर्मिनल की परिधि को भी खाली कर दिया है। वहीं होर्मुज जलडमरूमध्य चालू है। यहां से वैश्विक तेल शिपमेंट का लगभग 20 प्रतिशत ऑयल बाहर भेजा जाता है।

सप्लाई पर कब्जा

इजरायल-अमेरिकी दबाव बढ़ने की सूरत में ईरान तेल सप्लाई रोक सकता है। खाड़ी के दूसरे तेल उत्पादक देश की महत्वपूर्ण साइट्स ईरानी मिसाइलों की पहुंच में हैं। वह उनको भी निशाना बना सकता है। अगर तेल की सप्लाई रुकी तो इससे भारत समेत कई देशों को तेल की सप्लाई नहीं होती। इससे कच्चे तेल की कीमत में अचानक से तेजी आ सकती है।

सऊदी का सहारा

ईरानी सप्लाई रुकने की स्थिति में दुनिया की निर्भरता सऊदी अरब और UAE पर बढ़ जाएगी। अनुमान है कि दोनों 30 से 40 लाख बैरल अतिरिक्त क्रूड ऑयल का प्रतिदिन उत्पादन कर सकते हैं। सऊदी अरब दुनिया का एक प्रमुख तेल उत्पादक देश है। साल 2024 में सऊदी अरामको का तेल उत्पादन 12.7 मिलियन बैरल प्रतिदिन था। सऊदी अरब के पास दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा तेल भंडार है, जो 267 बिलियन बैरल से अधिक है।

रास्ते पर हो सकता है पहरा

पूर्ण युद्ध की स्थिति में ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बंद कर सकता है। इससे होकर दुनिया की 20% नेचुरल गैस और एक तिहाई तेल ट्रांसपोर्ट होता है। यह रूट बाधित हुआ तो कच्चे तेल में 20% तक उछाल आ सकता है। क्रेडिट रेटिंग एजेंसी ICRA के अनुसार इराक, सऊदी अरब, कुवैत और यूएई से आने वाला कच्चा तेल, जो होर्मुज से होकर गुजरता है, भारत के कुल कच्चे तेल के आयात का लगभग 45-50% है।

भारत पर क्या पड़ेगा असर

भारत अपनी जरूरत का 85 से 88% तेल बाहर से खरीदता है। 2023-24 में सबसे ज्यादा खरीद इराक, सऊदी अरब, रूस और यूएई से हुई। ICRA ने चेतावनी दी है कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते से तेल और गैस की सप्लाई में रुकावट आती है तो भारत की अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ सकता है। इससे तेल आयात बिल और चालू खाता घाटा (CAD) बढ़ने की आशंका है। साथ ही इससे प्राइवेट सेक्टर का निवेश भी रुक सकता है। ICRA का अनुमान है कि अगर कच्चे तेल की कीमत 10 डॉलर प्रति बैरल बढ़ती है तो भारत का तेल आयात बिल 13-14 अरब डॉलर तक बढ़ सकता है।


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