ईरान युद्ध से ट्रंप की ये चाहत हो जाएगी पूरी, तेल से नहीं कनेक्‍शन, दौड़ में चीन बहुत पीछे चला जाएगा

Updated on 30-03-2026 11:33 AM
नई दिल्‍ली: अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप की एक चाहत काफी समय से है। लंबे वक्‍त से वह सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग को वापस अपने देश में लाने की हसरत पाले हुए हैं। ईरान युद्ध से उनकी यह इच्‍छा परवान चढ़ती दिख रही है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष तेल बाजारों को बिगाड़ने से कहीं ज्यादा कर रहा है। यह वैश्विक सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को ऐसे तरीकों से नया रूप दे सकता है जिनसे अमेरिका को फायदा हो। सप्‍लाई चेन में रुकावट चीन को इस दौड़ में बहुत पीछे छोड़ देगी।

एनर्जी इकोनॉमिस्‍ट और एनजीपी एनर्जी कैपिटल मैनेजमेंट के पूर्व मुख्य अर्थशास्त्री अनस अलहाजी ने इस पर अपनी राय रखी है। उन्‍होंने कहा कि होर्मुज स्‍ट्रेट में लंबे समय तक रुकावट का सबसे बड़ा असर शायद सिर्फ कच्चे तेल की कीमतों पर न पड़े। इसके बजाय उन जरूरी औद्योगिक सप्लाई चेन के टूटने पर पड़े जो एशिया के मैन्युफैक्‍चरिंग दबदबे का आधार हैं।

कैसे सबसे बड़े व‍िजेता बन सकते हैं ट्रंंप?

इंडिया टुडे टीवी के साथ इंटरव्यू में अलहाजी ने हीलियम को एक बड़ी कमजोरी के तौर पर बताया। सेमीकंडक्टर बनाने में इसका इस्‍तेमाल होता है। उन्होंने कहा, 'अगर हम हीलियम की बात करें तो उदाहरण के लिए दुनिया का 35% हीलियम होर्मुज स्‍ट्रेट से होकर आता है। आप हीलियम के बिना कंप्यूटर चिप या सेमीकंडक्टर नहीं बना सकते।'
ऊर्जा विशेषज्ञ ने कहा कि इसका असर एशिया में कहीं ज्‍यादा गंभीर होगा। उनके मुताबिक, 'यह दक्षिण कोरिया, ताइवान और चीन के लिए एक समस्या है। कारण है कि मैंने कहा कि वैश्विक स्तर पर यह 35% है। लेकिन, असल में जब आप एशिया को देखते हैं तो यह 90% से ज्‍यादा है।'
इस संदर्भ में एक्‍सपर्ट ने तर्क दिया कि भू-राजनीतिक नतीजा वॉशिंगटन के पक्ष में हो सकता है। उन्‍होंने कहा, 'इन सबमें सबसे बड़े विजेता ट्रंप और अमेरिका हैं, उसके बाद पुतिन और फिर कुछ दूसरे देश जो बहुत दूर हैं।'

ट्रंप की चाहत हो जाएगी पूरी

अनस अलहाजी ने कहा कि इसका तर्क इस बात में छिपा है कि यह रुकावट औद्योगिक भूगोल में बदलाव को कैसे तेज कर सकती है। अमेरिका लंबे समय से सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग को वापस अपने देश में लाने की कोशिश कर रहा है। इसे एशिया पर निर्भरता कम करने के मकसद से बनाई गई नीतियों और निवेश का समर्थन मिला है।
उन्‍होंने कहा, 'कई मोर्चों पर मुख्य फायदा अमेरिका को ही है क्योंकि ट्रंप चाहते थे कि कंप्यूटर चिप बनाने का काम वहीं हो। वह चाहते हैं कि सेमीकंडक्टर अमेरिका में बनें, न कि दक्षिण कोरिया, ताइवान या चीन में।'
एक्‍सपर्ट के मुताबिक, 'उन्होंने हीलियम की सप्लाई रोककर यह मकसद हासिल कर लिया। और फिर जब मेथनॉल की बात आती है उदाहरण के लिए तो वह एक और मुद्दा है। अमेरिका हीलियम का सबसे बड़ा उत्पादक है, मेथनॉल का सबसे बड़ा उत्पादक है, तेल का सबसे बड़ा उत्पादक है, प्राकृतिक गैस का सबसे बड़ा उत्पादक है और एलएनजी का सबसे बड़ा उत्पादक है और इन सभी की सप्लाई रुकी हुई है। इन सभी की।'

क्‍यों अहम है हील‍ियम की सप्‍लाई?

इस हफ्ते की शुरुआत में रॉयटर्स की एक रिपोर्ट में बताया गया था कि होर्मुज के बंद होने के कारण हीलियम की सप्लाई में आई कमी का असर ग्लोबल टेक सप्लाई चेन में कुछ प्रोडक्शन पर पड़ने लगा है।
हीलियम का इस्तेमाल चिप बनाने के कई अहम चरणों में होता है। इनमें कूलिंग, लीक का पता लगाना और सटीक मैन्युफैक्‍चरिंग प्रक्रियाएं शामिल हैं। पश्चिम एशिया में संकट शुरू होने के बाद से इसकी कीमतें काफी बढ़ गई हैं।
अमेरिकी जियोलॉजिकल सर्वे के डेटा के मुताबिक, हीलियम की सप्लाई भौगोलिक रूप से बहुत ज्‍यादा एक जगह केंद्रित है। दुनिया की कुल सप्लाई का लगभग एक-तिहाई हिस्सा अकेले कतर बनाता है। हीलियम प्राकृतिक गैस प्रोसेसिंग का एक बायप्रोडक्ट है।शंघाई में सेमिकॉन चाइना में सप्लाई चेन कंसल्टेंसी टाइडल वेव सॉल्‍यूशंस के सीनियर पार्टनर कैमरन जॉनसन ने कहा, 'हीलियम की कमी एक बहुत बड़ी चिंता का विषय है।'कैमरन जॉनसन के मुताबिक, कंपनियों के पास प्रोडक्शन धीमा करने और जरूरी प्रोडक्ट्स को प्राथमिकता देने के अलावा फिलहाल कोई और विकल्प नहीं है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि कई कंपनियां इस समस्या के जल्द हल होने की उम्मीद कर रही हैं।
जॉनसन ने आगे कहा कि अगर यह कमी लंबे समय तक बनी रही तो प्रोडक्शन में कटौती करनी पड़ सकती है। इसका असर इलेक्ट्रॉनिक्स से लेकर ऑटोमोबाइल तक, कई उद्योगों पर पड़ सकता है।

चरमरा सकती है ग्‍लोबल अर्थव्‍यवस्‍था

अलहाजी ने हाल में चेतावनी दी थी कि अगर यह युद्ध जल्द ही खत्म नहीं हुआ तो मई की शुरुआत तक ग्लोबल अर्थव्यवस्था पूरी तरह से चरमरा सकती है। जब उनसे उनकी इस भविष्यवाणी के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि होर्मुज में आई यह रुकावट सिर्फ एनर्जी सेक्टर तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर कई अलग-अलग सेक्टरों पर पड़ रहा है।
फर्टिलाइजर, एलपीजी और शिपिंग में आने वाली रुकावटों का मिला-जुला असर एक ही समय पर खेती-बाड़ी, उद्योगों और लॉजिस्टिक्स यानी सामान की आवाजाही पर पड़ सकता है।
फर्टिलाइजर, एलपीजी और शिपिंग में आने वाली रुकावटों का मिला-जुला असर एक ही समय पर खेती-बाड़ी, उद्योगों और लॉजिस्टिक्स यानी सामान की आवाजाही पर पड़ सकता है।अलहाजी ने चेतावनी दी कि सप्लाई चेन पर पड़ने वाले इन परोक्ष प्रभावों का नुकसान, सीधे तौर पर पड़ने वाले झटकों से कहीं ज्‍यादा हो सकता है।

उन्‍होंने बताया था, 'जब सप्लाई चेन प्रभावित होती है तो हमारे सामने गंभीर समस्याएं खड़ी हो जाती हैं। जैसा कि आप जानते हैं, उदाहरण के लिए, फोन या कारें कई अलग-अलग देशों में बनाई जाती हैं। ऐसे में अगर कार या फोन का कोई एक पुर्जा भी नहीं बन पाता है तो पूरी की पूरी सप्लाई चेन ही ठप पड़ जाती है।'

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