अमेरिका के खिलाफ जंग में ईरान को पहली जीत, दक्षिण कोरिया से ट्रंप ने छीना थॉड एयर डिफेंस, किम जोंग को मौका?

Updated on 11-03-2026 01:31 PM
सियोल/वॉशिंगटन: ईरानी मिसाइलों से बचने के लिए अमेरिका ने दक्षिण कोरिया से THAAD एयर डिफेंस सिस्टम को धीरे धीरे बाहर निकालना शुरू कर दिया है। इनकी तैनाती मिडिल ईस्ट में की जा रही है। सिर्फ थाड एयर डिफेंस सिस्टम ही नहीं बल्कि अमेरिका ने दक्षिण कोरिया से कई और मिलिट्री हार्डवेयर भी ले जाना शुरू कर दिया है। अमेरिकी मीडिया ने मामले से परिचित दो अधिकारियों के हवाले से बताया है कि पेंटागन थाड सिस्टम के कुछ हिस्सों को मिडिल ईस्ट ले जा रहा है।

अमेरिका के इस फैसले से दक्षिण कोरिया में खलबली मच गई है। ब्रिटिश अखबार द गार्जियन ने बताया है कि दक्षिण कोरिया को डोनाल्ड ट्रंप के इरादों पर गहरा शक पैदा हो गया है। उसने चेतावनी दी है कि परमाणु हथियारों वाला उत्तर कोरिया इस मौके का फायदा उठा सकता है। वहीं दक्षिण कोरिया में राजनीतिक बहस शुरू हो गई है कि आखिर उसने उत्तर कोरिया के इतने गंभीर खतरे के सामने अमेरिका के ऊपर भरोसा ही क्यों किया था? जबकि ईरान की बैलिस्टिक मिसाइलें मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और इजरायल में तबाही मचा रही हैं।

अमेरिका ने दक्षिण कोरिया को दिया 'धोखा'

हालांकि दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने लोगों को भरोसा दिलाने की कोशिश कर रहे हैं कि बगैर अमेरिकी एयर डिफेंस सिस्टम के भी दक्षिण कोरिया, उत्तर कोरिया की तरफ से आने वाले खतरों को रोकने की क्षमता रखता है। राष्ट्रपति ली ने कैबिनेट की बैठक के दौरान कहा कि 'अगर पूछा जाए कि क्या इससे उत्तर कोरिया के खिलाफ हमारी रोकथाम की रणनीति में कोई बड़ी रुकावट आएगी तो मैं पक्के तौर पर कह सकता हूं कि ऐसा नहीं होगा।' उन्होंने आगे कहा कि दक्षिण कोरिया दुनिया में सबसे ज्यादा डिफेंस बजट पर खर्च करने वाले देशों की लिस्ट में आता है और देश का रक्षा बजट उत्तर कोरिया के GDP का 1.4 गुना ज्यादा है।
दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री चो ह्यून ने शुक्रवार को कहा कि US और साउथ कोरिया की सेनाएं मिडिल ईस्ट में कुछ अमेरिकी पैट्रियट मिसाइल डिफेंस सिस्टम को फिर से तैनात करने पर भी चर्चा कर रही हैं। वहीं दक्षिण कोरिया के कई अखबारों ने दावा किया है कि कुछ मिसाइल बैटरी को सऊदी अरब और यूनाइटेड अरब अमीरात में अमेरिकी बेस पर तैनात किए जाने की संभावना है।

दक्षिण कोरिया की सेना के एक अधिकारी ने योनहाप न्यूज एजेंसी को बताया है कि 'ऑपरेशनल सिक्योरिटी कारणों से हम खास मिलिट्री क्षमता या मिलिट्री हार्डवेयर के मूवमेंट पर प्रतिक्रिया नहीं देते हैं।'

उत्तर कोरिया के किम जोंग के लिए बड़ा मौका?

दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति या विदेश मंत्री कुछ भी दावा करें लेकिन हकीकत यही है कि उत्तर कोरिया की घातक मिसाइलें देश पर भारी पड़ सकती हैं। अमेरिकी डिफेंस सिस्टम के दक्षिण कोरिया से बाहर निकलने के बाद देश की सुरक्षा कमजोर हो गई है। उत्तर कोरिया ने भी ईरान की तरह की हथियारों के निर्माण में ही भारी भरकम खर्च किए हैं।

राजधानी सियोल स्थित सांगजी विश्वविद्यालय में मिलिट्री स्टडीज के प्रोफेसर चोई गी-इल ने कहा कि 'इस बात को लेकर चिंता है कि उत्तर कोरिया, दक्षिण कोरिया से अमेरिकी हार्डवेयर के बाहर जाने को लेकर गलत अंदाजा लगा सकता है। वो दक्षिण कोरिया के डिफेंस का टेस्ट करने के लिए छोटे लेवल पर उकसावे वाली कार्रवाई कर सकता है।' दक्षिण कोरिया का डर इसलिए भी वाजिब है क्योंकि अमेरिका ईरान के साथ एक खतरनाक जंग में उलझा हुआ है और वो किसी भी हाल में अपने सहयोगी देशों को बचाने की स्थिति में नहीं है।
दक्षिण कोरिया में अमेरिकी एयर डिफेंस की तैनाती कब?
करीब 10 साल पहले उत्तर कोरिया के खतरे को देखते हुए दक्षिण कोरिया के शांत गांव सियोंगजू में रातों-रात अमेरिकी THAAD एयर डिफेंस सिस्टम को तैनात किया गया था। उस वक्त देश पर उत्तर कोरिया के बैलिस्टिक मिसाइल हमलों का खतरा काफी ज्यादा बढ़ा हुआ था। उस वक्त दक्षिण कोरिया की कंजर्वेटिव सरकार ने जोर देकर कहा था कि उत्तर कोरिया की मिसाइलों से निपटने के लिए अमेरिकी डिफेंस सिस्टम का होना बेहद जरूरी है। इस तैनाती से चीन और रूस भी नाराज हुए थे। लेकिन अब दक्षिण कोरिया खुद को ठगा महसूस कर रहा है।

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