जमकर सोना गिरवी रख रहे लोग, गोल्ड लोन में भारी उछाल

Updated on 29-11-2025 01:14 PM
नई दिल्ली: सोने के गहनों पर लोन यानी गोल्ड लोन में अचानक भारी उछाल देखने को मिल रहा है। टीओआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक अक्टूबर 2025 तक गोल्ड लोन का बकाया 128.5% बढ़कर 3.38 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। मार्च 2025 से देखें तो यह 63.6% बढ़ा है। पिछले 12 महीनों में बैंकों के पर्सनल लोन में जितनी बढ़ोतरी हुई है, उसका लगभग एक चौथाई हिस्सा गोल्ड लोन का है। पर्सनल लोन वैसे भी क्रेडिट ग्रोथ में सबसे आगे है। अक्टूबर के अंत तक ये लोन 14% बढ़कर 64.56 लाख करोड़ रुपये हो गए। भारतीय रिजर्व बैंक ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।

RBI ने बताया कि गोल्ड लोन में इस बड़ी बढ़ोतरी की एक वजह यह भी है कि मई 2024 में बैंकों ने कुछ नियमों के चलते खेती-किसानी के लिए गहनों पर दिए गए लोन को भी रिटेल गोल्ड लोन की श्रेणी में डाल दिया है। पर्सनल लोन में बढ़ोतरी की वजह अभी भी सिक्योर्ड लोन ही हैं। यानी ऐसे लोन जिनमें कुछ गिरवी रखा जाता है। हाउसिंग लोन 11% बढ़कर 31.87 लाख करोड़ रुपये हो गया। ऑटो लोन 12.5% बढ़कर 6.77 लाख करोड़ रुपये हो गए और एजुकेशन लोन 14.7% बढ़कर 1.49 लाख करोड़ रुपये हो गए।

अनसिक्योर्ड लोन

वहीं अनसिक्योर्ड लोन की ग्रोथ सिंगल डिजिट में रही। कंज्यूमर ड्यूरेबल लोन सिर्फ 1% बढ़कर 23,646 करोड़ रुपये हुए। क्रेडिट कार्ड का बकाया 7.7% बढ़कर 3.03 लाख करोड़ रुपये हो गया और अन्य पर्सनल लोन 9.9% बढ़कर 16.17 लाख करोड़ रुपये हो गए। आम लोगों की तरफ से लोन की मांग बैंकों के कुल लोन को बढ़ा रही है। अक्टूबर 2025 तक, बैंकों का कुल लोन 11.3% बढ़कर 193.9 लाख करोड़ रुपये हो गया। पिछले सात महीनों में यह 6.3% बढ़ा है। नॉन-फूड क्रेडिट भी लगभग इसी रफ्तार से बढ़ा है, जो 11.1% बढ़कर 193.2 लाख करोड़ रुपये हो गया है।नॉन रिटेल सेक्टर की बात करें तो सर्विस सेक्टर लोन ग्रोथ को आगे बढ़ा रहा है। इस सेक्टर को दिए जाने वाले लोन 13% बढ़कर 53.45 लाख करोड़ रुपये हो गए। इसमें कंप्यूटर सॉफ्टवेयर (29.4%), शिपिंग (28%) और कमर्शियल रियल एस्टेट (14.1%) जैसे क्षेत्रों में अच्छी बढ़ोतरी देखी गई। NBFCs को बैंक अभी भी खूब लोन दे रहे हैं। NBFCs को दिया जाने वाला लोन 10.9% बढ़कर 17.04 लाख करोड़ रुपये हो गया है। इनमें हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों के मुकाबले पब्लिक फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस को ज्यादा लोन मिल रहा है।

प्रायोरिटी सेक्टर लोन

इंडस्ट्री क्रेडिट 10% बढ़कर 41.93 लाख करोड़ रुपये हो गए। इसमें छोटे और बहुत छोटे उद्योगों को दिए जाने वाले लोन में 25.9% की भारी बढ़ोतरी हुई, जो 9.54 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। मझोले उद्योगों को 17.6% ज्यादा लोन मिला, जो 3.98 लाख करोड़ रुपये हो गया। वहीं, बड़ी कंपनियों को सिर्फ 4.6% ज्यादा लोन मिला, जो 28.41 लाख करोड़ रुपये है। इससे लगता है कि बड़ी कंपनियां बैंक से लोन लेने के बजाय बॉन्ड, शेयर या विदेशी कंपनियों से सीधे लोन ले रही हैं, जो बैंक के आंकड़ों में नहीं दिखता। खेती-किसानी और उससे जुड़े कामों के लिए लोन 8.9% बढ़कर 24.03 लाख करोड़ रुपये हो गया।

प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में रिन्यूएबल एनर्जी के लिए लोन 52.1% बढ़ा है। प्राथमिकता वाले हाउसिंग लोन 32.7% बढ़े हैं और माइक्रो और स्मॉल एंटरप्राइजेज को दिए जाने वाले लोन 25.8% बढ़े हैं। सोशल-इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए लोन कम हुआ है और एक्सपोर्ट क्रेडिट में भी कमी आई है।

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