जोगा सिंह के 'जुगाड़' से दंग रह गए थे जापानी इंजीनियर, बिजनस स्कूलों में पढ़ाया जाता है यह किस्सा

Updated on 26-09-2025 02:46 PM
नई दिल्ली: देश की सबसे बड़ी ऑटो कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया ने एक और उपलब्धि अपने नाम कर ली है। मारुति भारत की पहली ऑटो कंपनी है जो मार्केट कैप के हिसाब से दुनिया की टॉप 10 कंपनियों में शामिल हुई है। उसने अमेरिका की फोर्ड, जनरल मोटर्स और जर्मनी की फॉक्सवैगन को पीछे छोड़ दिया है। कंपनी का मार्केट कैप 5,13,625.34 करोड़ पहुंच चुका है। मारुति दुनिया की आठवें सबसे वैल्यूएबल ऑटो कंपनी और भारत की 12वीं सबसे मूल्यवान कंपनी है। मारुति ने पिछले कई साल से भारतीय बाजार में दबदबा बना रखा है। देश में बिकने वाली करीब आधी गाड़ियां इसकी कंपनी की हैं।

मारुति सुजुकी ने दिसंबर 1983 में प्रॉडक्शन शुरू किया था। कंपनी की गाड़ियां इतनी हिट हुई कि आज यह देश की सबसे बड़ी ऑटो कंपनी है। यह कंपनी करीब 100 देशों में गाड़ियों का निर्यात करती है। गुरुग्राम में मारुति की फैक्ट्री से जुड़ा एक किस्सा मशहूर है जिसे आज भी मैनेजमेंट कॉलेजों में पढ़ाया जाता है। यह वाकया साल 1981 का है। उस दौर में भारत में केवल एंबेसेडर और पद्मिनी जैसी कारों का राज था। लेकिन इनकी पहुंच एक सीमित वर्ग तक थी।

जोगा सिंह का जुगाड़

तब देश में एक छोटी कार की जरूरत महसूस हुई जो मिडिल क्लास की जेब के मुताबिक हो। इसके लिए भारत ने पूरी दुनिया में टेक्नोलॉजी पार्टनर की जरूरत थी। भारत में अमेरिका और जर्मनी सहित पूरी दुनिया में इसकी तलाश की। आखिरकार उसकी तलाश जापान में पूरी हुई। इससे मारुति सुजुकी की शुरुआत हुई। इसकी पहली फैक्ट्री गुरुग्राम में लगी। इस फैक्ट्री को बनाने में सहयोग करने के लिए जापान के कई इंजीनियर भारत आए थे।
फैक्ट्री में एक बहुत बड़ी मशीन को जमीन के अंदर सेट करना था। जापान में यह मामूली बात थी लेकिन भारत में इसकी टेक्नोलॉजी नहीं थी। जापानी इंजीनियरों ने बहुत कोशिश की लेकिन उन्हें कामयाबी नहीं मिली। आखिरकार उन्होंने हार मान ली और अपने होटल चले गए। दूसरे दिन जब वे आए तो उन्हें पता चला कि भारतीय इंजीनियर कई टन की उस मशीन को जमीन के अंदर सेट कर चुके हैं। जापानी इंजीनियरों को यह देखकर हैरानी हुई। जब उन्होंने इस बारे में पूछा गया तो उन्हें बताया गया कि यह इंजीनियरिंग विभाग के बॉस जोगा सिंह का आइडिया था।

कैसे हुआ कमाल

जापानी इंजीनियरों ने जब इस बारे में जोगा सिंह से पूछा तो उन्होंने बताया कि यह आसान था। उन्होंने पूरे गड्ढे में बर्फ भर दी और फिर उसके ऊपर मशीन सरकाई। बर्फ धीरे-धीरे पिघलती गई और मशीन सेट हो गई। यह सुनकर जापानी इंजीनियर दंग रह गए। यह सुनने में भले ही अजीब लगता हो लेकिन भारतीय इंजीनियरों ने देसी जुगाड़ से यह कमाल कर दिया। आज भी मैनेजमेंट कॉलेजों में यह किस्सा सुनाया जाता है।

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