ईरान पर हमले की भूमिका बना रहा UAE? राष्ट्रपति के करीबी ने तेहरान को धमकाया, विदेश मंत्री ने कहा 'आतंकी'

Updated on 23-03-2026 03:27 PM
दुबई: संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की ओर से ईरान के खिलाफ युद्ध में उतरने के संकेत दिए गए हैं। यूएई की सत्ता के बड़े अधिकारियों की ओर से कहा गया है कि ईरान के खिलाफ सख्त फैसला लिया जा सकता है। ईरान ने अमेरिका और इजरायल के हमलों के जवाब में खाड़ी देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। इससे यूएई, सऊदी अरब, कतर कुवैत जैसे देशों में गुस्सा देखा जा रहा है। अमेरिका और इजरायल के साथ यूएई भी अगर ईरान पर हमलों में शामिल होता है तो युद्ध और ज्यादा भीषण रूप ले सकता है।

यूएई के राष्ट्रपति के सलाहकार अनवर गर्गश ने कहा है कि लंबे समय तक क्षेत्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने और ईरान से होने वाले खतरों से निपटने के लिए हमें युद्धविराम तक सीमित नहीं रहने चाहिए बल्कि इससे आगे सोचना चाहिए। यूएई के विदेश मंत्री और उप-प्रधानमंत्री अब्दुल्ला बिन जायेद ने और ज्यादा आक्रामक रुख दिखाया है। उन्होंने इजरायल की तरह नाम लिए बिना ईरान को 'आतंकी देश' कहा है। उन्होंने कहा कि यूएई कभी भी आतंकवादियों की ब्लैकमेलिंग का शिकार नहीं होगा।

ईरान की आक्रामकता रुकनी चाहिए

अनवर गर्गश ने अपने एक्स पोस्ट में कहा, 'अरब देशों के खिलाफ ईरानकी क्रूर आक्रामकता के गहरे भू-राजनीतिक परिणाम हैं। यह ईरानी खतरे को खाड़ी की रणनीतिक सोच का केंद्रीय बिंदु बनाता है। साथ ही अरब सुरक्षा की पारंपरिक अवधारणाओं से उसकी स्वतंत्रता को मजबूत करता है। मिसाइलें, ड्रोन सब ईरान के ही हैं। इससे हमारी राष्ट्रीय क्षमताओं और संयुक्त खाड़ी सुरक्षा को बल मिलता है। वॉशिंगटन के साथ हमारी सुरक्षा साझेदारी और अधिक सुदृढ़ होती है।'
अनवर ने आगे कहा, 'जैसे-जैसे हम ईरान की क्रूर आक्रामकता का सामना करते हैं तो सहनशीलता में अपनी अटूट शक्ति पहचानते हैं। हमारी सोच केवल युद्धविराम तक ही सीमित नहीं रहती, बल्कि उन समाधानों की ओर मुड़ जाती है जो अरब खाड़ी में स्थायी सुरक्षा सुनिश्चित करें। जिससे परमाणु खतरे, मिसाइलों, ड्रोन और जलडमरूमध्य में की जाने वाली दादागिरी पर अंकुश लगाया जा सके। यह सोचना अकल्पनीय है कि यह आक्रामकता खतरे की एक स्थायी स्थिति में तब्दील हो जाए।'

युद्ध में शामिल होगा यूएई?

अनवर गर्गश और अब्दुल्ला बिन जायेद के बयानों से यूएई के इजरायल और अमेरिका के साथ युद्ध में शामिल होने की अटकलों ने जोर पकड़ा है।इजरायली मीडिया में भी यह दावा किया जा रहा है कि खाड़ी के ज्यादातर देश अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान पर हमले जारी रखने के पक्ष में हैं। वह चाहते हैं कि ईरान की सैन्य ताकत इतनी कमजोर हो जाए कि वह उनके लिए कोई खतरा ना बन सके।

इजरायल और अमेरिका ने 28 फरवरी को ईरान पर हमला किया था। इसके बाद ईरान ने भी जवाबी हमले किए हैं। ईरान ने इजरायल के साथ-साथ खाड़ी देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और हितों को निशाना बनाया है। यूएई, सऊदी, कतर, कुवैत जैसे देशों में अमेरिका के सैन्य ठिकानों पर हमलों के चलते से देश ईरान पर खफा हैं।

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